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“सी एम कॉलेज : मिथिला में उच्च शिक्षा का संवाहक” विषयक व्याख्यान आयोजित

“सी एम कॉलेज : मिथिला में उच्च शिक्षा का संवाहक” विषयक व्याख्यान आयोजित

सी एम कॉलेज के छात्र शैक्षणिक, प्रशासनिक, राजनीतिक तथा सामाजिक सहित सभी क्षेत्रों में रहते हैं अव्वल- प्रो धर्मेन्द्र कुंवर

राष्ट्र-निर्माण में चन्द्रधारी मिथिला महाविद्यालय,दरभंगा का प्रशंसनीय एवं अनुकरणीय योगदान- डा अवनीन्द्र

सी एम कॉलेज पूंजीवादी, सामंतवादी व नकारात्मक सोच के विरुद्ध आधुनिक शिक्षा का प्रमुख केन्द्र- प्रो विश्वनाथ

सी एम कॉलेज के स्थापना दिवस समारोह-2021 के तहत आयोजित ऑनलाइन कार्यक्रम में 50 से अधिक शिक्षकों एवं छात्र-छात्राओं की हुई सहभागिता
सी एम कॉलेज, दरभंगा की स्थापना मिथिलांचल में उच्च शिक्षा के प्रमुख केन्द्र के रूप में हुई। यहां के छात्र शैक्षणिक, प्रशासनिक, राजनीतिक तथा सामाजिक सहित सभी क्षेत्रों में अव्वल आते रहे हैं। सामाजिक परिवर्तन एवं राष्ट्रीय योगदान में यहां के छात्रों एवं शिक्षकों का योगदान अविस्मरणीय रहा है। उक्त बातें महाविद्यालय के पूर्ववर्ती छात्र व शिक्षक संघ के सचिव रहे विश्वविद्यालय इतिहास विभाग से सेवानिवृत्त प्राध्यापक प्रो धर्मेन्द्र कुंवर ने महाविद्यालय के स्थापना दिवस समारोह- 2021 के सुअवसर पर “सी एम कॉलेज : मिथिला में उच्च शिक्षा का संवाहक” विषयक व्याख्यान में मुख्य वक्ता के रूप में कहा। उन्होंने कहा कि महाविद्यालय का पुस्तकालय एक लाख से अधिक मूल एवं दुर्लभ पुस्तकों की बदौलत काफी समृद्ध एवं छात्रोयोगी है। 1974 में सी एम कॉलेज तथा सी एम साइंस कॉलेज पृथक् व स्वतंत्र रूप से कार्य करने लगा,जबकि इसकी स्थापना 1937 ई. में हुई थी। उन्होंने इस के उज्ज्वल भविष्य की कामना करते हुए कहा कि यह एक ऑटोनॉमस दर्जा पाने की पूरी क्षमता रखता है।
“राष्ट्र-निर्माण में सी एम कॉलेज, दरभंगा का योगदान” विषय पर व्याख्यान देते हुए प्रसिद्ध इतिहास विशेषज्ञ डा अवनीन्द्र कुमार झा ने कहा कि मिथिला में उच्च शिक्षा के विकास में न तो अंग्रेजों की कोई दिलचस्पी थी, न ही दरभंगा महाराज ने दरभंगा में किसी महाविद्यालय की स्थापना में कोई बड़ा योगदान किया। उन्होंने कहा कि सी एम कॉलेज का पहला नाम मिथिला महाविद्यालय था जो लहेरियासराय में किराए के मकान में प्रारंभ हुआ,पर गोल मार्केट 99 वर्षों के लिए लीज पर लिए जाने के बाद वर्तमान सी एम साइंस कॉलेज परिसर में महाविद्यालय प्रारंभ हुआ। चंद्रधारी बाबू ने महाविद्यालय को खराब स्थिति से उबारने के लिए ₹51000 का महत्वपूर्ण योगदान दिया था। तब महाविद्यालय के नाम में चन्द्रधारी शब्द जुड़ा। 1942 के आंदोलन में यहां के छात्र-शिक्षकों का काफी योगदान रहा। छात्रों ने गांव-गांव जाकर लोगों को आंदोलन के प्रति जागरूक किया। पूर्व रेल मंत्री पंडित ललित नारायण मिश्र तथा पूर्व मुख्यमंत्री कर्पूरी ठाकुर सहित अनेक राजनेता इस महाविद्यालय के छात्र रहे हैं। यहां के 11 से अधिक शिक्षक साहित्य अकादमी से पुरस्कृत हो चुके हैं।
अध्यक्षीय संबोधन में प्रधानाचार्य प्रो विश्वनाथ झा ने कहा कि सी एम कॉलेज की स्थापना पूंजीवादी, सामंतवादी तथा नकारात्मक सोच के विरुद्ध आधुनिक शिक्षा के प्रमुख केंद्र के रूप में हुआ। यह मिथिला में स्वाधीनता आंदोलन के प्रमुख केन्द्र के रूप में कार्य किया है। अधिवक्ता गंगाधर मिश्र ने तमाम कठिनाइयों एवं विरोधों के बावजूद बुद्धिजीवियों एवं अधिवक्ताओं के सहयोग से इस महाविद्यालय की स्थापना की। उन्होंने महाविद्यालय में एमसीए व एमबीए की पढ़ाई शुरू करने की इच्छा व्यक्त की।
संस्कृत विभागाध्यक्ष डा आर एन चौरसिया के संचालन में आयोजित ऑनलाइन व्याख्यान में अतिथियों का स्वागत अंग्रेजी विभागाध्यक्ष डा इन्दिरा झा ने किया। कार्यक्रम में डा विकास सिंह, डा वीरेंद्र कुमार झा, विपिन कुमार सिंह, राजकुमार गणेशन, कृष्ण कुमार भगत,रंजू भारती, नीतीश झा, सुधीर कुमार यादव, नितिन अग्रवाल, ललित कुमार साहनी, पवन कुमार,धर्मेंद्र कुमार विकास गिरी मुकेश झा धनंजय कुमार सहित 50 से अधिक शिक्षक एवं छात्र-छात्राओं ने भाग लिया। धन्यवाद ज्ञापन राजनीति विज्ञान के सहायक प्राध्यापक डा शैलेन्द्र श्रीवास्तव ने किया।

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