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Darbhanga ;- बारिश के मौसम में गीला मास्क पहनने से शरीर में वायरस कर सकता प्रवेश: डॉ अहसन हमीदी

बारिश के मौसम में गीला मास्क पहनने से शरीर में वायरस कर सकता प्रवेश: डॉ अहसन हमीदी
-इस मौसम में साथ मे रखे एक से अधिक मास्क
-सूती कपड़े से बने मास्क को रोज़ाना गर्म पानी से धोना ज़रूरी

दरभंगा  देशभर में कोरोना टीकाकरण अभियान के तहत अब तक 46 करोड़ 72 लाख से अधिक कोविड रोधी टीके लगाए जा चुके हैं। स्वास्थ्य मंत्रालय के अनुसार बीते शनिवार को 53 लाख 72 हजार से अधिक टीके लगाए गए। हालांकि टीका लग जाने के बाद भी कई लोग कोरोना से संक्रमित हो रहे हैं। इस संबंध में दरभंगा मेडिकल कॉलेज एंड अस्पताल (डीएमसीएच) के कोरोना नोडल ऑफिसर डॉ अहसन हमीदी ने बताया टीका लगवाने के बाद भी मास्क पहन कर रहना जरूरी है। चूंकि इस्रायल और अमेरिका जैसे देशों ने टीका लगवा चुके लोगों को मास्क पहनने की छूट दे दी थी, लेकिन उसके बाद जब संक्रमण के मामले बढ़ने लगे तो सीडीसी ने एक बार फिर मास्क पहन कर रहने की सलाह दे दी। भारत में भी मामले कम नहीं हो रहे हैं, ऐसे में मास्क सं संबंधित कुछ बातों को जान लेना बेहद जरूरी है, इसके तहत लोगों को यह जानकारी होनी चाहिए कि मास्क को कितने दिन तक उपयोग कर सकते हैं। साथ ही गंदा मास्क पहनने से म्यूकर माइकोसिस का खतरा तो नहीं है।
मास्क को कितने दिन तक उपयोग कर सकते हैं?
डॉ हमीदी कहते हैं, ‘एन-95 मास्क लगाते हैं तो एक मास्क को चार बार लगा सकते हैं। लेकिन इसके लिए एक साथ कम से कम चार मास्क खरीदने होंगे। एक मास्क को लगाने के बाद उसे पेपर में लपेट कर रख दें और दूसरे दिन नए मास्क को लगाएं। इसी तरह तीन दिन तक नए मास्क को लगाएं और चौथे दिन पहले दिन वाले मास्क को लगाएं। इससे अगर मास्क पर वायरस होगा तो चार दिन में नष्ट हो जाएगा। इसी तरह सभी मास्क के बीच चार दिन का गैप रहेगा। अगर सूती (कॉटन) के मास्क लगाते हैं, तो ऑफिस से आने के बाद उसे गर्म पानी में धुल कर प्रेस करके अगले दिन फिर उपयोग कर सकते हैं। लेकिन मास्क को हर दिन धोना जरूरी है। इस बात का ध्यान रखना है कि एन-95 हो या कॉटन का मास्क लगाते वक्त लूज नहीं रखना है। अगर लूज है तो वो खराब है, उसे बदल लें।’

बारिश का मौसम में मास्क भीगने पर करें यह कार्य

डॉ हमीदी के अनुसार ‘मास्क को गीला न होने दें, अगर हो गया है तो उसे निकालकर रख लें, लेकिन अपने साथ एक-दो मास्क और रखें। उन्हें प्लास्टिक की थैली में पैक करके रखें, ताकि वो गीले न हो जाएं। गीला मास्क कभी भी न लगाए रखें, इससे वायरस बाहरी लेयर से जल्द ही नाक और मुंह के जरिये अंदर प्रवेश कर सकता है।’

गंदा मास्क पहनने से म्यूकर माइकोसिस के संभावना नोडल ऑफिसर ने कहा मास्क कोरोना के संक्रमण से बचाता है। कुछ म्यूकर माइकोसिस के केस भी आए हैं, इसपर अभी शोध चल रहा है। कहा इस बीच एक स्टडी हुई थी, जिसमें ये पाया गया है कि गंदा मास्क या बिना धुला मास्क लगाने से नुकसान बढ़ सकता है। ऐसा इसलिए होता है, क्योंकि जब मास्क लगाते हैं और बोलते हैं तो उसमें मॉइस्चर बन जाता है। अगर उसे बार-बार लगाते हैं तो मॉइस्चर फंगस का रूप लेने लगता है और नाक के जरिये शरीर के अंदर पहुंच जाता है। कहा लोग मास्क सही तरीके से नहीं लगाते हैं और लगाते भी हैं तो एक ही मास्क को कई दिन तक लगाते हैं। इसलिए कॉटन के मास्क को गर्म पानी से साफ कर लें। एन-95 मास्क सबसे अच्छा है।’
युवाओं को पोस्ट कोविड में कुछ भी पढ़ने पर सांस फूलने की समस्या
डॉ हमीदी ने कहा ‘कोरोना में फेफड़े प्रभावित होते हैं, ये सभी जानते हैं। युवाओं में ये समस्या ज्यादा देखने को मिल रही है। यही वजह है कि आज भी कई युवा निगेटिव आने के बाद भी फेफड़ों की समस्या से जूझ रहे हैं। पढ़ने में सांस फूलने की जो समस्या है, वो संकेत है कि फेफड़े में काफी असर हुआ है। इसे ठीक होने में समय लग सकता है। लेकिन खुद से कोई दवा न लें। समस्या ज्यादा है तो डॉक्टर को दिखा लें।’
वैक्सीन की बूस्टर डोज ज़रूरी
डॉ हमीदी ने कहा ‘जिस तरह से बच्चों की डीपीटी या टेटनस की वैक्सीन है, इनमें जब वैक्सीन की एक डोज देते हैं तो शरीर उन्हें अच्छे से पहचानता है और एंटीबॉडी बनने की प्रक्रिया धीरे-धीरे होती है। लेकिन जब दूसरी डोज या बूस्टर डोज लगाते हैं तो शरीर एंटीबॉडी बनाने लगता है। इसलिए बूस्टर डोज लगवाना जरूरी है ।’

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