कोविड-19 से पैदा हुए हालात के कारण प्रमण्डल से लेकर केंद्रीय स्तर तक सभी जीडीएस कर्मी भी कमोबेश इससे प्रभावित हुईं हैं। हम गर्व के साथ कह सकते हैं कि जीडीएस एक रक्षक और अन्य आबादी से सहयोग करने के लिए समर्पण भावना और सेवा सिध्दान्त के साथ अग्रिम मोर्चे पर खड़ा रहा । जीडीएस द्वारा की गई सेवा बहुमूल्य है। लेकिन डाक विभाग ने उनकी समस्याओं का समाधान करने में थोड़ी भी चिंता नहीं दिखाई। डाक विभाग में बेजोड़ मान्यता प्राप्त संगठन अखिल भारतीय ग्रामीण डाक सेवक संघ दिल्ली ने लम्बे समय से चले आ रहे जीडीएस के मामले के समाधान के लिए विभाग पर बार- बार दबाव डाला। जीडीएस के लम्बित मामले के समाधान के लिए राष्ट्रीय महामंत्री कामरेड एस एस महादेवया कोविड- 19 के दौरान भी डाक विभाग के उच्च अधिकारियों से समय- समय पर मिलते रहे। जिसके परिणाम स्वरूप जीडीएस को सरकारी कर्मचारी का दर्जा देना, तीन समयबद्ध पदोन्नति जीडीएस को देना,जीडीएस को 180 दिनों के अवकाश को संग्रह करने तथा अवकाश के बदले में नगद राशि की अनुमति देना, ईएसआई योजना के तहत जीडीएस के लिए स्वास्थ्य सुविधाओं का विस्तार करना, एकल शाखा डाकघर के शाखा डाकपाल को कम्बाइंड डयूटी भत्ता देने आदि पर विभाग सक्रियता के साथ विचार कर रहा है। मालूम हुआ है कि 180 दिन तक के अवकाश संग्रह करने की बात डीओपीटी के पास विचाराधीन है। राष्ट्रीय महामंत्री कामरेड एस एस महादेवया ने सदस्य (डाक) नई दिल्ली के सामने जीडीएस को त्यौहार भत्ता, असंगत लक्ष्य के लिए स्थानीय अधिकारियों द्वारा जीडीएस को दंडित करना तथा कर्तव्य परायणता के बंधन के नाम पर भारी वसूली करना जैसे मुददो को रखा और सदस्य (डाक) नई दिल्ली ने सकारात्मक समाधान का आश्वासन दिया। हम आशा करते हैं कि हमारी लंबित न्यायोचित मांग आने वाले दिनों में हमें संघर्ष के बदौलत जरूर हासिल होगा । राज किशोर सहनी प्रमंडलीय मंत्री सह प्रदेश संगठन मंत्री अखिल भारतीय ग्रामीण डाक सेवक संघ, दरभंगा प्रमंडल, दरभंगा (बिहार)
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