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एफवाईयूपी (FYUP) को बिहार में लागू करने के खिलाफ राज्यपाल का पुतला दहन। आईसा

एफवाईयूपी (FYUP) को बिहार में लागू करने के खिलाफ राज्यपाल का पुतला दहन।

चार सालाना डिग्री कोर्स ( FYUP) आम छात्र छात्राओं को उच्च शिक्षा से बेदलहलीअभियान – प्रसेनजीत।

भाजपा-आरएसएस के एजेंडे को बिहार के अंदर में लागू करा रहे है राज्यपाल,बिहार सरकार का हस्तक्षेप जरूरी – आइसा

दरभंगा

नई शिक्षा नीति को खारिज करने,बिहार में एफवाईयूपी को लागू करने के खिलाफ, इसपर बिहार सरकार की चुप्पी तोड़ने सहित अन्य मांगों को लेकर आइसा के राज्यव्यापी आवाहन पर बिहार के राज्यपाल और केंद्रीय शिक्षा मंत्री धर्मेद्र प्रधान का पुतला दहन किया गया।

पुतला दहन से पहले विवि केंद्रीय पुस्तकालय से जुलुश निकाल कर विवि कैम्प्स होते हुए विवि मुख्य द्वार तक मार्च किया गया। मार्च का समापन पुतला दहन से किया गया।

आइसा के राष्ट्रीय कार्यकारणी सदस्य संदीप कुमार की अध्यक्षता में आयोजित सभा को सबोधित करते हुए आइसा के कार्यकारी महासचिव प्रसेनजीत ने कहा कि जब से केंद्र में मोदी सरकार आई है लगातार शिक्षा- रोजगार पर हमला जारी है। शिक्षा का निजीकरण कर कॉरपोरेट घरानों के हाथों गिरवी रख देना चाहती हैं। देश के अंदर नई शिक्षा नीति 2020 लाकर पुनः एक बार दलित -गरीबो को शिक्षा से वंचित करने की साजिश रची जा रही है।
इसके खिलाफ आइसा लगातार विरोध करती रही है। बिहार में आनन फानन में FYUP लागू कर दिया गया जबकि बिहार के विश्विद्यालयों में सत्र नियमित नहीं होने की वजह से सालों देर डिग्री मिलती हैं, स्नातक का एक साल और बढ़ा कर देने से छात्र अपना स्नातक करने से भी वंचित रह जायेंगे। इस से फीस वृद्धि होगा मुख्य विषय के पेपर को हटा कर स्किल डेवलपमेंट कोर्स, मूर्ति पूजा, आयुर्वेद, योग इत्यादि पढ़ाने की व्यवस्था से छात्र अपने मुख्य ऑनर्स पेपर की गहराई से ज्ञान अर्जित नहीं कर पाएंगे। उन्होंने कहा कि बिहार के राज्यपाल FYUP को लागू होने से अविलंब रोक लगाए अन्यथा बड़ा छात्र आंदोलन शुरू किया जाएगा।

आगे प्रसेनजीत ने बताया कि FYUP में मल्टीपल एंट्री (प्रवेश) और एग्जिट (निकाश) की बात करता है। जिसका मतलब हुआ कि एक ऑनर्स डिग्री का फिक्स क्रेडिट सांख्य तय कर दिया जायेगा और उसको कई विश्विद्यालयों में प्रवेश कर या निकल कर दुसरे विश्विद्यालय से इकट्ठा कर सकते हैं। जैसे कि बीए प्रथम वर्ष अगर पटना युनिवर्सिटी से कर लिया है तो दूसरा वर्ष मिथिला युनिवर्सिटी या किसी और युनिवर्सिटी से कर सकते है। अलग अलग सेमेस्टर में अलग अलग विश्विद्यालय में प्रवेश कर कुछ कोर्स पढ़ कर क्रेडिट इकट्ठा कर सकते हैं फिर निकल कर कहीं और से कुछ सेमेस्टर/कोर्स पढ़ कर कुछ और क्रेडिट इकट्ठा कर सकते हैं। लेकिन यह व्यवस्था बिहार के विश्विद्यालयों की जर्जर हालत में बिल्कुल आंखों में धूल झोंकने की तरह हैं।

वही आइसा जिला सचिन मयंक कुमार ने कहा कि बिहार के राज्यपाल बिहार के उच्च शिक्षा को सुधारा करने के नाम पर उच्च शिक्षा को बर्बाद करने की ओर तुली हुई है। आरएसएस के एजेंडे को पूरा बिहार में लागू कर रहे है लेकिन बिहार सरकार इस पूरे मुद्दे पर चुप्पी साधी हुई हैं।
मयंक ने आगे कहा कि जहाँ एक तरफ पुरे बिहार के विवि में शिक्षक-कर्मचारी की घोर आभाव है। शिक्षक-कर्मचारी की नियुक्ति की सवाल पूरे बिहार में कही नही हो रही है। बिहार के विवि का शेषण लेट है। उन्होंने बिहार सरकार से मांग किया कि बिहार के अंदर एफवाईयूपी कार्यक्रम को लागू करने से रोका जाए।

वही आइसा जिला अध्यक्ष प्रिंस राज ने कहा कि सरकारें नई शिक्षा नीति एवं FYUP में स्किल डेवलपमेंट कोर्स को पढ़ा कर कॉर्पोरेट्स के लिए सस्ता मजदूर पैदा करना चाहती है। शोधपरक शिक्षा या उच्च शिक्षा से वंचित कर देना चाहती हैं। ज्ञान विज्ञान का विकश या उसमें खर्च करना मोदी सरकार को फिजूल की वस्तु लगती हैं। शिक्षा का मतलब बस कुछ स्किल सिखा कर मजदुर पैदा कर देना चाहती है। जिसका सबसे ज्यादा प्रभाव वंचित – गरीबों पर पड़ेगा। उन्होंने बिहार से एफवाईयूपी तत्काल वापस लेने की मांग की है।

इस अवसर पर सुभाष कुमार, किशुन कुमार,मिथिलेश कुमार यादव,संतोष रजक, रोहित कुमार, मोहम्मद हम्माद, रूपक कुमार, कृष्णा कुमार सहित दर्जनों लोग मौजूद थे।

प्रिंस राज – जिला अध्यक्ष, आइसा

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