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बीमारी को महामारी का रूप लेने से रोकेगा ‘आईएचआईपी’

बीमारी को महामारी का रूप लेने से रोकेगा ‘आईएचआईपी’

•आईएचआईपी से मरीजों का रिकॉर्ड रखेगा स्वास्थ्य विभाग
•1 अप्रैल से देशभर में शुरू होगी योजना
•क्षेत्र विशेष में रोगियों के मिलने पर होगी त्वथरित निरोधात्म क कार्यवाही
•496 एएनएम को दिया गया अनमोल टैब

मधुबनी देश में एक अप्रैल से इंटीग्रेटेड हेल्थ इंफॉर्मेशन प्लेटफार्म (आईएचआईपी) लांच हो रही है। इसके जरिए शहर या गांव में फैल रही बीमारियों के बारे में अब स्वास्थ्य विभाग, प्रदेश सरकार व केंद्रीय स्वास्थ्य विभाग को रोज डाटा भेजा जाएगा। स्वास्थ्य विभाग ने जिले के किसी भी गांव व शहर में बीमारियों का पता तत्काल लगाने के लिए इंटीग्रेटेड हेल्थ इंफॉर्मेशन प्लेटफॉर्म पोर्टल की शुरुआत की है। इस प्लेटफार्म पर सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्रों की आशा, एएनएम संबंधित इलाके में बढ़ने वाली बीमारियों का आंकड़ा सीधे पोर्टल पर अपलोड करेंगी। इसके जरिए प्रदेश व केंद्रीय स्वास्थ्य विभाग को उसके निवारण के लिए गंभीर कदम उठाने में सहूलियत होगी। मधुबनी सदर अस्पताल के सभागार कक्ष में इसको लेकर आशा एवं एएनएम का एक दिवसीय प्रशिक्षण किया गया। इसमें एएनएम को इंटीग्रेटेड हेल्थ इंफॉर्मेशन प्लैटफॉर्म पोर्टल पर बीमारियों का रिकॉर्ड अपलोड करने की जानकारी दी गई। आईडीएसपी एपिडेमियोलॉजिस्ट अनिल चक्रवर्ती ने बताया कि अबतक जिले के अलग-अलग इलाकों में बीमारियों के लक्षण की पुष्टि होने पर मैनुअल डाटा स्वास्थ्य विभाग को भेजा जा रहा था। बीमारियों का आंकड़ा जिला, प्रदेश सरकार व केंद्रीय हेल्थ विभाग तक पहुंचने में करीब एक महीने का वक्त लगता था। ऐसे में संबंधित इलाके में बीमारियों के प्रकोप को नियंत्रित करने के लिए स्वास्थ्य विभाग की ओर से गंभीर कदम उठाने में देर हो जाती थी। इसको ध्यान में रखते हुए देश भर में एक अप्रैल से इंटीग्रेटेड हेल्थ इंफॉर्मेशन प्लैटफॉर्म पोर्टल को शुरू किया जा रहा है। आशा, ए एन एम मरीजों में होने वाली बीमारियों की जानकारी पोर्टल पर अपलोड करेंगी। एएनएम घर-घर जाकर डाटा एकत्रित करेंगी। यह डाटा आईएचआईपी पर अपलोड किया जाएगा। जिले के सभी सरकारी अस्पताल इससे जुड़े होंगे। जैसे ही किसी व्यक्ति का कहीं इलाज होगा, उसका पूरा ब्योरा आईएचआईपी पर दिखने लगेगा।

तुरंत मिलेगी सूचना:
इस एप के जरिए आशा, एएनएम आदि को तुरंत ही मिलने वाले सभी मरीजों का डाटा ऑनलाइन फीड करना होगा। यही नहीं अगर गांव में किसी दूसरी बीमारी के मरीज भी मिलते हैं तो उनकी जानकारी भी इस एप पर तुरंत अपलोड करनी होगी। जितने लोग पीडि़त होंगे, उनकी संख्या एप पर उसी समय फीड करनी होगी। वहीं रियल टाइम लोकेशन भी फीड करनी होगी। मरीजों की संख्या फीड होते ही पीएचसी प्रभारी, सीएचसी प्रभारी, एसी एम ओ और अन्य अधिकारियों को इसका मैसेज पहुंच जाएगा। सीएचसी प्रभारी को उस पर तत्काल टीम बनाकर कार्रवाई करते हुए रिमार्क डालना होगा। इसकी जानकारी स्वास्थ विभाग के पास पहुंचेगी। इस एप को चलाने के लिए जिला स्तर पर ट्रेनिंग दे दी गई है।

तीन फॉर्म होंगे फीड:
इस एप में तीन प्रकार के फार्म हैं । एस, पी और एल। फॉर्म एस में बुखार, खांसी आदि बीमारी कब से है। इसके बारे में पूरी जानकारी एएनएम को डालनी होगी। इसके अलावा फॉर्म पी में संभावित मरीजों की जानकारी डालनी होगी। फार्म एल पैथोलॉजी से संबंधित होगा है, जिसमें यदि कोई मरीज अपनी जांच कराने आता है तो इस पर इंटर्नल और एक्सटर्नल जानकारी दी जाएगी। इसके अलावा विभाग की ओर से इस एप के जरिए 33 बीमारियों का रिकार्ड रखा जाएगा। इस एप के लिए शुरुआती ट्रेनिंग दे दी गई है। ऑनलाइन ही सभी मरीजों का डाटा फीड किया जाएगा। ऐसे में मरीजों के प्रति बरती जाने वाली लापरवाही पर रोक लग सकेगी।

496 एएनएम को उपलब्ध कराया गया अनमोल टैब:
राष्ट्रीय स्वास्थ्य मिशन के तहत अत्याधुनिक और बहुत ही सुविधाजनक प्लेटफार्म के माध्यम से जिला में मरीजों का डाटा उनके नाम और जगह सहित हर समय ऑनलाइन उपलब्ध रहेगा। इसके लिए 496 एएनएम नर्सों को ‘अनमोल टैब’ यानि ‘एएनएम ऑनलाइन’ टैब उपलब्ध करवाए गए हैं। एएनएम नर्सें अपने-अपने क्षेत्रों के मरीजों और स्वास्थ्य से संबंधित अन्य परिस्थितियों की जानकारी टैब पर अपलोड करेंगी। इनके अलावा विभिन्न चिकित्सा संस्थानों में कार्यरत डाक्टर और लैब तकनीशियन भी रोजाना मरीजों व स्वास्थ्य से संबंधित अन्य परिस्थितियों की ऑनलाइन रिपोर्ट देंगे। ब्लाक और जिला स्तर पर भी रोजाना समीक्षा करेंगे तथा किसी भी तरह की मेडिकल एमरजेंसी की स्थिति में त्वरित कदम उठाएंगे।

इन बीमारियों की अपडेट रहेगी सूचना:
एसीएमओ डॉ. सुनील कुमार ने बताया मुख्यत: हेपेटाइटिस, मलेरिया, डेंगू, चिकनगुनिया, डिफ्थीरिया, चिकनपॉक्स, बुखार, मानसिक रोग, डॉग बाइट, स्नैक बाइट, पीलिया, कालाजार, टीबी, फाइलेरिया, टेटनस, मीजल्स, कैंसर, हृदय रोगी, हाई रिस्क प्रेग्नेंसी, किडनी, बाल रोग, दंत रोग, चर्म रोग समेत 33 बीमारियां बीमारियों की जानकारी स्वास्थ्य विभाग द्वारा ऑनलाइन डाली जाएगी। साथ में मरीजों का पूरा रिकार्ड भी ऑनलाइन होगा। वहीं स्वास्थ्य विभाग से लेकर पीएचसी तक पर मरीज का पूरा अपडेट रखा जाएगा। इसके लिए स्वास्थ्य विभाग द्वारा आईएचआईपी यानी इंटीग्रेटेड हेल्थ इंफॉरमेशन प्लेटफार्म 1 अप्रैल से शुरू किया जाएगा।

मौके पर एसीएमओ डॉ सुनील कुमार, आईडीएसपी एपिडेमियोलॉजिस्ट अनिल चक्रवर्ती, डाटा मैनेजर प्रीतम कुमार सहित आशा एवं एएनएम उपस्थित थे।

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