जिलाधिकारी ने हरी झंडी दिखाकर किया पोषण जागरूकता रथ को किया रवाना
• पोषण
के पांच मंत्रों से दूर होगा कुपोषण
• ऑडियो के माध्यम से लोगों में फैलायी जायेगी जागरूकता
16 सितंबर/दरभंगा. राष्ट्रीय पोषण माह के अवसर पर जिलाधिकारी ने आज समाहरणालय परिसर से राष्ट्रीय पोषण अभियान के तहत राष्ट्रीय पोषण रथ को हरी झंडी दिखाकर क्षेत्र में रवाना किया। इस अवसर पर उन्होंने कहा कि बच्चों को कुपोषण मुक्त बनाने के लिए यह अभियान चलाया जा रहा है। उन्होंने कहा कि कुपोषण दूर करने हेतु विशेष रूप से विभाग द्वारा निर्धारित पोषण के पांच सूत्रों को विशेष रूप से जन जन तक पहुंचाने का तथा अति कुपोषित बच्चों की पहचान कर एन.आर.सी में भेजने का निर्देश दिया। उन्होंने कहा कि आंगनबाड़ी केंद्र के सभी सेविका टेक होम राशन(टीएचआर) का वितरण ससमय करें।
इस अवसर पर उपस्थित जिला प्रोग्राम पदाधिकारी, समेकित बाल विकास सेवाएं श्रीमती अलका आम्रपाली ने बताया इस पोषण माह का दो विषय है; पहला है अति कुपोषित बच्चों के पहचान और दूसरा, घर-घर क्यारी-पोषण थाली, जिसके अंतर्गत सभी लोग अपने घर के आस-पास की उपलब्ध जमीन पर दैनिक उपयोग की सब्जियां और फल लगाएं ताकि परिवार में बच्चों और महिलाओं के साथ अन्य सदस्यों को भी पौष्टिक आहार प्राप्त हो सके। साथ ही उन्होंने बताया कुपोषण मुक्त भारत बनाने के लिए पोषण अभियान के तहत महिला एवं बाल विकास मंत्रालय, भारत सरकार द्वारा 5 सूत्र बताए गए हैं।
पहला है पहले सुनहरे 1000 दिन : पहले सुनहरे 1000 दिनों में तेजी से बच्चे का शारीरिक एवं मानसिक विकास होता है। जिसमें गर्भावस्था की अवधि से लेकर बच्चे के जन्म से 2 साल तक की उम्र तक की अवधि शामिल है। इस दौरान बेहतर स्वास्थ्य, पर्याप्त पोषण, प्यार भरा एवं तनाव मुक्त माहौल तथा सही देखभाल बच्चों के पूर्ण विकास में सहयोगी होता है।
दूसरा है पौष्टिक आहार : शिशु जन्म के एक घंटे के भीतर माँ का पीला गाढ़ा दूध बच्चे की रोग प्रतिरोधक क्षमता को बढ़ाता है। अगले 6 माह तक केवल मां का दूध बच्चे को कई गंभीर रोगों से सुरक्षित रखता है। उसके बाद बच्चे का शारीरिक एवं मानसिक विकास काफी तेजी से होता है। इस दौरान स्तनपान के साथ ऊपरी आहार की जरूरत होती है। घर का बना अर्द्ध ठोस भोजन ऊपरी आहार की शुरुआत के लिए जरूरी होता है।
तीसरा है एनीमिया प्रबंधन : गर्भवती माता, किशोरिया एवं बच्चों में एनीमिया की रोकथाम जरूरी है। गर्भवती महिला को 180 दिन तक आयरन की एक लाल गोली जरूर खानी चाहिए। 10 वर्ष से 19 साल की किशोरियों को सप्ताह में सरकार द्वारा दी जाने वाली आयरन की एक नीली गोली का सेवन करना चाहिए। 6 माह से 59 माह के बच्चों को सप्ताह में दो बार एक मिलीलीटर आयरन सिरप देनी चाहिए।
चौथा है डायरिया प्रबंधन : शिशुओं में डायरिया शिशु मृत्यु का कारण भी बन सकता है। छह माह तक के बच्चों के लिए केवल स्तनपान ऊपर से कुछ भी नहीं डायरिया से बचाव करता है। साफ-सफाई एवं स्वच्छ भोजन डायरिया से बचाव करता है। डायरिया होने पर लगातार ओआरएस का घोल एवं 14 दिन तक जिंक देना चाहिए।
पाँचवाँ है, स्वच्छता एवं साफ-सफाई : साफ पानी एवं ताजा भोजन संक्रामक रोगों से बचाव करता है। शौच जाने से पहले एवं बाद में तथा खाना खाने से पूर्व एवं बाद में साबुन से हाथ धोना चाहिए घर में तथा घर के आसपास सफाई रखनी चाहिए। इससे कई रोगों से बचा जा सकता है।
Darbhanga News24 – दरभंगा न्यूज24 Online News Portal