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लनौनिहालों के पास पुस्तक नही रहने से पढ़ाई होती है प्रभावित: निराला छातापुर – सुपौल सोनू कुमार भगत की रिपोर्ट

लनौनिहालों के पास पुस्तक नही रहने से पढ़ाई होती है प्रभावित: निराला

कोरोना वायरस से उबरने पर सरकारी विद्यालय भले ही खुल गए हो, लेकिन नौनिहालों को नई पुस्तकें नहीं मिल सकी हैं।नये सत्र को एक पखवाड़ा बीत जाने के बाद भी वह पुरानी व पिछली कक्षा की किताबों के जरिये शिक्षा ग्रहण कर रहे हैं। यह हालात एक दो विद्यालय के नहीं बल्कि प्रखंड के सभी विद्यालयों के बने हुए हैं। इससे नौनिहाल पुरानी किताबों के जरिये नई शिक्षा लेने को मजबूर हैं।सरकारी विद्यालय में पढ़ने वाले नौनिहालों को प्रत्येक शैक्षिक सत्र में सरकार द्वारा निशुल्क पाठ्य पुस्तकें दी जाती रही है।लेकिन, अब पाठ्य पुस्तकें की जगह उतनी राशि अभिभावकों के बैंक खाते में डीबीटी के माध्यम से सीधे हस्तांतरित की जाती है।लेकिन अब नई मुसीबत यह है कि पैसे मिलने के बाद भी बच्चे किताब खरीद नहीं रहे हैं अभिभावक इन पैसों से अपनी दूसरी जरुरतें पूरी कर रहे हैं।
शिक्षक सह युवा कवि नरेश कुमार निराला ने कहा कि पिछले के वर्षों में कई चरणों में पुस्तकें आ जाती थी। इससे नौनिहाल अपनी पढ़ाई शुरू कर देते थे। लेकिन अब अभिभावकों के खाते में राशि आती है।बच्चों को समय से पुस्तके उपलब्ध कराना अभिभावकों की जिम्मेदारी भी है।बच्चे पुस्तकों के लिए आस लगाए रहते हैं।कई जगहों पर बिना किताबों के ब्लैक बोर्ड पर ही पढ़ाई कराई जा रही है। इससे करीब एक लाख बच्चे प्रभावित हो रहे हैं।सरकार ई कंटेंट के माध्यम से पढ़ाने के लिए प्रेरित करती है।लेकिन इसे भी लेकर सवाल उठ रहे हैं कि जब गरीब बच्चों के परिवार के पास मोबाइल, लैपटॉप या टैब नहीं हैं तो ई कंटेंट से पढ़ाई कैसे होगी।श्री निराला ने माननीय मुख्यमंत्री, प्रधान सचिव, अपर मुख्य सचिव, शिक्षा मंत्री आदि को पत्र लिखकर बच्चों को सीधे पुस्तक उपलब्ध कराने की मांग की है। निराला ने कहा कि अधिकांश बच्चे या उनके अभिभावक पढ़ने के लिए किताब नहीं खरीद रहे हैं।इससे पठन पाठन में काफी परेशानी का सामना करना पड़ रहा है।युवा कवि कहा कि 6 से 14 साल की उम्र के हरेक बच्चे को मुफ्त और अनिवार्य शिक्षा का अधिकार है। संविधान के 86वें संशोधन द्वारा शिक्षा के अधिकार को प्रभावी बनाया गया है। सरकारी स्कूल सभी बच्चों को मुफ्त शिक्षा उपलब्ध करायेंगे और स्कूलों का प्रबंधन स्कूल समितियों (एसएमसी) द्वारा किया जायेगा।लेकिन, नौनिहाल को पुस्तक नही मिलने से गुणवत्तापूर्ण शिक्षा पर सवाल खड़ा होता है। निराला ने जिलाधिकारी सुपौल के माध्यम से राज्य सरकार को आवेदन देकर जल्द-से-जल्द पुस्तक मुहैया कराने की मांग की है।

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