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सी एम कॉलेज,दरभंगा द्वारा “कबीरदर्शन और समकालीन समाज” विषयक राष्ट्रीय वेबीनार आयोजित

सी एम कॉलेज,दरभंगा द्वारा “कबीरदर्शन और समकालीन समाज” विषयक राष्ट्रीय वेबीनार आयोजित

कुलसचिव प्रो मुश्ताक द्वारा उद्घाटित वेबीनार में मुख्य अतिथि प्रो चंद्रभानु सिंह सहित 7 राज्यों के 140 व्यक्तियों की हुई सहभागिता

लोकभाषा में हकीकत युक्त मानवीय मूल्यों से सराबोर कबीर-दर्शन हमारे समाज का आईना- प्रो मुश्ताक

वाणी व कर्म में एकता युक्त समाजसुधारक तथा क्रांतिकारी कबीर-दर्शन सदा प्रासंगिक- प्रो चन्द्रभानु

कबीर-साहित्य तथा उनके दर्शन पर महाविद्यालय में आयोजित किए जाएंगे व्याख्यानमाला- प्रो विश्वनाथ

निर्गुण ज्ञानमार्गी,सर्वप्रिय, समन्वयवादी, युगकवि कबीर मानवतावादी चिंतक-डा अशोक

कबीर सृजनकर्ता,बहुमत का प्रतिनिधित्वकर्ता तथा सामाजिक व आध्यात्मिक क्रांतिकारी कवि- डा विकास
कबीरदर्शन मानवतावादी चिंतन का अभिन्न हिस्सा है। लोकभाषा में हकीकत युक्त मानवीय मूल्यों से सराबोर कबीरदर्शन हमारे समाज का आईना है। उन्होंने 15 वीं सदी में लोकभाषा को स्थापित किया था। उक्त बातें मिथिला विश्वविद्यालय के कुलसचिव प्रो मुश्ताक अहमद ने सी एम कॉलेज,दरभंगा के तत्वावधान में कबीर जयंती की पूर्व संध्या पर “कबीर-दर्शन और समकालीन समाज” विषयक राष्ट्रीय वेबीनार का उद्घाटन करते हुए कही। कुलसचिव ने कहा कि कबीर ने न केवल भक्ति आंदोलन, बल्कि पूरे भारतीय जनमानस को भी काफी प्रभावित किया और नई दिशा प्रदान की। उन्होंने अपने नाम के अनुसार ही साहित्य और दर्शन में अपनी महानता सिद्ध किया। कबीर के दर्शन से आज समाज में सामंजस्य स्थापित किया जा सकता है,जिनके निर्धारित मानक हमारे पूरे समाज का मानक बन गया है। कबीरदर्शन की आज अधिक प्रासंगिकता बढ़ गई है। मुख्य अतिथि के रूप में विश्वविद्यालय हिंदी विभाग के पूर्व अध्यक्ष प्रो चंद्रभानु प्रसाद सिंह ने कहा कि वाणी व कर्म में एकता युक्त,समाजसुधारक तथा क्रांतिकारी कबीर का दर्शन सदा प्रासंगिक है। कबीरकालीन समाज बाह्याडबरों की चरम सीमा पर था,जिसके खिलाफ कबीर ने आवाज उठाया। वे अंधविश्वासी हिंदुओं व मुस्लिमों को कड़ी फटकार लगायी। कोरोना जैसे काल में सामाजिक सद्भाव की स्थापना में कबीर-दर्शन की अत्यधिक महत्ता है। क्रांतिकारी दार्शनिक एवं समाजसुधारक के रूप में कबीर मानव मात्र के कल्याण हेतु कार्य किया,जिनके दर्शन को अपनाकर हम बेहतर समाज का निर्माण कर सकते हैं।
विशिष्ट वक्ता के रूप में महाराजा सूरजमल ब्रज विश्वविद्यालय, भरतपुर,राजस्थान के हिंदी प्राध्यापक डा अशोक कुमार गुप्ता ने कहा कि सर्वप्रिय,समन्वयवादी युगकवि कबीर मानवतावादी चिंतक थे जो भक्तिकालीन निर्गुण ज्ञानमार्गी कवि थे। अपने गुरु रामानंद से राम-राम नामक गुरुमंत्र को अपनाया,जिनकी साखी,शब्द और रमैणी- तीन प्रमुख रचनाएं हैं। कबीर ने मूर्तिपूजा का विरोध करते हुए एकेश्वरवाद को स्वीकार किया। व्यावहारिक व समाजसुधारक कबीर हमारे लिए प्रेरक एवं अनुकरणीय हैं।
पटना विश्वविद्यालय के संस्कृत प्राध्यापक डा हरीश दास ने विशिष्ट अतिथि के रूप में कहा कि कबीर अपने-आप में पूर्ण हैं और बुराइयों के खिलाफ ब्रांड हैं जो मानव में व्याप्त काम,क्रोध, लोभ, मोह आदि की समाप्ति चाहते थे। कबीर ने डंके की चोट पर विभेदकारी स्थितियों का पुरजोर विरोध किया।
सिक्किम केंद्रीय विश्वविद्यालय के शांति एवं संघर्ष अध्ययन विभाग के प्राध्यापक डा दिनेश कुमार अहिरवार ने कहा कि कबीर की दृष्टि आलोचनात्मक रही है जो तर्कपूर्ण और वैज्ञानिक है। वे समाज में परिवर्तन चाहते थे। उन्होंने समाज में व्याप्त रूढ़ियों व आडंबरों के खिलाफ आवाज उठाई।
हिमाचल प्रदेश केंद्रीय विश्वविद्यालय,धर्मशाला की हिंदी प्राध्यापिका डा प्रीति सिंह ने कहा कि कबीर को किसी जाति,धर्म या स्थान से बांधा नहीं जा सकता है। उनका दृष्टिकोण यथार्थ है जो सार्वदेशिक एवं सर्वकालिक है। रवीन्द्र नाथ टैगोर के साहित्य पर मस्तमौला व्यक्तित्व वाले कबीर का अत्यधिक प्रभाव पड़ा।
जाकिर हुसैन दिल्ली कॉलेज, दिल्ली की हिंदी प्राध्यापिका डा राजकुमारी ने कहा कि कबीर ने सामाजिक व्यवस्था में भेदभाव को मिटाने का सार्थक प्रयास किया। कबीर अहिंसावादी और बहुमुखी प्रतिभा के धनी कवि थे जिनका दृष्टिकोण व्यापक था।
इंदिरा गांधी राष्ट्रीय जनजातीय विश्वविद्यालय,अमरकंटक,मध्य प्रदेश के हिंदी प्राध्यापक तथा सी एम कॉलेज के पूर्ववर्ती छात्र डा प्रवीण कुमार ने कहा कि कबीर की कविता सदा समय से बात करती हुई प्रतीत होती है जो आत्ममूल्यांकन भी सिखाती है। कबीर ने जो ज्ञान की ज्योति जलाई उससे आज भी हम अपना मार्ग ढूंढ सकते हैं। कबीर की कविता में वर्णित मानवीय मूल्य आज भी प्रासंगिक हैं।
अध्यक्षीय संबोधन में प्रधानाचार्य प्रो विश्वनाथ झा ने कहा कि कबीर साहित्य और उनके दर्शन पर महाविद्यालय में व्याख्यानमाला आयोजित किए जाएंगे। कबीर महामानव थे,जिन्होंने इंसानियत की बात की। वे संपूर्ण व्यवस्था में परिवर्तन चाहते थे।
सी एम कॉलेज के संस्कृत विभागाध्यक्ष एवं वेबीनार के संयोजक डा आर एन चौरसिया के संचालन में आयोजित वेबीनार में अतिथियों का स्वागत करते हुए मारवाड़ी महाविद्यालय के संस्कृत विभागाध्यक्ष व वेबीनार के आयोजन सचिव डा विकास सिंह ने कहा कि कबीर सृजनकर्ता, बहुमत का प्रतिनिधित्व कर्ता तथा सामाजिक व आध्यात्मिक क्रांतिकारी कवि थे। हमें पूर्वाग्रह से मुक्त होकर उनके साहित्य का अध्ययन-अध्यापन तथा शोध कार्य में प्रवृत्त होना चाहिए,जबकि धन्यवाद ज्ञापन करते हुए प्रसिद्ध चिंतक एवं सामाजिक डा उमेश राय ने कहा कि कबीर की दृष्टि में सभी व्यक्ति समान हैं,जिनका दर्शन मार्क्सवाद से प्रभावित है। वेबीनार में सतीश चंद्र भगत, डा प्रवीण कुमार,डा भारती झा,डा अनीता गुप्ता,प्रो अखिलेश कुमार राठौर,डा संतोष गुप्ता,डा उर्मिला शर्मा,प्रो विद्यानाथ झा,अजय कुमार, प्रो राजीव रंजन सिंह, आर बी ठाकुर,सच्चिदानंद मिश्र,डा एकता वर्मा,डा हरीश दास, अस्मिता कुमारी,डा रेणू, डा सुनीता कुलश्रेष्ठ,डा रंजना भारती, राजकुमार गणेशन,डा एम एल चौधरी,डा शिखर वासिनी, डा अंजू कुमारी,सीए हर्ष मिश्रा,डा दीनानाथ साह,डा शंभू मंडल, शालिनी महतो,हरीश राम,हेमू यादव,अभिनव कुमार,शीला कुमारी,विकास कुमार गिरी सहित 7 राज्यों के 140 से अधिक व्यक्तियों ने भाग लिया।

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