सी एम कॉलेज,दरभंगा के स्थापना दिवस समारोह-2021 के अवसर पर प्रो रत्नेश्वर मिश्र का व्याख्यान आयोजित
मिथिला के प्रथम आधुनिक महाविद्यालय के रूप में सी एम कॉलेज का स्थापना दिवस समारोह सराहनीय एवं सार्थक प्रयास- प्रो रत्नेश्वर
प्रधानाचार्य की अध्यक्षता में हुआ “सी एम कॉलेज : मेरा अनुभव-मेरा संस्मरण” विषयक व्याख्यान आयोजित

15 अगस्त, 1937 को सी एम कॉलेज की स्थापना से मिथिला में हुआ नये युग की शुरुआत- प्रो विश्वनाथ
शिक्षक अनवरत ज्ञानार्जन करते हुए इमानदारी पूर्वक छात्रों को पुत्रवत् शिक्षा प्रदान करें तो छात्र उनके प्रति सम्मान का भाव जरूर रखेंगे। छात्र भी अनुशासित होकर पूरे मनोयोग से शिक्षक से ज्ञान प्राप्त करें, तभी उनका सर्वांगीण विकास होगा। मिथिला प्राचीन काल से ही विश्व को ज्ञान देने में अग्रणी रहा है,जिसकी ज्ञान-परंपरा, संस्कार-संस्कृति तथा धर्म-दर्शन आदि अत्यंत उन्नत रही है। उक्त बातें सी एम कॉलेज,दरभंगा के इतिहास विभाग के पूर्व प्राध्यापक तथा विश्वविद्यालय इतिहास विभाग के पूर्व अध्यक्ष प्रो रत्नेश्वर मिश्र ने “सी एम कॉलेज : मेरा अनुभव- मेरा संस्मरण” विषयक व्याख्यान देते हुए कहा। उन्होंने मिथिला के प्रथम आधुनिक महाविद्यालय के रूप में सी एम कॉलेज की विस्तार से चर्चा करते हुए कहा कि महाविद्यालय द्वारा मनाया जा रहा स्थापना दिवस समारोह-2021 काफी सराहनीय एवं सार्थक प्रयास है। उन्होंने महाविद्यालय के कई पूर्व प्रधानाचार्य,पूर्व शिक्षक एवं सफल छात्रों की विस्तार से चर्चा करते हुए उन्हें याद किया तथा बताया कि 1937-38 में यह महाविद्यालय बलभद्रपुर स्थित अधिवक्ता मोतिउर रहमान के किराए के मकान में प्रारंभ हुआ जो बाद में नगर निगम से 99 साल की लीज पर प्राप्त गोल मार्केट में स्थानांतरित हुआ। तत्पश्चात वर्तमान गंगाधर निकेतन, किलाघाट में स्थापित हुआ जो 1961 में सरकार द्वारा अभिभूत किया गया।
उन्होंने महाविद्यालय के विषम परिस्थिति एवं उन्नति काल की चर्चा करते हुए कहा कि 1961 में पी सी राय चौधरी ने लिखा कि सी एम कॉलेज में 27 सौ से अधिक छात्र थे,जिनके लिए पढ़ने की कोई उचित व्यवस्था नहीं थी। महाविद्यालय की स्थापना में गंगाधर मिश्र,अमरेश्वरी चरण सिन्हा,धरणीधर बाबू,गिरींद्र मोहन नागेश्वर बाबू आदि के योगदान को याद किया तथा बताया कि बाद में दरभंगा महाराज ने ₹1,00000 का दान दिया,जिससे महाविद्यालय में कामेश्वरभवन का निर्माण हुआ। उन्होंने बताया कि स्वतंत्रता आंदोलन के बाद 1974- 75 में जे पी आंदोलन के समय भी सी एम कॉलेज आंदोलन में सक्रिय रहा। उन्होंने कहा कि हमारा विश्वास सिर्फ कहने में नहीं, बल्कि करने में होना चाहिए।
प्रो रत्नेश्वर मिश्र ने कहा कि महाविद्यालय के विकास में विश्व मोहन कुमार सिन्हा, डा लक्ष्मीकांत मिश्र, सुरेंद्रनाथ झा, डा सचीननाथ मिश्र, अरुण कुमार दत्ता,डा सुरेंद्र झा सुमन,कलेक्टर सिंह केसरी,ललित नारायण मिश्र कर्पूरी ठाकुर,भोगेंद्र झा तथा राधानंदन झा का प्रधानाचार्य, शिक्षक तथा छात्र के रूप में सक्रिय योगदान रहा है।
अध्यक्षीय संबोधन में प्रधानाचार्य प्रो विश्वनाथ झा ने कहा कि 15 अगस्त, 1937 को सी एम कॉलेज की स्थापना से मिथिला में नए युग की शुरुआत हुई। जिससे इस क्षेत्र में नई शिक्षा क्रांति हुई, जिसका प्रभाव जीवन के हर क्षेत्रों पर पड़ा। उन्होंने प्रो रत्नेश्वर मिश्र को महाविद्यालय का धरोहर बताते हुए उन्हें हमेशा जलते दीप के समान ज्ञान प्रदाता बताया। प्रधानाचार्य ने आशा व्यक्त किया कि आने वाले समय में सी एम कॉलेज न केवल ओटोनोमस कॉलेज बनेगा,वरन डीम्ड विश्वविद्यालय के रूप में विकसित होगा।
इतिहास विभागाध्यक्ष प्रो दिवाकर सिंह के संचालन में आयोजित व्याख्यान में अतिथि-परिचय अंग्रेजी विभागाध्यक्ष प्रो इंदिरा झा ने किया। आगत अतिथियों का स्वागत संस्कृत विभागाध्यक्ष डा आर एन चौरसिया ने किया, जबकि धन्यवाद ज्ञापन इतिहास विभाग के प्राध्यापक डा अखिलेश कुमार ‘विभु’ ने किया। व्याख्यान की शुरुआत संयोजक प्रो इंदिरा झा के गोसावनी गीत- जय-जय भैरवी असुर भयावनी– तथा अतिथियों द्वारा दीप प्रज्वलन कर किया गया। अतिथियों का स्वागत पुष्पगुच्छ एवं शॉल प्रदान कर किया गया।
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