खाद की किल्लत सहित किसानों के विभिन्न मुद्दों पर बिहार राज्य किसान सभा की दो दिवसीय बैठक सम्पन्न

दरभंगा दुनिया के अजूबे ऐतिहासिक एवं बेमिसाल किसान आंदोलन के सामने आखिर मोदी सरकार झुकने को मजबूर हुई। किसानों की जीत व दुनिया के नव उदारवाद की हार पर बैठक में प्रशन्नता व्यक्त की गई। खाद के भयानक कालाबाजारी और किसानों से धान खरीद नहीं होने के विरोध में 6 जनवरी 2022 को जिला समाहरणालय के समक्ष रोषपूर्ण प्रदर्शन किया जाएगा। फरवरी माह में बिहार के सभी जिलों में किसान समस्याओं को लेकर कन्वेंशन आयोजित कर संघर्ष को तेज किया जाएगा। बिहार राज्य किसान सभा के दो दिवसीय बैठक की अध्यक्षता कार्यकारी राज्य अध्यक्ष राम कुमार झा ने की। बैठक में प्रदेश भर से आऐ हुए किसान प्रतिनिधियों का अभिनंदन किसान सभा के जिला अध्यक्ष राजीव कुमार चौधरी ने किया। बैठक में शहीद किसानों एवं सेनानायको को श्रद्धांजलि दी गई। राज्य परिषद की बैठक में पिछले आंदोलन की समीक्षा रिपोर्ट संगठन के विस्तार और आगे संघर्ष के मुद्दे और आंदोलन के स्वरूप पर विस्तार से महासचिव अशोक प्रसाद सिंह रिपोर्ट पेश की। प्रधानमंत्री फसल बीमा योजना पुनः बिहार में चालू करों, एपीएमसी एक्ट 1960 को पुनः बहाल करों, एमएसपी को कानूनी गारंटी दिया जाऐ, आवारा पशुओं पर रोक लगाया जाऐ, दुध उत्पादकों को दो रूपया प्रतिलिटर सब्सिडी दिया जाए, बाढ़ -सुखाड़ बिजली संकट का स्थायी निदान किया जाऐ, गन्ना उत्पादकों को 6 सौ रूपया प्रति क्विंटल किमत दिया जाऐ आदि मांगो को लेकर दिल्ली के तर्ज बिहार में जन आन्दोलन विकसित करने का कार्य योजना बैठक में पेश की गई। जिस पर राज्य उपाध्यक्ष सुरेंद्र नारायण सिंह, सचिव मनोज मिश्रा, निरंजन चौधरी, कोषाध्यक्ष प्रभा शंकर सिंह, राजीव चौधरी, अरविंद सिंह, चंदेश्वर चौधरी, लक्ष्मण चौधरी, राकेश कुमार, रविंद्र यादव, अहमद अली तमन्ने, रामनरेश राय सहित 42 साथियों ने अपना अपना विचार प्रस्तुत किया। सर्वसम्मति से सभी प्रस्ताव पास किया गया। बड़े पैमाने पर संयुक्त किसान आंदोलन बिहार के किसानो के मुद्दे पर तेज करने का सर्वसम्मति से फैसला लिया गया।
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