सीएम साइंस कॉलेज में मशरूम कल्टीवेशन पाठ्यक्रम की कक्षा शुरू
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साइंस कॉलेज में मशरूम कल्टीवेशन पाठ्यक्रम की कक्षा का सोमवार को शुभारंभ किया गया। कोरोना महामारी के सुरक्षा मानकों का पालन करते हुए आयोजित इंडक्शन क्लास में मिथिला विश्वविद्यालय के छात्र कल्याण अध्यक्ष डॉ अशोक कुमार झा ने मशरूम कल्टीवेशन पाठ्यक्रम को स्वरोजगार का बेहतर जरिया बताते हुए छात्रों को समय की उपयोगिता पर प्रकाश डाला। उन्होंने कहा कि छात्र जीवन में समय का काफी महत्व है। समय का सदुपयोग करने वाला छात्र जीवन में एक सफल नागरिक बनता है। इसके विपरीत जो छात्र समय को बातों में या इधर -उधर घूमने फिरने में व्यर्थ करता है, वह अंत में रोता और पछताता है, क्योंकि तब चाहकर भी बीता समय उसके पास नहीं लौटता।
मौके पर उपस्थित सीएम साइंस कॉलेज के वनस्पति विभाग के पूर्व अध्यक्ष एवं विश्वविद्यालय के पूर्व कुलानुशासक डाॅ तारा नन्द झा ने इस पाठ्यक्रम को आजीविका में मददगार बचाते हुए मशरूम की उपयोगिता एवं गुणवत्ता के बारे में विस्तार से बताया। उन्होंने कहा कि स्वाद, सुगंध और उच्च गुणवत्ता के साथ-साथ पोष्टिक रूप से मशरूम उत्कृष्ट भोजन है। इसमें प्रोटीन और फास्फोरस का उच्च स्तर होने के साथ ही, सोडियम और पोटेशियम जैसे खनिज, विटामिन बी, विटामिन सी, विटामिन के, कार्बोहाइड्रेट व अमीनो एसिड आदि की प्रचूर मात्रा में उपलब्धता न सिर्फ अनेक बीमारियों में कारगर है, बल्कि हृदय रोग, मधुमेह एवं उच्च रक्तचाप जैसी बीमारियों के लिए एक वरदान के समान है।
कार्यक्रम की अध्यक्षता करते हुए प्रधानाचार्य डॉ प्रेम कुमार प्रसाद ने पारंपरिक एवं गैर पारंपरिक पाठ्यक्रमों के स्वरूप के मूलभूत अंतर की चर्चा करते हुए कौशल विकास के आधार पर चलाए जा रहे ‘शार्ट-टर्म कोर्स’ को समय के अनुकूल बताते हुए इसमें प्रशिक्षण के महत्व को विशेष रुप से रेखांकित किया। अपने संबोधन में उन्होंने मशरूम की खेती में मौसम एवं तापमान के महत्व को उजागर करते हुए कहा कि सामान्य रूप से चार तरह का मशरूम अलग-अलग मौसम में उगाया जाता है। ठंडे मौसम में जब तापमान 18 से 25 डिग्री तक हो तो सफेद बटन मशरूम का उत्पादन किया जाता है। 20 से 28 डिग्री तापमान में धींगरी मशरूम उगाते हैं। गर्मी के मौसम में जब तापमान 30 से 40 डिग्री के बीच रहता है तब मिल्की मशरूम की खेती होती है। 45 डिग्री तापमान तक धान के पुआल का मशरूम उगाया जा सकता है। इस तरह सालभर मशरूम की खेती की जा सकती है। उन्होंने कहा कि धींगरी मशरूम में प्लूरोटन नामक एक रसायन होता है, जो कैंसर रोधी माना जाता है। इसको औषधीय मशरूम भी कह सकते हैं।
पाठ्यक्रम संयोजक डाॅ दिलीप कुमार झा के संचालन में आयोजित इंडक्शन क्लास में धन्यवाद ज्ञापन वनस्पति विभाग के शिक्षक डाॅ खालिद अनवर ने किया। कार्यक्रम के आयोजन में प्रधान सहायक कृष्ण कुमार चौधरी एवं आईक्यूएसी सहायक प्रवीण कुमार झा की उल्लेखनीय भूमिका रही।
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