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सीएम कॉलेज के संस्कृत विभाग तथा राजस्थान के अंबलिंकिंग प्रतिष्ठान के तत्वावधान में अन्तरराष्ट्रीय वेबीनार आयोजित।

सीएम कॉलेज के संस्कृत विभाग तथा राजस्थान के अंबलिंकिंग प्रतिष्ठान के तत्वावधान में अन्तरराष्ट्रीय वेबीनार आयोजित

बौद्ध शिक्षाएं और कोविड-19 विषयक वेबीनार में जापान,हांगकांग,थाइलैंड, वियतनाम तथा श्रीलंका से भी जुड़े विद्वान

प्रधानाचार्य प्रो विश्वनाथ झा की अध्यक्षता में आयोजित 130 व्यक्तियों से अधिक के कार्यक्रम का कुलसचिव प्रो मुश्ताक अहमद ने किया उद्घाटन

बुद्ध की समानता,मानवता और करूणापूर्ण शिक्षा के मार्फत संवेदनशील व आदर्श समाज निर्माण संभव- डा मुश्ताक अहमद

सी एम कॉलेज,दरभंगा में विश्वविद्यालय एवं विशेषज्ञों की मदद से बुद्ध अध्ययन केंद्र की होगी स्थापना- प्रो विश्वनाथ

दुनिया के सभी धर्म मानव कल्याण और मानवीय मूल्यों की रक्षा हेतु बने हैं। धर्म दिखाने की नहीं,वरन मन-मस्तिष्क में रखने वाला है जो मात्र साहित्य नहीं,बल्कि आचरण में उतारने की चीज है। बुध की समानता,मानवता और करुणापूर्ण शिक्षा के मार्फत संवेदनशील व आदर्श समाज का निर्माण संभव है।उक्त बातें सी एम कॉलेज,दरभंगा के संस्कृत विभाग तथा अम्बलिंकिंग प्रतिष्ठान, राजस्थान के संयुक्त तत्वावधान में बुद्ध पूर्णिमा की पूर्व संध्या पर “बौद्ध शिक्षाएं और कोविड-19” विषयक अंतरराष्ट्रीय वेबीनार का उद्घाटन करते हुए मिथिला विश्वविद्यालय के कुलसचिव प्रो मुश्ताक अहमद ने कहा।उन्होंने बेहतरीन आयोजन हेतु विश्वविद्यालय की ओर से आयोजकों को धन्यवाद देते हुए कहा कि वेबीनार का विषय प्रासंगिक एवं ज्वलंत समस्या पर आधारित है। कुलसचिव ने कहा कि सनातन धर्म भी पूरे विश्व को परिवार मानकर उसका कल्याण चाहता है,वही इस्लाम धर्म अल्लाह को सबका कल्याणकर्ता मानता जाता है। बौद्ध शिक्षा आडंबर से दूर हमारी कोरोना जैसी सभी समस्याओं के निदान करने में समर्थ है तथा हमें स्वस्थ रहने की सीख देती है। इसी कारण बौद्ध धर्म-दर्शन पूरे विश्व में अधिक लोकप्रिय हुआ है।
एक दिवसीय अंतरराष्ट्रीय वेबिनार का आरम्भ थाईलैण्ड के महाचूलांगकरन विश्वविद्यालय के भिक्खु दीपरतन द्वारा त्रिशरण और पंचशील की बुद्ध वंदना से तथा समापन पुण्यानुमोदन गाथाओं के पाठ से हुआ।
देश-विदेश के अभ्यागतों का स्वागत करते हुए मारवाड़ी महाविद्यालय,दरभंगा के संस्कृत विभागाध्यक्ष डॉ. विकास सिंह ने बौद्ध धर्म-दर्शन के विकास में मिथिला के योगदान को रेखांकित करते हुए त्रिविध पावनी बुद्ध पूर्णिमा के आशय और महत्व को स्पष्ट किया।
मिथिला शोध संस्थान,दरभंगा के पूर्व पांडुलिपि विभागाध्यक्ष डॉ. मित्रनाथ झा ने संक्षिप्त परिचय देते हुए बुद्ध की शिक्षाओं की प्रासंगिकता और मिथिला की सांस्कृतिक देन की ओर सभी का ध्यान खींचा।
हॉंगकॉंग विश्वविद्यालय के बौद्ध अध्ययन केंद्र के प्राध्यापक डॉ. दीपेन बरुआ ने बीज वक्तव्य देते हुए कहा कि तथागत बुद्ध की शिक्षाएं सार्वदेशिक और सार्वकालिक हैं।उनके द्वारा बताए गए करुणा और मैत्री के सिद्धांत इस कोविड -19 के दौर में सकारात्मक वातावरण बनाने के लिए अत्यावश्यक हैं। सरकार के सार्वजनिक स्वास्थ्य या आपदा राहत प्रयासों के अलावा, मानवीय संगठन विभिन्न चिकित्सा उपकरणों,भोजन, दवाइयों आदि की आपूर्ति करके चल रहे संकट को कम करने में मदद कर रहे हैं जो करुणा जैसे मूल्यों का मानवीय हृदय में प्रस्फुटन है। माइंडफुलनेस मेडिटेशन अभ्यास इस महामारी के दौरान चिंता और तनाव से निपटने में भी हमारी सहायता करता है,क्योंकि अभ्यास के साथ हम अपने-आपको शांत करने और ध्यान केंद्रित करने के लिए मानसिक विराम लेकर दैनिक जीवन में अधिक सकारात्मक सोच सकते हैं। यह ध्यान-अभ्यास एक सकारात्मक और सार्थक दृष्टिकोण के साथ होना चाहिए जो हमारे स्वयं के साथ,हमारे संबंधों को मजबूत करता है और हमारे परिवारों और दूसरों के साथ हमारे भावनात्मक संतुलन को पुनर्स्थापित करता है।
श्रीलंका के अनुराधापुर की प्रसिद्ध चित्रकार और प्राध्यापिका डा चामिनि वीरसूरिया ने अंतरराष्ट्रीय वेबिनार में विशिष्ट अतिथि के रूप में शिरकत की। उन्होंने कोविड-19 के दौर में तथागत बुद्ध की शिक्षाओं में से पंचनियमों की ओर सभी का ध्यान आकर्षित किया। ये नियम हैं – उतु नियम,धम्म नियम,खम्म नियम,चित्त नियम और बीज नियम। संसार में हमारे साथ कोई भी घटना केवल कुशल-अकुशल कर्मों की वजह से ही नहीं होती, अपितु इन पंचनियमों में से किसी एक के गड़बड़ होने से होता है। लोगों के द्वारा अमूमन कहा जा रहा है कि अकुशल कर्म करने वाले लोगों को कोरोना होता है,कुशल कर्म करने वालों को नहीं। ऐसा नहीं है, कोरोना ग्रसित होने में पंचनियमों के या उनमें से किसी एक के असंतुलित होने से व्यक्ति विशेष को होता है।
सम्मानित अतिथि विश्वविद्यालय संस्कृत विभागाध्यक्ष प्रो. जीवानन्द झा ने कहा कि बुद्ध ने हमें दुःख निवारण के साथ ही परमशांति का मार्ग भी बताया।वे तथागत की विभिन्न देशनाओं के आलोक में कोविड-19 से जूझने और मुकाबला करने की ओर प्रेरित किया।
वेबीनार के मुख्य अतिथि के रूप में वर्ल्ड बुद्धिस्ट मिशन,जापान के अंतरराष्ट्रीय अध्यक्ष भन्ते रवि मेधांकर महाथेरो ने कहा कि मानव जीवन में विशेषकर आज की इस महामारी के दौर में जब चारों तरफ हाहाकर मचा हुआ है, लोगों के काम ठप हो गए हैं, बीमारी के साथ-साथ भूख की भी समस्या होने लगी है।ऐसे में भगवान बुद्ध द्वारा उपदेश दी गई दान पारमिता अत्यावश्यक हो जाती है।हमें आगे बढ़कर जरूरतमंदों की सहायता करनी चाहिए।उन्होंने शाक्यमुनि बुद्ध की शिक्षाओं के आधारस्तम्भ पंचशील और अष्टांग मार्ग की ओर श्रोताओं का ध्यान खींचते हुए उनके दैनन्दिन अभ्यास पर बल दिया और सभी के कल्याण की कामना की।उन्होंने शीघ्र ही भारत के कोरोना मुक्त होने के लिये मंगलकामना करते हुए सबके स्वस्थ और सुखी होने के लिए आशीर्वचन गाथाओं का पाठ किया।
अध्यक्षीय उद्बोधन देते हुए सी एम कॉलेज,दरभंगा के प्रधानाचार्य प्रो विश्वनाथ झा ने कहा कि आज के दौर में गौतम बुद्ध एक ऐसा चरित है जो सबको शांति और सुख प्रदान करता है।करुणा की जागृति का आदर्श गौतम बुद्ध हैं। सन्तप्त पशु-पक्षियों की करुणा सिद्धार्थ के हृदय को झकझोर देती है और बुद्ध के रूप में उसे एक आंदोलन बनाती है,जिससे कोटि जन लाभान्वित हो रहे हैं। उन्होंने अपने विश्वविद्यालय एवं विशेषज्ञों की मदद से महाविद्यालय में बौद्ध अध्ययन केन्द्र खोलने पर बल देते हुए सभी प्रकार की सुविधाएँ उपलब्ध कराने का संकल्प व्यक्त किया। वेबीनार में वियतनाम से प्रो वायलट ट्रांस,कोलकाता से डॉ अनुश्रिता मंडल,महाराष्ट्र से परितोष सरदाना,हिमाचल प्रदेश से डा दीपिका नेगी,दिल्ली विश्वविद्यालय से डा राजकुमारी, जामिया मिलिया इस्लामिया विश्वविद्यालय,दिल्ली से डा जयप्रकाश नारायण व डा धनंजय,जेएनयू से डा इन्दू डिमोलिया,सोनल बैरवा तथा नरेंद्र कुमार,डॉ उदय नारायण तिवारी, डा पुतुल सिंह,डा अवधेश प्रसाद यादव,राजस्थान से डा महेंद्र कुमार आनंद व डा सत्यमूदिता स्नेही,डा राजा राम,डा काशीनाथ मिश्रा,डा वंदना कुमारी,छत्तीसगढ़ से अखिलेश राठौर,डख शंभू मंडल,मोतिहारी से डा बिपिन दुबे, डा राजेश भारती,डॉ प्रवीण कुमार वर्मा,डॉ दिनेश कुमार महतो,डा मनोज कुमार दास,डा संजय कुमार,प्रो विद्यानाथ झा,डा भक्तिनाथ झा,डा विनय कुमार झा,अभिषेक कुमार,ओरियंटल बीएड कॉलेज,दरभंगा के प्रधानाचार्य डा जी एम अंसारी,डा प्रेम कुमारी,डा सुमंत कुमार दास, प्रो राम बैरवा,पटना विश्वविद्यालय से डा सिद्धार्थ, डा मुकेश कुमार चौरसिया,डा निशांत,डा पंकज कुमार,मुंगेर से डा राजेश कुमार भारती आदि सहित 130 से अधिक शिक्षकों,शोधार्थियों एवं विद्यार्थियों ने भाग लिया। मंगलमय दिन आजु हे पाहुन छथ आयल…नामक स्वागत गान शांभवी तानिया गाया। कार्यक्रम का संचालन संयोजक व सी एम कॉलेज,दरभंगा के संस्कृत विभागाध्यक्ष डॉ आर एन चौरसिया ने किया,जबकि ध्न्यवाद ज्ञापन कॉलेज के संस्कृत विभाग के सहायक आचार्य डॉ. संजीत कुमार झा ने किया।

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