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दरभंगा कोरोना काल में व्रत रखने से पूर्व चिकित्सकीय सलाह जरूरी DN 24 LIVE ajit कुमार सिंह

कोरोना काल में व्रत रखने से पूर्व चिकित्सकीय सलाह जरूरी

•किसी प्रकार की हठधर्मिता शरीर के लिए नुकसानदायक: डॉ अशोक मेहता
•कोरोना से उबर चुके लोगों को नहीं रखना चाहिए उपवास

दरभंगा सावन का महीना चल रहा है। इस माह महिलाएं व्रत रखती हैं। व्रत रखने की सोच रहे हैं तो सावधान हो जाएं। कोरोना काल में व्रत रखना भी नुकसानदायक साबित हो सकता है। खासकर महामारी से रिकवरी के बाद कोरोना से ठीक हुए लोगों को डॉक्टर्स सलाह दे रहे हैं कि वो व्रत रखने से बचें। कोरोना ने लोगों के धैर्य और साहस के साथ-साथ भक्ति, श्रद्धा, आस्था सभी की परीक्षा ली है। पहले लॉकडाउन में मंदिर बंद रहे। अब जब भगवान के द्वार खुले और त्योहारों का सीजन शुरू हुआ है तो एक और चुनौती श्रद्धालुओं के सामने है। कुछ लोग तो बिना पानी उपवास रखते हैं लेकिन इस कोरोना काल में व्रत रखना ठीक नहीं है। डीएमसीएच के मेडिसीन विभाग के चिकित्सक डॉ. अशोक मेहता के अनुसार कोरोना न सिर्फ हमारे शरीर के कुछ खास अंगों को नुकसान पहुंचाता है, बल्कि हमारे रोग प्रतिरोधक क्षमता (इम्युन सिस्टम) को कमजोर करता है। कोरोना से होने वाली मौत का भी मुख्य कारण कमजोर इम्युन सिस्टम होता है। बताया व्रत रखने से शरीर की प्रतिरक्षा प्रणाली कमजोर होती है, जिस से रोगों से लड़ने की शरीर की क्षमता कम हो जाती है। लिहाजा कोरोना से ठीक होने के बाद भी बगैर चिकित्सक की सलाह से उपवास रखना शरीर के लिए नुकसानदायक साबित हो सकता है।
शारीरिक समस्या होने पर नहीं करना चाहिए उपवास:
डॉ मेंंहता ने कहा कि कोरोना सबसे ज्यादा उन पर असर करता है, जिनकी इम्युनिटी कमजोर है। कोविड से ठीक हो गए हैं या अन्य कोई समस्याएं हैं, जैसे डायबिटीज, हाइपरटेंशन, गर्भवती हैं तो ऐसे लोगों को हम कहेंगे कि वो उपवास न करें। आस्था के साथ-साथ शारीरिक स्वास्थ्य का ख्याल रखना भी जरूरी है। डॉ मेहता ने कहा शास्त्रों के जानकार मानते हैं कि उपवास रखने में कोई सख्त नियम नहीं होते। लोग अपनी परिस्थिति और स्वास्थ्य के मुताबिक, अलग अलग तरह का उपवास नहीं कर सकते।
खाना पीने के साथ कर सकते पूजा:
डॉ मेहता ने कहा यदि कोई बीमार है, कोरोना से निकल कर आए हैं तो खाते पीते भी भगवान की पूजा अर्चना कर सकते है। ज़बरदस्ती उपवास करने से शरीर को को समस्या में न डालें। समय और परिस्थिति के अनुकूल काम करें। बताया हमारे यहां कई तरह के उपवास होते हैं। जो स्वस्थ है वो पूरी तरह से उपवास करे, जो थोड़े कमजोर हैं वो पानी का सेवन करें, जो ज़्यादा कमजोर है तो वो फलाहार का सेवन करे। दूध इत्यादि का सेवन करे। डॉ मेहता ने कहा शरीर का ख्याल रखना सर्वोच्च प्राथमिकता होनी चाहिये। सावन के माह में महिलाएं एवं अन्य लोग उपवास करते हैं लेकिन किसी प्रकार की सारी समस्या होने पर चिकित्सक की सलाह अवश्य लें। चिकित्सकीय परामर्श के बाद उपवास करने का निर्णय लें.।
कोरोना से ठीक होने के बाद सतर्कता ज़रूरी:
डॉ मेहता के अनुसार कोरोना से ठीक होने के बाद अन्य कोई समस्याएं हैं, जैसे डायबिटीज, ब्लड प्रेशर , गर्भवती हैं तो ऐसे लोगों को उपवास से परहेज करना चाहिए। उपवास से शरीर को नुकसान हो सकता है। कहा शरीर की रोग प्रतिरोधक क्षमता के लिए ग्लूकोज बेहद ज़रूरी है । अगर उपवास कर रहे हैं तो लो ब्लड शुगर की वजह से इम्युनिटी कम हो जाती है। अगर शुगर बहुत ज़्यादा है तो इस से भी कोविड होने के चांस ज़्यादा हैं।. डॉ मेहता ने कहा कोरोना से लोगों को और भी सतर्कता जरूरी है। रोग प्रतिरोधक क्षमता बढ़ानेेे के लि पौष्टिक भोजन जरूरी होता है लेकिन सावन में लोग उपवास को तरजीह देते हैं। इस स्थिति में अगर कोई कोरोना संक्रमण को मात दे चुका है तो उपवास से पूर्व चिकित्सकीय सलाह जरूर लें।
कोरोना प्रोटोकॉल का अनुपालन करें:
चिकित्सक के अनुसार कोरोना से बचाव के लिए विभागीय प्रोटोकॉल का अनुपालन जरूरी है। टीका अवश्य लेना चाहिए। वैक्सीन लेने के बावजूद संक्रमण से सुरक्षा ज़रूरी है। मास्क पहनना व निरन्तर सफाई पर ध्यान देने के साथ साथ अन्य एहतियात बरतनी ज़रूरी है। इसका अनुपालन सभी को करना चाहिए। कोरोना अनुरूप व्यवहार रखते हुए एक साथ मिलकर हम कोरोना को परास्त कर सकते हैं

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