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गर्भावस्था के दौरान डायबिटिक महिलाएं रखें अपना ख्याल -कोरोना संक्रमण में सतर्कता ज़रूरी। दरभंगा news 24 live – (अजित कुमार सिंह)

गर्भावस्था के दौरान डायबिटिक महिलाएं रखें अपना ख्याल

-कोरोना संक्रमण में सतर्कता ज़रूरी
-चिकित्सकीय मदद के लिए निकट के सरकारी अस्पताल में करें सम्पर्क

 

दरभंगा गर्भावस्था का समय हर महिला के लिए बेहद खास होता है। इस दौरान वो कई शारीरिक, मानसिक और भावनात्मक बदलावों से गुजरती हैं। इस दौरान महिलाओं को अपने साथ-साथ गर्भस्थ शिशु का भी ध्यान रखना पड़ता है। स्त्री रोग विशेषज्ञ डॉ सीमा कुमारी ने बताया गर्भावस्था के दौरान तथा जन्म लेने के बाद कुछ जटिलताओं की वजह से नवजात कई गंभीर बीमारियों की चपेट में आ जाती हैं। गर्भावधि में डायबिटीज से पीड़ित महिलाओं से जन्मे शिशुओं में सेरिब्रल पाल्सी की संभावना अधिक होती है। उन्होंने कहा एक शोध के अनुसार इस बीमारी से जूझ रहे 9.2 प्रतिशत वयस्क आगे चलकर डायबिटीज की चपेट में आ जाते हैं।

क्या है सेरिब्रल पाल्सी बीमारी:

डॉ कुमारी ने कहा सेरिब्रल पाल्सी यानि कि मस्तिष्क पक्षाघात, इसमें ह्यूमन एक्टिविटीज को नियंत्रित करने वाले मस्तिष्क के एक या अधिक हिस्से की क्षति के कारण प्रभावित व्यक्ति अपनी मांसपेशियों को सामान्य ढंग से नहीं हिला सकता। इस बीमारी के लक्षण लकवा से मिलते हैं। असामान्य रूप से हाथों और पैरों का की हिलाना सेरेब्रल पाल्सी का सामान्य लक्षण है। चलने और बातचीत करने का धीमा विकास, मांसपेशियों के खिंचाव में भिन्नताएं जैसे बहुत कम या ज्यादा खिंचाव होना। शिशुओं को खाने में परेशानी, मांसपेशियों में ऐंठन, शरीर में अकड़न, और भैंगापन आदि इसके लक्षण हैं। इस बीमारी का प्रभाव कम, मध्यम या गंभीर हो सकता है। कहा भारत में इस बीमारी के 14 में से 13 मामले गर्भ में या जन्म के बाद पहले महीने के दौरान विकसित होते हैं।

डायबिटिक महिलाओं को रहना चाहिए अधिक सतर्क:

डायबटीज से पीड़ित महिलाओं के लिए गर्भावस्था अधिक चुनौतीपूर्ण और जटिल होता है। डायबिटीज न सिर्फ गर्भवती महिलाओं के स्वास्थ्य पर असर डालता है बल्कि उनके अजन्मे बच्चे के विकास को भी प्रभावित करता है। मधुमेह की वजह से बच्चे कई बीमारियों के शिकार हो सकते हैं। चिकित्सक के अनुसार गर्भावधि के दौरान महिलाओं में मधुमेह की वजह से बच्चों का वजन अधिक होता है| जिस कारण प्रसव में परेशानी आती है। जिससे नवजात में ऑक्सीजन की कमी हो जाती है। एस्फिक्सिया यानि कि ऑक्सीजन की कमी ब्रेन डैमेज होने का एक आम कारण है, जिससे शिशु में सेरेब्रल पाल्सी की संभावना का खतरा बढ़ जाती ता है।

गर्भावस्था प्रेग्नेंसी में डायबिटीज गर्भवती ऐसे रखें अपना ख्याल:

डॉ. सीमा ने बताया बखा इस दौरान ब्लड शुगर कंट्रोल में रखना बहुत जरूरी है। इसलिए नियमित रूप से जांच करवाएं और डॉक्टर के संपर्क में रहें। मधुमेह से ग्रसित गर्भवती महिला को व्यायाम जरूर करना चाहिए, इससे शरीर स्वस्थ बॉडी हेल्दी रहती है। समय पर उठकर योगा-ध्यान और थोड़ी देर टहलना भी गर्भवती महिलाओं के लिए फायदेमंद होगा। गर्भवती महिला को संतुलित भोजन करना चाहिए ताकि बच्चा और मां दोनों दोनो स्वस्थ रहें। शुगर या स्टार्च युक्त भोजन करने से परहेज करें।

गर्भावस्था में ये पांच टेस्ट कराना जरूरी:

ब्लड टेस्ट
यूरिन टेस्ट
ब्लड प्रेशर
हीमोग्लोबिबीन
अल्ट्रासाउंड

कोरोना में सतर्कता ज़रूरी

डॉ सीमा ने बताया कोरोना संक्रमण के इस दौर में सभी लोगों को सावधान रहना चाहिए। खासकर गर्भवती महिलाओं को और भी सतर्कता जरूरी है। ताकि गर्भस्थ शिशु को कोई समस्या में ना हो। इससे बचने के लिए कोरोना प्रोटोकॉल काल का पालन जरूरी है।अति आवश्यक होने पर ही घर से बाहर निकलना चाहिए। कहा किसी प्रकार की चिकित्सा के लिए निकट के सरकारी अस्पताल में सम्पर्क कर सकते हैं है, या निकट के आंगनबाड़ी केंद्र पर जाकर मदद ले सकते हैं है।

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