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गणितीय शोध कार्य जनोपयोगी हो: प्रोफेसर एन के अग्रवाल

गणितीय शोध कार्य जनोपयोगी हो: प्रोफेसर एन के अग्रवाल

विश्व मे सेमिनार आयोजित किये जाते हैं जिसका उद्देश्य समाज को लाभ पहुंचाने वाला होता है। स्तरीय शोध जो लोकोपयोगी हो, वैसा शोध किया जाना चाहिए। एप्लाइड मैथमेटिक्स का उपयोग समाज के हर क्षेत्र के लिए उपयोगी हो सकता है। जरूरत है ऐसे जरूरत को चिन्हित कर शोध किये जाय। उक्त बातें स्नातकोत्तर गणित विभाग द्वारा आयोजित दो दिवसीय राष्ट्रीय सेमिनार के समापन के मौके पर कही। आज 23 जनवरी 2021 को सेमिनार का दूसरा दिन है। सेमिनार का टॉपिक रीसेंट डेवलपमेंट एंड एप्पलीकेशन ऑफ मैथेमेटिक्स था। इस कार्यक्रम में लगभग 350 लोग जुड़े हुए थे। इस कार्यक्रम का ऑनलाइन लाइव प्रसारण भी किया गया। फेसबुक से काफी लोग जुड़े हुए थे। हिंदुस्तान के विभिन्न हिस्सों से लोग जुड़े हुए थे। आज के कार्यक्रम में रिसोर्स पर्सन के रूप में भी विशेषज्ञ शामिल रहे हैं। संजय कुमार महतो, सहायक प्रोफेसर , आर एन ए आर कॉलेज, समस्तीपुर ने अपना शोध पत्र प्रस्तुत किया। सी एम कॉलेज, दरभंगा के असिस्टेंट प्रोफेसर डॉ अभय कुमार सिंह ने फ़ज़्ज़ी थ्योरी एंड इट्स ऍप्लिकेशन्स के बारे में अपना शोध पत्र प्रस्तुत किया। इनके अलावे कई शोधार्थी ने अपना अपना शोध पत्र प्रस्तुत किया। रांची विश्वविद्यालय, राँची के सेवानिवृत्त प्रोफेसर मिथिलेश कुमार सिंह और प्रोफेसर एन के अग्रवाल ने भी अपने अपने विचार व्यक्त किए। मिथिलेस बाबू ने छात्रों को होनेवाली समस्या एवं गणितीय विधि से उसके समाधान के उपाय बताया। शोधकार्य मैथेमेटिकल मॉडलिंग पर हो, के बारे मे बताया।प्रोफेसर एन के अग्रवाल ने मिथिला विश्वविद्यालय के द्वारा किए गए सेमिनार के कार्यो की प्रसंसा की। शोध कार्य के लिये अपना महत्वपूर्ण सुझाव दिए। विभाग के शिक्षक प्रोफेसर जे एल चौधरी, विपुल स्नेही, कार्यक्रम के संयोजक डॉ अभिमन्यु ने भी अपने अपने विचार प्रस्तुत किये। अंत में विभाग के विभागाध्यक्ष प्रोफेसर एन के अग्रवाल ने धन्यवाद देते हुए कार्यक्रम के समाप्ति की धोषणा की।

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