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मिथिलाक्षर को दैनिक प्रयोग में लाएं नहीं तो, पुनः मृतप्राय हो जाएगी : मंत्री जीवेश कुमार

मिथिलाक्षर को दैनिक प्रयोग में लाएं नहीं तो, पुनः मृतप्राय हो जाएगी : मंत्री जीवेश कुमार
विद्यापति भवन में अभियान का आठवां सम्मान समारोह आयोजित

Edit By- ajit kumar singh

मिथिला और मिथिलाक्षर का अस्तित्व सदियों से रहता आया है। बीच के एक संक्षिप्त कालखंड में भले ही इसकी स्थिति थोड़ी निराशाजनक रही हो, लेकिन एक बार फिर से मिथिला के सर्वांगीण विकास के लिए मैथिली भाषा और धरोहर लिपि मिथिलाक्षर को लेकर आम मैथिल में चेतना जागृत हो गई है। यह निश्चित रूप से इसके सुखद भविष्य के लिए शुभ संकेत है। उक्त बातें रविवार को पटना के विद्यापति भवन में आयोजित मिथिलाक्षर साक्षरता अभियान का शुभारंभ करते हुए बिहार सरकार के श्रम संसाधन मंत्री जीवेश कुमार मिश्र ने कही।
उन्होंने कहा कि आज की तारीख में मैथिली भाषा न सिर्फ संविधान की आठवीं अनुसूची में शामिल हो चुकी है बल्कि नयी शिक्षा नीति के तहत प्रथमिक कक्षाओं से ही मैथिली माध्यम में अध्ययन और अध्यापन शुरू किए जाने की जोर-शोर से तैयारी की जा रही है । अपने संबोधन में उन्होंने मिथिला को मिथिलांचल नाम से संबोधित किए जाने पर गहरी आपत्ति जताते हुए मिथिलाक्षर लिपि को दैनिक उपयोग में लाने का सभी से अनुरोध किया। उन्होंने कहा कि यदि मिथिलाक्षर लिपि का प्रयोग दैनिक कार्यों में नहीं किया गया तो यह पुन: मृतप्राय हो जाएगी। उन्होंने कहा कि हालांकि मिथिलाक्षर की शत-प्रतिशत साक्षरता के प्रति इस अभियान से जुड़े अभियानी कृत संकल्प हैं लेकिन मिथिलाक्षर को चलन में लाना सभी मैथिली भाषियों की जिम्मेवारी है।
डॉ सुषमा झा द्वारा कवि कोकिल विद्यापति की कालजई रचना जय जय भैरवी के गायन के साथ कार्यक्रम की विधिवत शुरुआत हुई। चेतना समिति के अध्यक्ष इंजीनियर विवेकानंद झा की अध्यक्षता में आयोजित समारोह में अतिथियों का स्वागत मिथिलाक्षर साक्षरता अभियान के संस्थापक पंडित अजयनाथ झा शास्त्री ने किया। स्वागत भाषण में उन्होंने अभियान के उद्देश्यों एवं उपलब्धियों पर विस्तार से प्रकाश डालते हुए कहा कि कोरोना काल में चाहे लाख बुराईयां रही हो, लेकिन यह मिथिलाक्षर साक्षरता अभियान के लिए सुखद संयोग लेकर आया। उन्होंने कहा कि घर में रहने को मजबूर लोगों ने इस अवधि में खुले मन से मिथिलाक्षर साक्षरता अभियान से जुड़कर इस अभियान को गति प्रदान की है। अभियान की भावी गतिविधियों से संबंधित प्रस्ताव अभियान की वरिष्ठ संरक्षिका शोभा झा ने प्रस्तुत किया।
मौके पर साहित्य अकादमी के अनुवाद पुरस्कार से सम्मानित योगानंद झा ने कहा कि मिथिला की धरोहर लिपि मिथिलाक्षर की साक्षरता को बढ़ाने में युवाओं के साथ साथ बड़ी संख्या में महिलाओं का जुड़ना इसकी खासियत रही है। निश्चित रूप से यह इस बात का संकेतक है कि जानकी, भारती और गार्गी सरीखे विदुषियों की जन्मस्थली रही मिथिला की नारी शक्ति अपने नौनिहालों को अपनी मातृलिपि को सशक्त बनाने की दिशा में पूर्ण मनोयोग से प्रेरित कर रही है। अभियान के वरिष्ठ संरक्षक सह मीडिया संयोजक प्रवीण कुमार झा ने कहा कि सोशल मीडिया के विभिन्न प्लेटफार्म पर मिथिलाक्षर की पाठशाला सजाकर देश-विदेश के अब तक करीब तीन लाख लोगों को मिथिलाक्षर साक्षरता अभियान के माध्यम से मिथिलाक्षर में साक्षर बनाने का पं शास्त्री का कार्य मैथिली भाषा और लिपि के लिए ढोल पीटने वाले लोगों के लिए नजीर पेश कर रहा है। धर्मेंद्र कुमार झा ने कहा कि अभियान में प्रशिक्षित होने वालों में अधिकांश युवा हैं और यह अभियान सबसे अधिक युवाओं की जनसंख्या वाले भारत देश में एक युवा सोच की उपज है।
अध्यक्षीय संबोधन में चेतना समिति के अध्यक्ष विवेकानंद झा ने कहा कि धरोहर लिपि मिथिलाक्षर का पुनर्जागरण आह्लादित करने वाला है। उन्होंने कहा कि संविधान में शामिल अधिकतर भाषाओं को जहां अपनी स्वतंत्र लिपि नहीं है। ऐसे में हमारी धरोहर लिपि मिथिलाक्षर मैथिली को विशिष्टता प्रदान करती है। उन्होंने चेतना समिति के द्वारा मिथिलाक्षर लिपि की नियमित प्रशिक्षण की व्यवस्था के साथ-साथ इसकी व्यावहारिकता बढ़ाने के लिए अभियान चलाने की मौके पर घोषणा की।
मैथिली मंच के अंतरराष्ट्रीय उद्घोषक द्वय किसलय कृष्ण एवं राधे भाई के संयुक्त संचालन में आयोजित कार्यक्रम में मिथिलाक्षर प्रशिक्षित कुल 270 लोगों को मिथिलाक्षर प्रवीण सम्मान, 35 लोगों को संरक्षक सम्मान, तीन लोगों को निर्देशक सम्मान एवं 25 लोगों को मार्गदर्शक सम्मान उपाधि प्रदान की गई। मौके पर शंभूनाथ झा एवं उग्रनाथ झा को उत्कृष्ट मार्गदर्शक की उपाधि से सुशोभित किया गया। कुमार प्रमोद चंद्र, विपिन कुमार कर्ण, मृत्युंजय नाथ झा एवं अशोक कुमार झा के कुशल व्यवस्थापन में आयोजित समारोह में आकाशवाणी दरभंगा के दीपक कुमार झा एवं डॉ सुषमा झा की संगीतमय प्रस्तुतियों ने दर्शकों को मंत्रमुग्ध किया। कार्यक्रम में सुधीर कुमार झा, कृष्ण कांत झा, पंकज कुमार कर्ण, फिल्म निदेशक नरेश मंडल, चेतना समिति के सचिव उमेश मिश्र, विवेक चन्द्र मिश्र, नवलकिशोर झा, दीपक आनंद मलिलक, दयाराम प्रसाद,ब्रह्मानंद झा, दीपांकर झा, पारूल प्रिया अशोक कुमार झा आदि की उल्लेखनीय उपस्थिति रही।

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