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सीएम साइंस कॉलेज में मशरूम कल्चर एंड कल्टीवेशन विषय पर कार्यशाला आयोजित

सीएम साइंस कॉलेज में मशरूम कल्चर एंड कल्टीवेशन विषय पर कार्यशाला आयोजित

कार्यशाला में कुल 200 प्रतिभागियों ने सीखे मशरूम की खेती के गुर

आज का जमाना रोजगार और शिक्षा का है। प्रतिस्पर्धा के वर्तमान युग में छात्र-छात्राओं को शिक्षा के साथ-साथ जीविकोपार्जन के लिए हुनरमंद बनाने के उद्देश्य से महाविद्यालय में मशरूम कल्टीवेशन पाठ्यक्रम चलाया जा रहा है। उक्त बातें सीएम साइंस कॉलेज के प्रधानाचार्य प्रो दिलीप कुमार चौधरी ने वनस्पति विज्ञान विभाग के तत्वावधान में ‘मशरूम कल्चर एंड कल्टीवेशन’ विषय पर सोमवार को आयोजित एक दिवसीय कार्यशाला का शुभारंभ करते हुए कही उन्होंने कहा कि मशरूम का उत्पादन एक इको-फ्रैंडली गतिविधि है, क्योंकि इसमें कृषि एवं एग्रो-प्रोसेसिंग अवशेषों आदि को इसके उत्पादन के लिए प्रयोग में लाया जाता है, जो न केवल पर्यावरण को प्रदूषित होने से बचाने व पौष्टिक खान पान उपलब्ध कराने में सहायक है बल्कि रोजगार के अनेक अवसर भी प्रदान करता है।
कार्यशाला में विषय विशेषज्ञ के रूप में उपस्थित वनस्पति विज्ञान की सेवानिवृत्त प्राचार्य डा सुनीला दास ने बताया कि मशरूम की खेती एक ऐसा व्यवसाय है जिसमें सेहत के साथ-साथ किसानों को अच्छा मुनाफा होता है। इसकी वर्षभर डिमांड रहती है, लेकिन मांग की तुलना में आपूर्ति बेहद कम है। ऐसे में किसान मशरूम की खेती कर अच्छा मुनाफा कमा सकते हैं। उन्होंने बताया कि मशरूम पौष्टिकता से भरपूर एक उत्तम आहार है। इसमें एमीनो एसिड, खनिज-लवण, विटामिन जैसे कई पौष्टिक तत्व होते हैं, जो मरीजों के लिए एक दवा की तरह काम करता है। डॉक्टर और डाइटीशियन भी मोटापा, हार्ट-डिजीज और डायबिटीज़ के रोगियों को इसका सेवन करने की सलाह देते हैं।
राजेन्द्र कृषि केन्द्रीय विश्वविद्यालय से संबद्ध पप्पू कुमार ने कहा कि मशरूम की खेती एक ऐसी खेती है, जिसमें खेत की जरूरत नहीं होती है। अपने घरों में ही इसकी खेती बखूबी कर सकते हैं। इसके लिए महज एक या दो कमरों की जरूरत होती है, जहाँ मशरूम के कंपोस्ट के बैगों को रखकर इसकी उत्तम खेती कर सकते हैं।
छात्रा पल्लवी के संचालन में आयोजित कार्यशाला में अतिथियों का स्वागत वनस्पति विज्ञान विभागाध्यक्ष डॉ दिलीप कुमार झा ने करते हुए कार्यशाला के आयोजन के उद्देश्यों पर प्रकाश डाला। धन्यवाद ज्ञापन कार्यशाला के आयोजन सचिव डॉ खालिद अनवर ने किया। कार्यशाला में करीब 200 प्रतिभागियों ने अपनी सक्रिय हिस्सेदारी दी। जिन्हें प्रमाण पत्र प्रदान किया गया। मौके पर मशरूम के विभिन्न उत्पादों की लगाई गई प्रदर्शनी प्रतिभागियों के विशेष आकर्षण के केन्द्र में रहा।

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