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सी.एस. ने की रात्रि रक्तपट् संग्रह हेतु जिला समन्वय समिति की बैठक

सी.एस. ने की रात्रि रक्तपट् संग्रह हेतु जिला समन्वय समिति की बैठक

दरभंगा  सिविल सर्जन-सह-सदस्य सचिव, जिला स्वास्थ्य समिति डॉ. अनिल कुमार सिन्हा की अध्यक्षता में फाईलेरिया नियंत्रण कार्यक्रम अन्तर्गत रात्रि रक्तपट् संग्रह हेतु जिला समन्वय समिति की बैठक उनके कार्यालय प्रकोष्ट में आहूत की गयी।
फाईलेरिया नियंत्रण कार्यक्रम अन्तर्गत प्रत्येक वर्ष के भाँति इस वर्ष भी बहादुरपुर, हनुमाननगर, हायाघाट, सिंहवाड़ा, केवटी एवं दरभंगा सदर प्रखंड तथा शहरी क्षेत्र के चिन्ह्ति ग्रामों में 11 मई से 17 मई 2022 तक सर्वजन दवा सेवन कार्यक्रम पूर्व रात्रि रक्तपट् संग्रह कार्यक्रम हेतु प्राथमिक स्वास्थ्य केन्द्र, बहादुरपुर के ग्राम प्रेम जीवर के आँगनवाड़ी केन्द्र से सिविल सर्जन डॉ. अनिल कुमार के द्वारा फीता काटकर शुभारंभ किया गया।
इस अवसर पर स्थानीय जनप्रतिनिधि एवं प्रभारी चिकित्सा पदाधिकारी, बहादुरपुर डॉ. तारिक मंजर, जिला कार्यक्रम प्रबंधक, जिला स्वास्थ्य समिति विशाल कुमार सिंह, जिला वेक्टर जनित रोग नियंत्रण पदाधिकारी सहित अन्य पदाधिकारी उपस्थित थे।
रात्रि रक्तपट् संग्रह कार्यक्रम के सफल संचालन हेतु जिला स्तर पर जिल समन्वय समिति की बैठक् सिविल सर्जन-सह-सदस्य सचिव, जिला स्वास्थ्य समिति, दरभंगा में आयोजित कर कार्यक्रम को सफल संचालन हेतु स्थानीय जनप्रतिनिधि से जन सहयोग हेतु प्रचार-प्रसार कर संभावित फाईलेरिया रोगी की खोज हेतु निदेश दिया गया तथा कार्य-योजना के अनुसार निर्धारित समय के अनुसार कार्यक्रम को पूरा करने का आदेश संबंधित कार्यक्रम पदाधिकारी को दिया गया।
फाईलेरिया नियंत्रण कार्यक्रम अन्तर्गत रात्रि रक्तपट् संग्रह कराने का मुख्य उद्देश्य आम जनमानस के बीच फाईलेरिया के छुपे हुए रोगियों की खोज करना तथा फाईलेरिया रोग से बचाव एवं उपचार के साथ प्रचार-प्रसार के माध्यम से जागरूक कर फाईलेरिया रोग पर नियंत्रण रखा जा सकता है।
फाईलेरिया रोग का लक्षण – आम तौर पर फाईलेरिया के कोई लक्षण स्पष्ट रूप से दिखाई नहीं देता है। हलांकि बुखार, बदर में खुजली और पुरूषों के जननांग एवं उसके आस-पास दर्द व सूजन, हाइड्रोसिल (अंडकोष की सूजन) भी फाईलेरिया रोग का गम्भीर लक्षण है।
उपर्युक्त लक्षण होने पर फाईलेरिया की जाँच हेतु प्राथमिक स्वास्थ्य केन्द्र पर ले जाये, जहाँ निःशुल्क जाँच एवं उपचार की जाती है।
मच्छर से बचाव के लिए जमे हुये नाले की पानी में जले हुए मोबिल अथवा मिट्टी का तेल का छिड़काव करना चाहिये, ताकि मच्छरों का प्रकोप से बचा जा सकता है, सोते समय मच्छरदानी अथवा मच्छर भगाने वाले क्रिम एवं पूरे बदन को ढकने वाले कपड़े पहनना चाहिए।
इस अवसर पर उपस्थित पदाधिकारियों ने फाईलेरिया रोग के लक्षण, बचाव एवं उपचार पर अपने-अपने विचार रखे।
बैठक में एन.सी.डी.ओ. डॉ. सत्येन्द्र कुमार मिश्रा, जिला प्रतिरक्षण पदाधिकारी डॉ. अमरेन्द्र कुमार मिश्रा, जिला वेक्टर जनित रोग नियंत्रण डॉ. जयप्रकाश महतो, डी.पी.एम. विशाल कुमार सिंह, जिला वेक्टर जनति रोग सलाहकार बबन प्रसाद राम, डी.टी.एल. केयर इण्डिया श्रद्धा झा, डी.पी.ओ. केयर इण्डिया प्रमोद कुमार, फाईलेरिया निरीक्षक गणेश महासेठ सहित अन्य पदाधिकारी उपस्थित थे।

 

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