मृत 30 मैथिल मजदूरों के न्याय के लिए जंतर-मंतर पर सामूहिक अनशन

अखिल भारतीय मिथिला राज्य संघर्ष समिति के तत्वावधान में दिल्ली की दुर्घटना में मारे गए 30 मैथिल मजदूरों के न्याय के लिए जंतर-मंतर पर सामूहिक अनशन किया गया। समिति के राष्ट्रीय प्रवक्ता इंजीनियर शिशिर कुमार झा के संचालन में आयोजित कार्यक्रम की अध्यक्षता राजेंद्र शर्मा ने की।
इस मौके पर संघर्ष समिति के अंतरराष्ट्रीय संयोजक प्रो अमरेंद्र झा ने दिल्ली व बिहार सरकार सहित दिल्ली नगर निगम से प्रत्येक मृतकों को दस-दस लाख रूपया मुआवजा और परिवार के एक सदस्य को नौकरी दिए जाने की मांग की। वहीं, इंजीनियर शिशिर कुमार झा ने मिथिला से पलायन के लिए बिहार सरकार एवं केंद्र सरकार की नीतियों को दोषी ठहराया। समाजसेवी आर एन झा ने अपने संबोधन में कहा कि बिहार सरकार विभिन्न योजनाओं में सरकारी खजाना को लूटाकर भ्रष्टाचार को बढ़ावा दे रही है, जबकि रोजगार सृजन शून्य है। अध्यक्षीय संबोधन में राजेंद्र शर्मा ने विचार व्यक्त किया कि गरीबी एवं बेरोजगारी मिथिला वासियों के लिए अभिशाप बनता जा रहा है। इसका त्वरित निदान आवश्यक है। अनशन में शामिल दिल्ली व एनसीआर के विभिन्न संगठनों से जुड़े लोगों ने मिथिला के सर्वांगीण विकास के लिए पृथक मिथिला राज्य के गठन को जरूरी बताया।
अनशन में भाग लेने वाले प्रमुख लोगों में पूर्व मुख्यमंत्री हरीश रावत, झंझारपुर के सांसद रामप्रीत मंडल, पूर्व सांसद कीर्ति झा आजाद, भाजपा नेता गोपाल झा, उपाध्यक्ष हीरालाल प्रधान, तपन झा, संजय झा, विजय आजाद, विमल जी, कवि एकांत, नंदन झा, महेश धानुक, मदन झा, जैद खान, जितेंद्र पाठक, चंदेश्वर, रामजतन, मजीद आलम, संजीव कुमार झा आदि शामिल थे।
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