कोरोना की संभावित तीसरी लहर को देखते हुए दो परतों वाले मास्क होंगे उपयोगी: डॉ अहसन हमीदी
वायरस के शरीर में प्रवेश को अवरुद्ध करने में मास्क ही कारगर
काम के क्षेत्र के अनुसार डबल या एन95 मास्क का करें चयन

दरभंगा जिले में कोरोना संक्रमण के मामले लगातार कम होते जा रहे हैं। हालांकि पिछले डेढ़ साल से दुनियाभर में जारी कोरोना का संक्रमण अभी भी खत्म नहीं हुआ है। कोरोना वायरस में लगातार हो रहे म्यूटेशन इसे और भी संक्रामक और नुकसानदायक बनाते जा रहे हैं, यही कारण है कि इस वक्त हर जगह संभावित तीसरी लहर को लेकर चर्चा हो रही है। वैज्ञानिकों के मुताबिक कोविड वैक्सीन सुरक्षा देने में काफी मददगार साबित हो सकती है , लेकिन वैक्सीन ले चुके लोगों को भी लगातार कोविड से सुरक्षा के नियमों का पालन करते रहना चाहिए। जब तक पूरी दुनिया से कोरोना का संक्रमण पूरी तरह से खत्म नहीं हो जाता है। लोगों को भीड़भाड़ वाले इलाकों में मास्क पहनने, सामाजिक दूरी का ख्याल रखने के साथ हाथों की स्वच्छता का विशेष ध्यान रखना चाहिए। डीएमसीएच के कोरोना नोडल ऑफिसर डॉ अहसन हमीदी ने कहा हाल ही में हुए कई अध्ययनों में कहा जा रहा है कि कोरोना के नए म्यूटेटेड वैरिएंट्स के संक्रमण से बचने के लिए अच्छे और कसे हुए मास्क पहनकर रहना चाहिए। भारत में कोविड-19 की दूसरी लहर के दौरान डबल मास्किंग लगाने की सलाह दी गई, वहीं कुछ डॉक्टरों का कहना है कि कोरोना से सुरक्षा देने में गुणवत्ता ग्रेड एन95 मास्क ज्यादा प्रभावशाली हो सकते हैं। कोरोना की सम्भावित तीसरी लहर से सुरक्षित रखने के लिए मास्क अतिआवश्यक है।
कोरोना से बचाव के लिए डबल मास्किंग ज़रूरी
डॉ हमीदी के अनुसार डबल मास्किंग का मतलब, एक के ऊपर और एक मास्क लगाना। अतिरिक्त परतों वाले मास्क का उपयोग करने से वायरस के शरीर में प्रवेश को अवरुद्ध करना और आसान हो जाता है। यह संक्रमण की संक्रामकता को कम करने में भी बेहतर काम कर सकता है। यह उन लोगों के लिए भी किफायती और सुरक्षात्मक हो सकता है जो केवल घर पर कपड़े से बने या सर्जिकल मास्क का उपयोग करते हैं। विशेषज्ञों के अनुसार, डबल मास्किंग संक्रमण के जोखिम को कम करने में प्रभावी हो सकता है। इसके लिए एक सर्जिकल और एक कपड़े के मास्क, या दोनों कपड़े या दोनों सर्जिकल मास्क का प्रयोग किया जा सकता है।
उच्च जोखिम क्षेत्र में काम करने वालों के लिए एन 95 मास्क उपयोगी
कोरोना महामारी की शुरुआत से ही एन95 मास्क चर्चा में है। विशेषज्ञ इसे सार्स-सीओवी-2 के प्रचलन में आने से पहले ही सुपर प्रभावी मानते रहे हैं। यह मास्क प्रदूषण, वायरस और बैक्टीरिया को मुंह या नाक के मार्ग में प्रवेश करने से रोकने में काफी बेहतर साबित हो सकते हैं। हवा के कणों से सुरक्षा देने में इस तरह के मास्क को 95 फीसदी तक प्रभावी माना जाता है। कई अध्ययनों में यहां तक कहा जा रहा है कि अन्य सभी प्रकार के मास्क की तुलना में, एन95 मास्क सुरक्षा की उच्चतम गारंटी वाले माने जा सकते हैं। विशेष रूप से उच्च जोखिम वाले वाले लोग चिकित्सक, सफाई कर्मी आदि के लिए एन95 मास्क के उपयोग की सिफारिश की जाती है।
कौन सा मास्क है ज्यादा कारगर
डॉ अहसन ने कहा एन95 मास्क और डबल मास्किंग दोनों ही संक्रमण के जोखिम से सुरक्षा देने में प्रभावी साबित हुए हैं। हालांकि, चिकित्सकीय रूप से कहा जाए तो एन95 मास्क का उपयोग ज्यादा सुरक्षित माना जा सकता है। अत्यंत जोखिम भरे स्थान जैसे अस्पताल और अत्यधिक भीड़-भाड़ वाली जगहों पर एन95 मास्क ज्यादा असरदार माने जाते हैं। वहीं यदि ऑफिस में हैं या कम भीड़-भाड़ वाले क्षेत्र में हैं तो डबल मास्किंग का प्रयोग सुरक्षित है। बताया स्वास्थ्य विशेषज्ञ दोनों ही तरह के मास्क को समान रूप से प्रभावी मानते हैं, हालांकि यह इस बात पर ज्यादा निर्भर करता है कि बहुत अधिक जोखिम वाले स्थान पर हैं या सामान्य स्थान पर।
चेहरे पर अच्छी तरह फिट हो मास्क
नोडल ऑफिसर ने बताया एन95 मास्क और डबल मास्किंग के चुनाव से ज्यादा महत्वपूर्ण है कि जिस भी मास्क का उपयोग कर रहे हों वह सही तरीके से पहना गया हो। एन95 मास्क हो या डबल मास्किंग, इनका चेहरे पर अच्छे से फिट होना ज्यादा महत्वपूर्ण है। मास्क को और अधिक फैशनेबल बनाने के लिए किसी भी ढीले, छेद युक्त या अनावश्यक डिज़ाइन की जगह आरामदायक और अच्छी तरह से कसे हुए मास्क को प्रयोग में लाएं। इसके अलावा यह भी सुनिश्चित करें कि इनके उपयोग के बीच में मास्क को अच्छी तरह से कीटाणुरहित और साफ करते रहें।
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