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प्रलयंकारी बाढ़ के बाद बंद पड़े सहरसा- फारबिसगंज रेलखंड में आमान परिवर्तन का कार्य अब तेज रफ्तार में शुरू होने से लोगों में खुशी सुपौल। सोनू कुमार भगत की रिपोर्ट

प्रलयंकारी बाढ़ के बाद बंद पड़े सहरसा- फारबिसगंज रेलखंड में आमान परिवर्तन का कार्य अब तेज रफ्तार में शुरू होने से लोगों में खुशी
सुपौल।सोनू कुमार भगत की रिपोर्ट
2008 में आई कोसी नदी में प्रलयंकारी बाढ़ के बाद बंद पड़े सहरसा- फारबिसगंज रेलखंड में आमान परिवर्तन का कार्य अब रफ्तार पकड़ चुका है। कुछ महीने पूर्व में ही सहरसा से लेकर राघोपुर तक का ट्रेन का और परिचालक शुरू हो गया है। राघोपुर से फारबिसगंज तक आमान परिवर्तन का कार्य तेज गति से हो रहा है।
इस रेलखंड के बीचों बीच पड़ने वाले ललितग्राम रेलवे स्टेशन में भी ट्रैक बिछाने और प्लेटफार्म बनाने का काम अब तेज रफ्तार से हो रहा है। रेलवे के काम की गति को देखकर लोगों में अब आस जग गई है कि अब वे लोग ट्रेन की सीटी सुन पाएंगे।
स्थानीय दिनेश गुप्ता ,अफताब आलम, अफाक आलम, शशि भूषण सिंह ,अखिलेश झा, योगानंद कामत, शैलेंद्र कामत, ब्रह्मानंद कामत ,अशोक कुमार झा ,मिथिलेश कुमार झा एवं आदि का कहना है कि लगभग 12 वर्षों से ट्रेन आवागमन बंद है। जिससे यहां के लोगों को आवागमन में काफी कठिनाइयों का सामना करना पड़ता है। जब ट्रेन सेवा बहाल थी तो आसपास के लगभग हजारों लोगों को रोजगार मिल रहा था परंतु जब से ट्रेन सेवा बंद हुई है यहां के लोगों के बीच समस्या उत्पन्न न हो गई। लोगों का कहना है कि रेलवे ने पहले आमान परिवर्तन के कार्य में सुस्ती दिखाई अगर तेज गति से काम होता तो ट्रेन सेवा शुरू हो गई होती।
ललित ग्राम में आज कर रहे रेलवे के संवेदक आशुतोष पांडे ने बताया कि चरणबद्ध तरीके से काम किया जा रहा है। राघोपुर तक ट्रेन सेवा बहाल कर दी गई है। मार्च तक ललितग्राम स्टेशन तक ट्रेन चलाने का योजना पर कार्य किया जा रहा है। इसको लेकर अभी ट्रैक बिछाने और प्लेटफार्म बनाने का जोरों शोरों से किया जा रहा है।

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