सी एम कॉलेज, दरभंगा में 10 दिवसीय संस्कृत संभाषण शिविर का हुआ उद्घाटन
*आजादी के
75 वें वर्ष में मनाए जा रहे अमृत महोत्सव के अवसर पर 75 प्रतिभागियों के साथ शिविर संचालित*
*सर्वज्ञान- विज्ञान से युक्त संस्कृत भाषा अध्ययन से देवत्व के गुणों का आगमन संभव- प्रो अमरनाथ*
*विश्व की प्राचीन भाषाओं में संस्कृत जीवंत है जो हमारी बहुमूल्य धरोहर- प्रो जीवानंद*
*संस्कृत- ज्ञान गंगा की तरह प्रवाहित धारा जो व्यक्ति को बनाता है आत्मविश्वासी- प्रो विश्वनाथ*
*अनौपचारिक संस्कृत शिक्षण के छमाही सर्टिफिकेट कोर्स में नामांकन जारी- डा चौरसिया*
संस्कृत देववाणी है, जिसके मंत्रों के गुंजन से स्वतः ही आध्यात्मिक वातावरण का निर्माण होता है। यह उच्चारण मूलक वैज्ञानिक भाषा है। सर्वज्ञान- विज्ञान संपन्न संस्कृत भाषा के अध्ययन- अध्यापन से देवत्व का आगमन होता है। संस्कृत शास्वत एवं सनातन भाषा है, जिसके पठन- पाठन से पशुता का नाश एवं मानवता का उदय होता है। उक्त बातें मिथिला विश्वविद्यालय के मानविकी संकायाध्यक्ष प्रो अमरनाथ झा ने सी एम कॉलेज, दरभंगा के संस्कृत विभाग के तत्वावधान में आयोजित दस दिवसीय संस्कृत संभाषण शिविर में मुख्य अतिथि के रूप में कहा। उन्होंने कहा कि सिर्फ संस्कृत का गुणगान ही नहीं, बल्कि उसमें निहित नीति तत्वों को आचरण में उतारने की जरूरत है।
मुख्य वक्ता के रूप में विश्वविद्यालय संस्कृत विभागाध्यक्ष प्रो जीवानंद झा ने कहा कि विश्व की प्राचीन भाषाओं में संस्कृत जीवंत भाषा है जो हमारी बहुमूल्य धरोहर भी है। सरल संस्कृत के माध्यम से संस्कृत को पढ़ना- लिखना आसान है। इसमें हमारी जरूरत की हर बात का वर्णन विद्यमान है। इस आदिभाषा को हम संस्कृत, हिन्दी, अंग्रेजी या मैथिली आदि माध्यमों से भी पढ़कर लाभ उठा सकते हैं। संस्कृत को निष्ठा पूर्वक पढ़ने वाला कुशल प्रशासक,सफल राजनीतिज्ञ, सच्चा समाजसेवी तथा बेहतर शिक्षक बन सकता है।
अध्यक्षीय संबोधन में प्रधानाचार्य प्रो विश्वनाथ झा ने कहा कि संस्कृत- ज्ञान गंगा की तरह प्रवाहित धारा है जो व्यक्ति को आत्मविश्वास बनाता है। इस 10 दिवसीय शिविर में भाग लेने वाले प्रत्येक प्रतिभागी में अत्यंत ही सकारात्मक परिवर्तन आएंगे और वे न केवल ज्ञान प्राप्त करेंगे, बल्कि उनके व्यवहार भी व्यवस्थित होंगे। उन्होंने संस्कृत के कई मंत्रों का सामूहिक उच्चारण अभ्यास कराया।
अतिथियों का स्वागत करते हुए संस्कृत विभागाध्यक्ष डा आर एन चौरसिया ने बताया कि इस वर्ष महाविद्यालय में दूसरा दस दिवसीय शिविर का आयोजन हो रहा है, जिसमें अब तक 75 प्रतिभागियों ने नामांकन लिया है। यह शिविर 30 नवंबर तक ऑफलाइन एवं ऑनलाइन मोड में संचालित होंगे। इसी दौरान केन्द्रीय संस्कृत विश्वविद्यालय, नई दिल्ली के अनौपचारिक संस्कृत शिक्षण में छमाही सर्टिफिकेट कोर्स में नामांकन भी शुरू किया गया है, जिसमें दसवीं कक्षा उत्तीर्ण 50 प्रतिभागियों का नामांकन लिया जाएगा, जिसका उद्घाटन शिविर के दौरान ही किया जाएगा।
संभाषण प्रशिक्षिका अंशु कुमारी ने बताया कि प्रतिभागियों को प्रतिदिन 2 से 4 बजे के बीच महाविद्यालय के सेमिनार हॉल में प्रत्यक्षः बोलकर, संकेत व चित्र आदि माध्यम से संस्कृत में बातचीत करना सिखाया जाएगा।
समारोह में प्रो इन्दिरा झा, प्रो मंजू राय, डा प्रीति कानोडिया, डा अभिलाषा कुमारी, डा भारती कुमारी, डा अखिलेश कुमार विभू, प्रो दिवाकर सिंह, शंभू मंडल, सुधांशु शेखर, सत्यम कुमार,डा अमरजीत, कैलाश, राघव झा, जूही झा, अजीत कुमार झा, डा रामबाबू चौपाल, ज्योति कुमारी, अक्षिता मिश्रा, हरि दर्शन, अंबे रानी, लवली, नित्यानंद, सत्संगी, नरेश, जयशंकर झा तथा काजल कुमारी सहित 80 से अधिक व्यक्तियों ने भाग लिया। आगत अतिथियों का स्वागत पुष्पगुच्छ एवं स्मृतिचिह्न से किया गया। वैदिक पाठ गोपाल कुमार झा ने प्रस्तुत किया, जबकि सूरज ने संस्कृत भाषा की महत्ता पर कविता पाठ किया। हिन्दी की प्राध्यापिका डा रीता दुबे के सफल संचालन में आयोजित कार्यक्रम में शिविर संचालिका अंशु कुमारी ने धन्यवाद ज्ञापन किया।
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