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भूकंपरोधी एवं पर्यावरण के अनुकूल घरों की बढ़ती जरूरत:डा सुनील कुमार चौधरी AJIT KUMAR SINGH KI REPORT

भूकंपरोधी एवं पर्यावरण के अनुकूल घरों की बढ़ती जरूरत:डा सुनील

जापान समेत दुनिया में पिछले कई दशक से भूकंपों का जिस तरह से सिलसिला चल रहा है उस परिप्रेक्ष्‍य में जरूरी हो जाता है कि भूकंप पट्‌टी में भूकंपरोधी घर बनाए जाना जरूरी है। क्‍योंकि जापान में आने वाले भूकंप और सुनामी के बावजूद वहां इंसानी तबाही उतनी नहीं होती है जितनी 2004 में आई सुनामी से भारत में हुई थी हमारे यहां 3 लाख लोग इस सुनामी की भेंट चढ़ गए थे। हमने टीवी स्‍क्रीन पर देखा कि जापान में 8.9 तीव्रता से आए भूकंप के प्रभाव से घर व बहुमंजिला इमारतें हिल तो खूब रही हैं लेकिन जमींदोज नहीं हो रहीं। ऐसा संभव भूकंपरोधी घर बनाए जाने से हुआ। इस दृष्‍टि से दुनिया को जापान से सबक लेने की जरूरत है।

 

प्राचीन काल में हमारी वास्‍तु कला काफी उन्‍नत थी। उन दिनों प्राकृतिक स्रोतों का कुशलतापूर्वक उपयोग कर टिकाऊ और सुविधायुक्‍त भवन बनाए जाते थे। हर निर्माण सामग्री की गुणवत्ता का सूक्ष्‍म अध्‍ययन किए जाने के बाद ही उनका उपयोग होता था। परिणामतः बड़ी इमारतें भी दीर्घायु होती थीं। कई सौ साल पुराने भवन और किले आज भी मौजूद हैं। जो हमारी प्राचीन वास्‍तुकला की श्रेष्‍ठता का प्रतीक है। समय के साथ हम प्रकृति से दूर भागते गए और साथ-साथ हमारे भवनों की औसत आयु भी क्षीण होती गई। तब मकान बनाने में मिट्‌टी, बांस, लकड़ी और ईंट का उपयोग होता था अब यह पूरी तरह सीमेंट, कांक्रीट और लोहे पर आधारित हो गया है। ये घर भूकंप की दृष्‍टि से खतरनाक हैं।

विद्युत ऊर्जा के उत्‍पादन से काफी प्रदूषण फैलता है। वायुमण्‍डल में कार्बनडाय

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