कांवरियों ने गंगाजल से किया बाबा सिद्धेश्वरनाथ का जलाभिषेक

मनीगाछी प्रखंड के टटुआर पंचायत अंतर्गत विशौल गांव स्थित प्राचीन बाबा सिद्धेश्वरनाथ महादेव मंदिर में सिमरिया से पैदल एवं वाहन से गंगाजल लाकर सैकड़ों कमरथुओं ने शनिवार को जलाभिषेक किया। मंदिर में जलाभिषेक करने वाले भक्तों की कतार देर शाम तक लगी रही।
प्रातः काल गांव के मध्य विद्यालय के समीप स्थित तालाब से भव्य कलश यात्रा की शक्ल में जल लाकर 108 कुंवारी कन्याओं ने बाबा सिद्धेश्वरनाथ पर अर्पित किया। मंदिर प्रबंधन समिति के सदस्यों ने रंग-बिरंगी झांकियों एवं ढोल-नगाड़े के साथ पैदल कांवर यात्रियों का गांव की सीमा पर अगवानी की और हर हर महादेव के जयघोष के साथ मंदिर के प्रांगण में पहुंचे।
मंदिर प्रबंधन कमेटी के अध्यक्ष सह टटुआर पंचायत के पूर्व मुखिया प्रो जीवकांत मिश्र ने बताया कि परंपरा के अनुसार महाशिवरात्रि के अवसर पर रात्रि में चारों पहर शिव विवाह की पूजन रस्म की अदायगी की जाएगी। साथ ही महाशिवरात्रि महोत्सव के दौरान श्रीराम कथा वाचन की रसधार 22 फरवरी तक निरंतर बहेगी।
उधर, श्रीराम कथा वाचन यज्ञ के चौथे दिन महाशिवरात्रि के अवसर पर कथावाचक आचार्य नटवर नारायण ने भक्तों को भगवान शिव और श्रीराम के बीच के परस्पर संबंध को विस्तार से बताया। उन्होंने कहा कि भगवान राम की पूजा के बिना शिव की पूजा अधूरी रहती है और बिना शिव पूजा के भगवान राम की पूजा अधूरी है। रामेश्वरम में शिवलिंग पर जल चढाने से मनुष्य शिव का प्रिय भक्त हो जाता है। क्योंकि श्रीराम की पूजा भगवान शिव को अत्यधिक प्रसन्न करती है। वहीं ऐसा करने से भगवान भोलेनाथ खुश होकर भक्त को मनचाहा वरदान प्रदान करते हैं। उन्होंने कहा कि वास्तव में भगवान शिव श्री राम के इष्ट हैं और श्रीराम भगवान शिव के। तभी तो सभी ज्योतिर्लिंगों में से एक रामेश्वरम की स्थापना स्वयं भगवान राम ने अपने हाथों से की है और रामेश्वरम तीर्थ की व्याख्याएं भगवान शिव और श्रीविष्णु के मुख से भिन्न-भिन्न रूप से इस प्रकार से कथित हैं…! शिवजी कहते हैं: “रामेश्वर तु राम यस्य ईश्वरः” अर्थात राम जिसके ईश्वर हैं। वहीं भगवान विष्णु, जिनके अवतार भगवान श्रीराम हैं, वे कहते हैं: “रामेश्वर तु रामस्य यः ईश्वरः” अर्थात जो राम के ईश्वर हैं।
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