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सी एम कॉलेज,दरभंगा के राजनीति विज्ञान विभाग के तत्वावधान में मानवाधिकार विषयक कार्यशाला आयोजित

सी एम कॉलेज,दरभंगा के राजनीति विज्ञान विभाग के तत्वावधान में मानवाधिकार विषयक कार्यशाला आयोजित

किसी भी शासन या सरकार की सफलता या असफलता का महत्वपूर्ण मापदंड है मानवाधिकार की स्थिति- डा वर्मा

समुचित कर्तव्यपालन तथा व्यापक मानवतावादी दृष्टिकोण अपनाने से ही मानवाधिकार की सुरक्षा संभव- डा प्रभात

‘वसुधैव कुटुंबकम्,व ‘जियो और जीने दो’ के सिद्धांत को अपनाने से होगी मानवाधिकार की रक्षा- डा चौरसिया

धर्मग्रंथों एवं संविधानों में मानवाधिकार की व्यापक चर्चा एवं सुरक्षा के उपाय वर्णित- प्रो गिरीश
सी एम कॉलेज, दरभंगा के राजनीति विज्ञान विभाग के तत्वावधान में “समकालीन विश्व में मानवाधिकार के समक्ष चुनौतियां एवं समाधान” विषयक एक दिवसीय कार्यशाला का आयोजन समाजशास्त्र विभागाध्यक्ष डा प्रभात कुमार चौधरी की अध्यक्षता में की गई, जिसमें मुख्य अतिथि के रूप में राजनीति विज्ञान के पूर्व प्राध्यापक डा एम एस वर्मा तथा विशिष्ट अतिथि के रूप में संस्कृत विभागाध्यक्ष डा आर एन चौरसिया, विभागीय शिक्षक एवं डा अब्दुल हई, डा आलोक राय, डा रूपेन्द्र झा, डा मसरूर सोगरा, डा नफासत कमाली, डा संजीत, दिनेश झा, सुरेश पासवान, दीप अशीत, विकास, संतोष गुप्ता, मो अलीशान, टाइगर रजक, मो नासिर, राजश्री, सादिक अंसारी, काजल कुमारी, सुजीत लालदेव, मो शाहिर सहित एनसीसी कैडेट एवं स्नातकोत्तर राजनीति विज्ञान विभाग के 120 से अधिक व्यक्ति उपस्थित थे।
अपने संबोधन में डा एम एस वर्मा ने कहा कि हर एक शासक का यह दायित्व है कि वह मानवाधिकार की रक्षा एवं आमलोगों का कल्याण करते हुए न्याय का पूर्णतः पालन करें। परंतु कई बार जब वह अपने कर्तव्यों के पालन से चूक जाता है तो मानवाधिकार सुरक्षित नहीं रह पाता है। मानवाधिकार की सुरक्षा हमारी प्रवृत्ति में होनी चाहिए। सरकार और संविधान मानवाधिकार को सुनिश्चित करते हैं।अंध धार्मिकता, जातीयता, क्षेत्रीयता या लिंगवाद आदि मानवाधिकार के लिए खतरा है। हमें अपने मानवाधिकार के प्रति जागरूक एवं संघर्ष के लिए हमेशा तैयार रहना चाहिए, तभी वह सुरक्षित रहेगा। इसकी रक्षा हेतु स्वतंत्र व निष्पक्ष मीडिया एवं न्यायपालिका का होना भी आवश्यक है।
अध्यक्षीय संबोधन में समाजशास्त्र विभागाध्यक्ष डा प्रभात कुमार चौधरी ने कहा कि समुचित कर्तव्यपालन तथा व्यापक मानवतावादी दृष्टिकोण को अपनाने से ही मानवाधिकार की सुरक्षा संभव है। इसकी रक्षा में हर एक व्यक्ति का समान रूप से योगदान आवश्यक है। यदि हम अपने अधिकारों की रक्षा के साथ ही दूसरों के अधिकारों की सुरक्षा करेंगे, तभी खुशहाल समाज का निर्माण संभव है।
विशिष्ट अतिथि के रूप में संस्कृत विभागाध्यक्ष डा आर एन चौरसिया ने कहा कि आज पूरे विश्व में मानवाधिकार की सुरक्षा प्रमुख समस्या है। मानव जाति का इतिहास अधिकांशतः व्यक्ति को मानवाधिकार से वंचित रखे जाने का रहा है। मानवाधिकार को मौलिक, आधारभूत, जन्मजात या नैसर्गिक अधिकार भी कहते हैं जो हमारे व्यक्तित्व के सर्वांगीण विकास हेतु आवश्यक हैं। इन्हें हम “वसुधैव कुटुंबकम्” तथा “जियो और जीने दो” के सिद्धांत को अपनाकर सुरक्षित रख सकते हैं। मानवाधिकार के अंतर्गत प्रत्येक मानव के लिए समानता, शिक्षा, कर्म- धर्म, सामाजिक सुरक्षा, निष्पक्ष न्याय, आत्मनिर्णय, विकास तथा आर्थिक व सांस्कृतिक उन्नति के अधिकार शामिल हैं।
विषय प्रवेश कराते हुए विभागीय प्राध्यापक डा आशीष कुमार बरियार ने कहा कि मानवाधिकार हमारे जीवन से अभिन्न रूप से जुड़ा हुआ है। मानव के जन्मजात स्वतः प्राप्त मूलाधिकार को मानवाधिकार कहते हैं। यह हमारी आजादी, समानता प्राप्ति और जीवन जीने की आकांक्षा को व्यक्त करता है।
अतिथियों का स्वागत करते हुए विभागाध्यक्ष प्रो गिरीश कुमार ने कहा कि 10 दिसंबर,1948 को संयुक्त राष्ट्र संघ द्वारा विश्व मानवाधिकार दिवस मनाने की घोषणा की गई थी। हमारे सभी धर्मग्रंथों एवं देश के संविधानों में मानवाधिकार की व्यापक चर्चा एवं सुरक्षा के उपाय किए गए हैं।
कार्यशाला के तकनीकी सत्र में छात्रों ने विभिन्न तरह की गतिविधियों में भाग लिया, जबकि उनके विभिन्न प्रश्नों एवं शंकाओं का समाधान मुख्य अतिथि डॉ वर्मा ने किया। कार्यशाला का प्रारंभ अतिथियों द्वारा दीप प्रज्वलन से हुआ, जबकि समापन सामूहिक राष्ट्रगान- जन गण मन.. के गायन से हुआ।
आगत अतिथियों का स्वागत पुष्पगुच्छ एवं पाग- चादर से किया गया। विभागीय प्राध्यापक डा आलोक रंजन के सुसंचालन में आयोजित कार्यशाला में धन्यवाद ज्ञापन एनसीसी पदाधिकारी डा शैलेन्द्र श्रीवास्तव ने किया।

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