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मिथिला में जल कृषि के क्षेत्र में अपार संभावनाएं : डॉ. विद्यानाथ झा

मिथिला में जल कृषि के क्षेत्र में अपार संभावनाएं : डॉ. विद्यानाथ झा

मछली, मखाना और सिंघाड़ उत्पादन के क्षेत्र में फिर से आत्मनिर्भर होगा मिथिला
– क्वांटम सूचना विज्ञान के क्षेत्र में समृद्धि की ओर अग्रसर हो रहा भारत : डॉ. गिरीश मिश्र
– ग्लोबल वार्मिंग के कारण बदल रहा है मौसम का मिजाज : डॉ. रत्नेश झा
– रिसर्च करने से पहले ज्ञानी बनने की जरूरत : प्रो. दिलीप कुमार झा
– सीएम साइंस कॉलेज में आयोजित विज्ञान सप्ताह के चौथे दिन खेती की आधुनिक विधि व इसके फायदे से अवगत हुए प्रतिभागी
दरभंगा। मिथिला में जल कृषि के क्षेत्र में अपार संभावनाएं हैं। यहां के मिट्टी और जल खेती के लिए उपयुक्त हैं। बीते कुछ वर्षों में जल खेती के क्षेत्र में कुछ उदासीनता जरूर आई, लेकिन जल्दी मिथिला फिर से मछली, मखाना और सिंघाड़ उत्पादन के क्षेत्र में आत्मनिर्भर बनेगा। उक्त बातें शुक्रवार को भारत सरकार के प्रधान वैज्ञानिक सलाहकार कार्यालय और संस्कृति मंत्रालय के नेतृत्व में विज्ञान प्रसार विभाग की ओर से सीएम साइंस कॉलेज में आयोजित विज्ञान सप्ताह के चौथे दिन ‘मखाना अनुसंधानक दशा व दिशा’ विषय पर अपना विचार रखते हुए प्रसिद्ध वनस्पति वैज्ञानिक डॉ. विद्यानाथ झा ने कही। डॉ. झा ने कहा कि कोरोना काल में चिकत्सकों ने मरीजों को इम्यूनिटी बढ़ाने के लिए मखाना खाने की सलाह दी थी। मखाना मिथिला ही नहीं देश के हिंदुओं के सांस्कृतिक व लोक-व्यवहार से जुड़ा हुआ है। सरकार मखाना का उत्पादन बढ़ाने के लिए देश और विदेश में पहल कर रही है। डॉ. झा ने कहा कि मिथिला का खाना चावल-दाल-सब्जी शरीर के संपूर्ण विकास के लिए बहुत उपयोगी है। वैज्ञानिकों ने भी इसकी महत्ता को स्वीकार किया है।
‘रक्षा तकनीकी एवं अनुसंधान’ विषय पर विचार व्यक्त करते हुए डीआरडीओ के वैज्ञानिक डॉ. गिरीश मिश्र ने क्वांटम सूचना विज्ञान को लेकर विस्तार से चर्चा की। कहा कि आज के युग में क्वांटम सूचना विज्ञान की बहुत बड़ी जरूरत है। सरकार ने इसकी महत्ता को समझते हुए पांच वर्षों के लिए आठ हजार करोड़ रुपये डीआरडीओ को दी है। साथ ही छात्र-छात्राओँ से क्वांटम रिसर्च के क्षेत्र में आने की अपील की। डॉ. मिश्र ने कहा कि सभी देश को खुद समृद्ध होना होगा, इसके लिए सभी देश रिसर्च पर काफी जोर दे रहे हैं। अपने संबोधन में उन्होंने डीआरडीओ की ओर से की गई शोध-उपलब्धियों पर विस्तार से प्रकाश डाला।
‘आधुनिक कृषि तकनीक एवं अनुसंधान’ विषय पर विचार व्यक्त करते हुए डॉ. राजेंद्र प्रसाद केंद्रीय कृषि विश्वविद्यालय, पूसा के कृषि वैज्ञानिक डॉ. रत्नेश कुमार झा ने कहा कि बदलते समय के साय बिहार में बारिश के अनुपात में भारी कमी आई है, जिस कारण मौसम का मिजाज भी प्रभावित हो रहा है। उन्होंने कहा कि इस परिवर्तन के लिए ग्लोबल वार्मिंग भी कम जिम्मेदार नहीं है। इसलिए सभी को ग्लोबरल वार्मिंग बनाये रखने के लिए पहल करने की जरूरत है। अभी भी देश में खेती के क्षेत्र में काफी उत्पादन बढ़ाने की जरूरत है। प्रो. झा ने कहा कि मिथिला के सर्वांगीण विकास के लिए बाढ़ का जल्द से जल्द निदान निकालने की जरूरत है।
‘संस्कृत भाषा की वैज्ञानिकता’ विषय पर विचार व्यक्त करते हुए कामेश्वर सिंह दरभंगा संस्कृत विश्वविद्यालय के प्रो. दिलीप कुमार झा ने कहा कि संस्कृत सभी भाषाओं की जननी है। संस्कृत देवों की वाणी है। अगर, कोई व्यक्ति वैज्ञानिक बनना चाहते हैं तो उसे पहले उस विषय की ज्ञानी बनने की जरूरत है। प्रो. झा ने कहा कि आर्यभट्ट भी वैज्ञानिक बनने से पहले संस्कृतज्ञ ही थे, जिनकी कीर्ति होती हैं, वही लोग दुनिया में अमर होते हैं। संस्कृत भाषा की वैज्ञानिकता से बहुत संबंध है। आजकल सरकार कंप्यूटर उपयोग करने के लिए भीं संस्कृत भाषा पर जोर दे रही है।
इससे पहले विज्ञान सप्ताह महोत्सव के अध्यक्ष प्रो. दिलीप कुमार चौधरी ने सभी अथितिय़ों का स्वागत और आभार व्यक्त किया। वहीं कार्यक्रम के दूसरे सत्र में ग्लोबल वार्मिंग, एड्स, मानव व्यवहार, कैंसर और अन्य क्षेत्र में भारतीय वैज्ञानिकों की भूमिका विषय पर प्रतिभागियों के बीच पोस्टर मैकिंग प्रतियोगिता आयोजित की गई। पोस्टर मैकिंग में महात्मा गांधी शिक्षण संस्थान, मरवाड़ी कॉलेज, सीएम साइंस कॉलेज और एमआरएसएम कॉलेज सहित विभिन्न महाविद्यलयों एवं विद्यालयों के प्रतिभागियों ने पोस्टर मैकिंग प्रतियोगिता में अपनी प्रतिभा का बेहतर प्रदर्शन किया। प्रतियोगिता में सफल हुए प्रतिभागियों को 28 फरवरी को सम्मानित किया जायेगा। साथ ही स्थानीय कलाकारों की ओर से लोगों में विज्ञान के प्रति रुचि व जागरूकता फैलाने के लिए विज्ञान लघु नाटिका का मंचन किया गया, जिसका सभी ने जमकर लुफ्त उठाया। अनमोल सिंह ने प्रतिभागियों को ड्रोन के बारे में जानकारी दी।
विज्ञान एवं प्रौद्योगिकी मन्त्रालय की स्वायत्त संस्थान विज्ञान प्रसार द्वारा संचालित ‘इंडिया साइंस’ चैनल के संपादक मानवर्धन कंठ ने विज्ञान सप्ताह महोत्सव के पांचवे दिन के कार्यक्रम के बारे मं जानकारी देते हुए बताया कि शनिवार को ‘आगामी 25 बरखक लेल विज्ञान आओर प्रौद्योगिकी’, ‘प्राचीन भारतीय वैज्ञानिक (यथा आर्यभट्ट, ब्रह्मगुप्त, नागार्जुन आदि)’, ‘लघु विज्ञान चलचित्र निर्माण कार्यशाला एवं वैज्ञानिक आविष्कार पर आधारित लघु चलचित्र’, ‘नैनो तकनीकी एवं उसके अनुप्रयोग’ आदि विषय पर सेमिनार का आयोजन किया जायेगा। इसके अलावा ‘मॉडल निर्माण प्रतियोगिता’ और ‘विज्ञान लघु नाटिका’ का भी आयोजन होगा। विज्ञान सप्ताह के चौथे दिन के कार्यक्रम का संचालन डॉ. सत्येंद्र कुमार झा और डॉ. नेहा वर्मा ने मिलकर किया। सेमिनार में विज्ञान सप्ताह महोत्सव के संयोजक डॉ. सुजीत कुमार चौधरी, डॉ. दिलीप कुमार झा, डॉ. दिनेश प्रसाद साह, डॉ. कुमार मनीष, डॉ. पांशु प्रतीक, डॉ. आरती कुमारी, डॉ. पूजा अग्रहरि, डॉ. निधि झा, डॉ. रश्मि रेखा, डॉ. अभय सिंह और छात्र-छात्राएं मौजूद थे।

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