जिले के सभी स्वास्थ्य संस्थानों के चिकित्सकों को दिया गया एईएस का प्रशिक्षण
– कोविड केयर सेंटर में दिया गया प्रशिक्षण
– छह माह से 15 वर्ष तक के बच्चों में चमकी /मस्तिष्क ज्वर की संभावना बनी रहती है।

मधुबनी कोविड केयर सेंटर में जिले के सभी स्वास्थ्य संस्थानों के चिकित्सकों को एईएस (चमकी बुखार) का एक दिवसीय प्रशिक्षण दिया गया। जिसमें जिले के सभी स्वास्थ्य संस्थानों के प्रभारी चिकित्सा पदाधिकारी, एक-एक एमबीबीएस डाॅक्टर, आरबीएसके के डाॅक्टर समेत बीएचएम, बीसीएम और कालाजार के वीबीडीएस शामिल हुए। जिला वेक्टर जनित रोग नियंत्रण पदाधिकारी डॉ विनोद कुमार झा ने बताया प्रशिक्षण में सभी प्रतिभागियों को चमकी बुखार के कारण, लक्षण, बचाव और समुचित इलाज की विस्तृत जानकारी दी गई है। ताकि प्रशिक्षण प्राप्त करने वाले सभी प्रतिभागी संबंधित मरीजों का सुविधाजनक तरीके जरूरी इलाज कर सकें और मरीजों को भी इलाज के लिए जिले से बाहर नहीं जाना पड़े। डॉ झा ने बताया कि अप्रैल से जुलाई तक जिले में छह माह से 15 वर्ष तक के बच्चों में चमकी /मस्तिष्क ज्वर की संभावना बनी रहती है। लोग चमकी को सही समय पर जान सकें, ताकि इसके लक्षण जानकर समय पर इलाज कराकर सुरक्षित रह सकें, इसके लिए जिले में स्वास्थ्य विभाग ने अपनी तैयारियां पूरी कर ली है। लोगों को बताया जा रहा है कि चमकी के लक्षण मिलते ही बच्चों को तुरंत सरकारी अस्पताल ले आएं ,बिल्कुल भी देरी न करें। अस्पताल से दूरी होने पर एम्बुलेंस किराए पर लेकर तुरंत पहुंचे,यात्रा का भाड़ा अस्पताल द्वारा दिया जाएगा।
चमकी के लक्षणों व उससे बचाव के सिखाए जा रहे हैं तरीके:
क्षेत्रीय स्वास्थ्य प्रबंधक विनय कुमार चौधरी ने बताया कि जिले भर में जीविका दीदियों, आशा फैसिलिटेटरों, आंगनबाड़ी कार्यकर्ताओं व स्वास्थ्य कर्मियों के सहयोग से चमकी बुखार के लक्षणों को समझाते हुए स्वास्थ्य कर्मी इससे बचाव के गुर अपने पोषक क्षेत्र में बताएंगे। जैसे कि बच्चे रात में खाली पेट न सोएं, बेवजह धूप में निकलें, कच्चे आम, लीची व कीटनाशकों से युक्त फलों का सेवन न करें, आदि बातें सिखा रहे हैं। सभी स्वास्थ्य केन्द्रों पर ओआरएस के पाउडर व पारासिटामोल की गोली पर्याप्त मात्रा में उपलब्ध रखने का निर्देश दिया गया है। ताकि जिले में चमकी के प्रभाव को रोका जा सके।
चमकी से बचने के लिए चौपाल का करें आयोजन;
जिला वेक्टर जनित रोग नियंत्रण पदाधिकारी डॉ विनोद झा ने बताया कि जिले के सभी प्रखण्ड अस्पतालों के प्रभारियों को गर्मियों में होने वाले चमकी बुखार से बचाव को अलर्ट रहने का निर्देश दिया गया है। उन्होंने बताया कि जिले के तमाम मेडिकल टीमों को जन जागरूकता व मेडिकल व्यवस्था के साथ एईएस से लड़ने के लिए तैयार किया जा रहा है। इसके लिए स्वास्थ्य केंद्रों में तैयारियां की जा रही हैं। जिले की जीविका दीदियों, आशा फैसिलिटेटरों, नर्सो को समय समय पर एईएस से सम्बंधित जानकारी दी जायगी । बच्चों को एईएस से बचाने के लिए माता-पिता को शिशु के स्वास्थ्य के लिए अलर्ट रहना चाहिए। समय-समय पर देखभाल करते रहना चाहिए। स्वस्थ बच्चों को मौसमी फलों, सूखे मेवों का सेवन करवाना चाहिए। साफ सफाई पर विशेष ध्यान रखना चाहिए। छोटे बच्चों को मां का दूध पिलाना बेहद आवश्यक है।
– ये है चमकी बुखार के लक्षण :
– लगातार तेज बुखार चढ़े रहना।
– बदन में लगातार ऐंठन होना।
– दांत पर दांत दबाए रहना।
– सुस्ती चढ़ना।
– कमजोरी की वजह से बेहोशी आना।
– चिउंटी काटने पर भी शरीर में कोई गतिविधि या हरकत न होना आदि।
– चमकी बुखार से बचाव को ये सावधानियां हैं जरूरी :
– बच्चे को बेवजह धूप में घर से न निकलने दें।
– गन्दगी से बचें , कच्चे आम, लीची व कीटनाशकों से युक्त फलों का सेवन न करें।
– ओआरएस का घोल, नीम्बू पानी, चीनी लगातार पिलायें।
– रात में भरपेट खाना जरूर खिलाएं।
– बुखार होने पर शरीर को पानी से पोछें।
– पारासिटामोल की गोली या सिरप दें।
मौके पर जिला वेक्टर जनित रोग नियंत्रण सलाहकार नीरज कुमार सिंह, केयर इंडिया के डिटेल महेंद्र सिंह सोलंकी सहित कई कर्मी उपस्थित थे.
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