भक्तिमय बना है मनीगाछी प्रखंड का टटुआर गाँव

मनीगाछी प्रखंड अंतर्गत टटुआर गांव का वातावरण इन दिनों भक्तिमय बना हुआ है। बीते सोमवार से यहाँ श्रीमद् भागवत कथा ज्ञान यज्ञ चल रहा है। इस धार्मिक अनुष्ठान के कारण टटुआर गांव सहित आसपास के पड़ोसी गांवों ब्रह्मपुरा, चनौर, फूलवन, बघाँत, सखवार, राजे, बलौर, मकरंदा आदि का वातावरण भी भक्तिमय बना हुआ है।
श्रीमद् भागवत कथा ज्ञान यज्ञ आगामी रविवार तक चलेगा। इसकी पूर्णाहुति उरांत अष्टयाम संकीर्तन का आयोजन किया जाएगा। जिसमें सखबाड़, फुलवन, ब्रह्मपुरा, चनौर, उजान एवं राजे आदि गाँव के कीर्तन मंडलियों की भक्तिमय प्रस्तुतियां होंगी। आयोजन को सफल बनाने मे गाँव के बुजुर्ग एवं युवा कंधे से कंधा मिलाकर दिन रात लगे हुए हैं ।
शनिवार को श्रीमद् भागवत कथा वाचक पं किशोरी चरण दास ने बताया कि श्रीमद्भागवत कथा ज्ञान यज्ञ का उद्देश्य विश्वशांति व विश्व कल्याण की कामना करना है। यज्ञ से विश्व का कल्याण होता है। यज्ञ से ही सभी जीवों की उत्पत्ति होती है। जब यज्ञ में आहुति दी जाती है तब धुंआ निकलता है। धुंआ से बादल बनता है और बादल से वर्षा होती है। फिर वर्षा से फसल की उत्पत्ति होती है। फिर सभी जीवों की उत्पत्ति होती है। भगवान की भी उत्पत्ति यज्ञ से ही हुई है यदि यज्ञ न हो तो मेरी भी और आपकी भी उत्पत्ति नहीं होगी। यज्ञ ही मात्र एक उपाय है, जिसमें समस्त प्राणियों का ही नहीं विश्व के सभी प्राणियों का कल्याण होता है।
उन्होंने बताया श्रीमद् भागवत कथा श्रवण से जन्म जन्मांतर के विकार नष्ट हो जाते हैं। जहां अन्य युगों में धर्म लाभ एवं मोक्ष प्राप्ति के लिए कड़े प्रयास करने पड़ते हैं, कलियुग में कथा सुनने मात्र से व्यक्ति भवसागर से पार हो जाता है। सोया हुआ ज्ञान वैराग्य कथा श्रवण से जाग्रत हो जाता है। कथा कल्पवृक्ष के समान है, जिससे सभी इच्छाओं की पूर्ति की जा सकती है।
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