चार दिवसीय मधुबनी लिटरेचर फेस्टिवल आज से
साहित्य, कला और संस्कृति के संगम से सराबोर होगा फेस्टिवल

चार दिवसीय मधुबनी लिटरेचर फेस्टिवल के चौथी कड़ी की शुरुआत रविवार को होगी. कामेश्वर सिंह दरभंगा संस्कृत विश्वविद्यालय के मुख्यालय भवन (ऐतिहासिक लक्ष्मीश्वर विलास पैलेस) के अहाते में बनाये गये मुख्य मंच पर कार्यक्रम का विधिवत शुभारंभ पद्मश्री डॉ उषा किरण खान करेंगी. जबकि उद्घाटन समारोह में बतौर मुख्य अतिथि श्रीलंका के राजदूत मिलिंडा एंड जेनिफर मोरा गोडा की उपस्थिति रहेगी. जानकारी देते हुए कार्यक्रम की मुख्य संयोजिका डा सविता झा खां ने बताया कि उद्घाटन समारोह की अध्यक्षता कामेश्वर सिंह दरभंगा संस्कृत विश्वविद्यालय के कुलपति प्रो शशिनाथ झा करेंगे. ललित नारायण मिथिला विश्वविद्यालय के कुलसचिव डॉ मुश्ताक अहमद, सेंट्रल इंस्टीट्यूट आफ इंडियन लैंग्वेजेज के नारायण चौधरी, दरभंगा राज परिवार के कुमार कपिलेश्वर सिंह, जेएनयू के रमानाथ झा सहित दरभंगा नगर विधायक संजय सरावगी आदि की इस कार्यक्रम में गरिमामयी उपस्थिति रहेगी.
उन्होंने बताया कि उद्घाटन समारोह में पारंपरिक रसन चौकी के वादन के साथ अतिथियों का स्वागत, ओडिशी नृत्यांगना प्रियांशी मिश्रा द्वारा ओडिशी नृत्य शैली में महाकवि कोकिल विद्यापति रचित गोसाउनि गीत ‘जय जय भैरवि…’ पर भावपूर्ण नृत्य की प्रस्तुति, नारीशक्ति द्वारा वेदपाठ, अरिपन कला के अभूतपूर्व प्रदर्शन आदि के साथ ‘ वैदेही: सीता बियाउंड द बडी’ प्रदर्शनी दर्शकों के विशेष आकर्षण में होगा. जबकि उद्घाटन समारोह के दौरान डॉ अमरेश पाठक सम्मान सहित विभिन्न क्षेत्र में उत्कृष्ट योगदान देने वाले विशिष्ट लोगों को लाइफटाइम अचीवमेंट अवॉर्ड से सम्मानित किया जाएगा. उन्होंने बताया कि प्रथम दिन के कार्यक्रम अंतर्गत युवा सहिती, बाल सहिती एवं जानामि जानकी नृत्य गाथा भी लोगों को विशेष रूप से पसंद आएगा. अकादमिक सत्र में पूर्वांचल विश्वविद्यालय, नेपाल के पूर्व कुलपति प्रो रामावतार यादव ‘नेपाल और तिरहुत पांडुलिपि मे मैथिलीक स्वरूप’ विषय पर अपना व्याख्यान देंगे. मैथिली के मूर्धन्य साहित्यकार डा.भीमनाथ झा की अध्यक्षता में आयोजित अकादमिक सत्र में जेएनयू के गिरीश नाथ झा की उल्लेखनीय उपस्थिति रहेगी.
डॉ सविता झा खान ने बताया कि मधुबनी लिटरेचर फेस्टिवल में मिथिला के सामाजिक, आर्थिक, सांस्कृतिक और परंपराओं का प्रतिनिधित्व करने वाले कई क्षेत्रों को शामिल करने का लक्ष्य रखा गया है. इस प्रकार से लिटरेचर फेस्टिवल पूरी तरह से स्थानीय लोगों का उत्सव होगा. पिछले प्रयासों को जारी रखते हुए इस वर्ष का फेस्टिवल शहरीकरण के सामाजिक व आर्थिक संरचना के पीछे दुर्बल जर्जर ग्रामीण संवेदनशीलता को सामने लाने का प्रयास करेगा. इसके अलावा इस फेस्टिवल के माध्यम से 21 ज्ञान परंपराओं के कई आयामों, पांडुलिपियों को संग्रहित करने, विद्वानों के कार्यों का प्रकाशन, ग्रामीण उत्थान, मैथिली भाषा व साहित्य को बढ़ावा देने, महिला सशक्तिकरण, विरासत संरक्षण तथा स्थानीय कला को बढ़ावा देने के लिए एक मंच प्रदान करने के साथ-साथ इसके माध्यम से भारत- नेपाल सांस्कृतिक, शिल्प और पर्यावरण संबंधी मुद्दों पर भी चर्चा की जाएगी।
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