एम एल एस एम कॉलेज दरभंगा के संस्कृत विभाग और आइक्यूएसी के तत्वावधान में श्रीमद्भागवतगीताया: प्रासंगिकता विषय पर संगोष्ठी का आयोजन किया गया इसकी अध्यक्षता प्रधानाचार्य प्रोफेसर विद्यानाथ झा ने की।
संगोष्ठी

के मुख्य वक्ता के रूप में डॉक्टर जयशंकर झा ने कहा कि गीता मे जीवन के शाश्वत संदेश निहित हैं। इन संदेशों को जानने और समझने के लिए अनेक पश्चात विद्वानों ने अंग्रेजी सीखी। महात्मा गांधी ने भी सत्य और अहिंसा का मंत्र गीता के 16 वे अध्याय के तीसरे श्लोक से लिया था गीता में 32 देवी गुणों की चर्चा है । इसे दैवी संपदा कहा गया है इन 32 गुणों में सत्य और अहिंसा को मध्य में स्थान दिया गया है ।डॉक्टर झा ने कहा कि गीता आत्मा की अमरता को प्रतिपादित कर वस्तुतः निर्भयता का संदेश देती है। कामेश्वर सिंह दरभंगा संस्कृत विश्वविद्यालय के दर्शन विभाग के पूर्व अध्यक्ष डॉ बौआनंद झा ने कहा कि गीता उपनिषद है। इसमें धर्म और अध्यात्म के मूढ़ तत्वों की व्याख्या की गई है। ललित नारायण मिथिला विश्वविद्यालय के विश्वविद्यालय संस्कृत विभागाध्यक्ष प्रोफेसर जीवानंद झा ने गीता को भारतवर्ष के पवित्र धरोहर बताया और कहा कि युद्ध भूमि में ज्ञान का ऐसा गंभीर उपदेश दिए जाने का दूसरा उदाहरण विश्व इतिहास में नहीं मिलता। उन्होंने कहा कि गीता ज्ञान और कर्म के समन्वय का संदेश देती है। इस संदेश को भुला दिए जाने के कारण है जीवन में जटिलताएं और विषमताएं बढ़ती जा रही है। पूर्व विश्वविद्यालय एवं संस्कृत विभागाध्यक्ष प्रोफेसर रामनाथ सिंह ने कहा कि गीता अपने आप में जीवन दर्शन है ।गीता कि दिखाई गई राह पर चलकर ही भारत को आत्मनिर्भर और विश्वगुरु पर बनाया जा सकता है ।डॉक्टर चंद्र भूषण त्रिवेदी ने कहा कि गीता हमारे जीवन की आधारभूमि है । प्रोफेसर प्रेम मोहन मिश्र ने कहा कि कुरुक्षेत्र में
किंकर्तव्यविमूढ़ बना अर्जुन तो भटका हुआ था, उस के माध्यम से श्री कृष्ण ने पूरी मानव जाति के लिए सही जीवन जीने का संदेश दिया है उन्होंने कहा कि गीता में विज्ञान के सूत्र भरे पड़े हैं। अध्यक्षीय उद्बोधन में प्रधानाचार्य जी प्रोफेसर विद्यानाथ झा ने बताया कि गीता में निहित अनेक सूत्र वनस्पति विज्ञान में नए-नए और समस्त अनुसंधान के द्वार खोल रहे हैं ।कार्यक्रम का आरंभ मंगलाचरण से हुआ स्वागत भाषण संस्कृत विभागाध्यक्ष डॉ विनय कुमार झा ने किया संगोष्ठी का विषय प्रवर्तन और संचालन डॉक्टर सतीश कुमार सिंह ने किया और धन्यवाद ज्ञापन आइक्यूएसी के समन्वयक डॉ विनोद कुमार मिश्र ने किया।
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