स्वर सम्राज्ञी के निधन पर विद्यापति सेवा संस्थान ने जताया शोक

लताजी सफल, सम्मानित और गरिमापूर्ण जीवन जीकर अंतिम यात्रा पर निकल चुकी हैं.उनकी महान छवि को नमन, विनम्र श्रद्धांजलि. उक्त बातें स्वर सम्राज्ञी लता मंगेशकर के निधन पर रविवार को शोक संवेदना व्यक्त करते हुए विद्यापति सेवा संस्थान के महासचिव डा बैद्यनाथ चौधरी बैजू ने कही. उन्होंने कहा कि भारतीय सिनेमा में उनके कद की कोई दूसरी गायिका नहीं हुई. भारत रत्न से विभूषित लता जी ने असाधारण जीवन जिया. एक मनुष्य के जीवन में सफलता के जितने मानक होते हैं, उसको तोड़ते हुए नए कीर्तिमान स्थापित करती, आगे बढ़ती और निरंतर गाती हुई वह आज हम सबसे बहुत दूर हो चुकी हैं लेकिन उनकी स्मृतियां, गीत तब तक आबाद रहेंगे, जब यह दुनिया रहेगी.
मैथिली अकादमी के पूर्व अध्यक्ष पं कमला कांत झा ने कहा कि प्रेम, राष्ट्र, जीवन संघर्ष और उत्कर्ष के जितने भी पक्ष होते हैं, सबके सब लताजी के गीतों में जीवंत हैं. प्रो जीव कांत मिश्र ने कहा कि लता जी की जीवन -यात्रा पर हम गर्व करते हैं. मणि कांत झा ने कहा कि लताजी का होना भारतीय सिनेमा, कला, संस्कृति का होना है, उनका होना भारतीय महिला की ऐसी छवि का होना है जो काजल की कोठरी में भी उज्ज्वल बनी रही.
प्रवीण कुमार झा ने कहा कि उनके चेहरे पर खिलती निश्छल मुस्कान किसी को भी मोहित करने में सक्षम थी. अपने कृतित्व में वह हर उस जगह हैं, जहां–जहां मनुष्य होने की कसक बची हुई है. शोक जताने वाले अन्य लोगों में डॉ महेंद्र नारायण राम, डा श्रीपति त्रिपाठी, हीरा कुमार झा, हरिश्चंद्र हरित, डॉ गणेश कांत झा, विनोद कुमार झा, प्रो विजयकांत झा, डॉ उदय कांत मिश्र, दुर्गा नंद झा, डॉ महानंद ठाकुर, आशीष चौधरी, पुरूषोत्तम वत्स आदि शामिल थे.
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