बच्चे होते है सड़क सुरक्षा दूत-डा सुनील
बच्चों तुम तकदीर हो कल के हिंदुस्तान की ,
बापू के वलिदान की, नेहरु के अरमान की ।
आज के टूटे खँडहरों पर तुम कल का देश बसाओगे,
सड़क सुरक्षा का संदेश घर घर तक पहुंचाओगे,
तुम नन्हीं बुनियादें हो भारत के नए विधान की,
बापू के वलिदान की, नेहरु के अरमान की।|

बच्चे ही हमारे देश का भविष्य हैं । इसी विश्वास के साथ आपदा रोधी एवं पर्यावरण के अनुकूल समाज निर्माण को कृतसंकल्पित मधुबनी जिला के खिरहर गाँव निवासी,पथ निर्माण विभाग , बिहार के कार्यपालक अभियंता एवं बिहार अभियन्त्रण सेवा संघ के महासचिव डा सुनील कुमार चौधरी द्वारा जिले के विभिन्न हिस्सों मे सड़क पर ‘हर किसी की सुरक्षा’ के दृष्टिकोण को आगे बढ़ाते हुए स्कूली बच्चों को सड़क सुरक्षा की आदतों पर जागरुक बनाने का प्रयास किया गया। उन्होने बताया कि आखिरकार, सड़क सुरक्षा पर जागरुक बच्चा न केवल सुरक्षा के साथ सड़क का उपयोग करता है बल्कि सही मायनों में समाज के लिए सुरक्षा दूत की भूमिका निभाता है और जीवनभर ज़िम्मेदार राइडर भी बना रहता है।
बच्चों को सड़क सुरक्षा का संदेश देने के लिए इस अभियान को 3 चरणों में बांटा गयाः
1. बच्चों के लिए सड़क सुरक्षा के सुझावः पहले चरण में बच्चों को कुछ महत्वपूर्ण सुझाव दिए गए जैसे सड़क पर सुरक्षा के साथ पैदल चलने के सुझाव (जेबरा क्राॅसिंग पर सड़क पार करना, पेवमेन्ट न होने पर यातायात की विपरीत दिशा में चलना), सुरक्षित रूप से साइकल चलाने के सुझाव (ब्रेक, बैल और टायर चैक, साइकल पर रिफलेक्टर आदि); सड़क सुरक्षा के संकेत और चिन्ह (अनिवार्य, चेतावनी और सूचनात्मक संकेत)। बच्चों को इस बात पर निर्देश दिए गए कि स्कूल बस में यात्रा के दौरान कैसे सुरक्षित रहें (चलती बस में खड़े न हों, ड्राइवर का ध्यान न भटकाएं)।
2. बच्चे कैसे अपने अभिभावकों और रिश्तेदारों को सड़क पर सुरक्षा अपनाने के लिए प्रेरित कर सकते हैं, इस विषय पर लर्निंग सत्रः दूसरे चरण में, सेफ्टी इंस्ट्रक्टर्स ने बच्चों को सड़क सुरक्षा के ऐसे तरीके बताएं, जो वे अपने अभिभावकों और रिश्तेदारों को बता सकें एवं स्वयं की सुरक्षा को भी सुनिश्चित कर सकें। इनमें शामिल थे- वाहन की जांच (घर से निकलने से पहले ब्रेक, टायर, ईंधन की जांच और वाहन में लाईट्स की जांच); राइडिंग गियर और सीट बेल्ट (उचित कपड़े पहनना, सीट बेल्ट और हेलमेट का महत्व); स्पीड की भूमिका (तेज़ स्पीड और कम स्पीड); और क्या करें और क्या न करें (कार में बैठते या बाहर निकलते समय, किन बातों का ध्यान रखें, सड़क पर उग्र व्यवहार न अपनाएं)।
3. शपथ समारोहः अंत में, बच्चों ने सड़क सुरक्षा के नियम अपनाने और इसे पालन करने के लिए आमजनों तक संदेश पहुंचाने हेतु समाज में सड़क सुरक्षा दूत बनने की शपथ ली।
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