अंतर्राष्ट्रीय कवि शंभू शिखर ने समां बांधा
——————-
दूसरे

दिन के कार्यक्रम के दूसरे सत्र में भव्य कवि सम्मेलन का आयोजन किया गया। मैथिली साहित्य जगत के प्रसिद्ध कवि डॉ जयप्रकाश चौधरी जनक की अध्यक्षता हरिश्चंद्र हरित के संयोजन एवं मणिकांत झा के संचालन में आयोजित भव्य कवि सम्मेलन में मिथिला एवं ब्रजभूमि के कवियों ने अपनी कविताओं के माध्यम से मिथिला एवं ब्रजभूमि के पुरातन संबंधों को विशेष रूप से उजागर करते हुए अनेक वर्तमान संदर्भों को अपनी रचना का विषय बनाया। वहीं, अंतरराष्ट्रीय स्तर पर अपनी प्रतिभा का परचम लहराने वाले मिथिला के लाल शंभू शिखर ने अपनी मैथिली रचना ‘कन्हा पर हम हर उठाने पक्का ठेठ किसानी छी, मोन में रखने काशी छी, हम सब मिथिला वासी छी…’ की प्रस्तुति के साथ समा बांध दिया। दर्शकों के अनुरोध पर उन्होंने अपनी चर्चित हिंदी कविता ‘हम धरती पुत्र बिहारी हैं…’ को भी गाकर सुनाया।
कवि सम्मेलन की खास बात यह रही कि देश के प्रधान सेवक को श्री राम जन्म भूमि पूजन कराने वाले प्रधान
आचार्य पंडित गंगाधर पाठक भी आज कवि के रूप में मंचस्थ हुए। उन्होंने स्वरचित मिथिला वर्णन की भावपूर्ण प्रस्तुति दी। कवि सम्मेलन में अपनी रचना प्रस्तुत करने वाले कवियों में डॉ महेंद्र नारायण राम, दिनेश झा, शारदानंद सिंह, नीलम झा, डॉ सुषमा झा, प्रेमशंकर झा, जगदीश शर्मा नीलम, अशोक अज्ञ, इंद्रकांत झा, राहुल कश्यप, डाॅ रामसेवक ठाकुर, प्रवीण कुमार झा, चंदन मिश्र, चंद्र प्रकाश वर्मा आदि के नाम उल्लेखनीय हैं।
सम्मेलन के तीसरे सत्र में रंगारंग सांस्कृतिक कार्यक्रम का आयोजन किया गया केदारनाथ कुमर के गाए गणेश वंदना ‘गौरी के ललना…’ के साथ शुरू हुए कार्यक्रम में डॉ सुषमा ने कवि कोकिल विद्यापति रचित गोसाउनि गीत ‘जय जय भैरवी …’ प्रस्तुत की। जबकि मिथिला एवं ब्रजभूमि के गायक कलाकारों दुखी राम रसिया ओमप्रकाश सिंह, नवल-नन्द आदि ने अपनी प्रस्तुतियों से मिथिला एवं बृजवासी को झूमने पर मजबूर कर दिया। डाॅ रामसेवक ठाकुर के संचालन में आयोजित कार्यक्रम में हीरा कुमार झा, रामबहादुर यादव एवं केशव ने विभिन्न वाद्य यंत्रों पर अपनी संगति दी।
Darbhanga News24 – दरभंगा न्यूज24 Online News Portal