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हिन्दी बाल साहित्य शोध संस्थान, बनौली, दरभंगा की ओर से बिहार दिवस सह जल संरक्षण दिवस के अवसर पर विचार सह काव्य गोष्ठी का आयोजन

हिन्दी बाल साहित्य शोध संस्थान, बनौली, दरभंगा की ओर से बिहार दिवस सह जल संरक्षण दिवस के अवसर पर विचार सह काव्य गोष्ठी का आयोजन कवयित्री कुमारी भारती रंजना के आवास, काली मंदिर, शैदनगर में किया गया,जिसकी अध्यक्षता डॉ. सतीश चन्द्र भगत ने किया।

बिचार व्यक्त करते हुए अरूण कुमार वर्मा ने गौरवशाली बिहार है।जहाॅ से सत्य और अहिंसा का महामंत्र विश्व को दिया।यूवा साहित्यकार शिक्षक अनुराग ने कहा कि बिहार एक ऐसा प्रांत है जिसने नालंदा विश्वविद्यालय के माध्यम से शिक्षा का अलख जगाया।लेकिन आज शिक्षा के क्षेत्र में पीछे हो रहा है,जो चिंता का विषय हैहिन्दी बाल साहित्य शोध संस्थान, बनौली, दरभंगा की ओर से बिहार दिवस सह जल संरक्षण दिवस के अवसर पर विचार सह काव्य गोष्ठी का आयोजन कवयित्री कुमारी भारती रंजना के आवास, काली मंदिर, शैदनगर में किया गया,जिसकी अध्यक्षता डॉ. सतीश चन्द्र भगत ने किया।
बिचार व्यक्त करते हुए अरूण कुमार वर्मा ने गौरवशाली बिहार है।जहाॅ से सत्य और अहिंसा का महामंत्र विश्व को दिया।यूवा साहित्यकार शिक्षक अनुराग ने कहा कि बिहार एक ऐसा प्रांत है जिसने नालंदा विश्वविद्यालय के माध्यम से शिक्षा का अलख जगाया।लेकिन आज शिक्षा के क्षेत्र में पीछे हो रहा है,जो चिंता का विषय है। कुमारी भारती कुमारी रंजना ने _ ‘ रेत वक्त का ढलता गुजरता रहा सुनाकर कवि गोष्ठी का शुभारंभ किया।मंजर सिद्दीकी ने काव्य पाठ करते हुए अमन चैन के लिए कविता सुनाया-जीना एक बहाना है,
मरकर सबको जाना है।आशिष अकिंचन की कविता हा मै बिहार हूं।रीतु प्रज्ञा ने- “जल की धारा बोले हमसे ‘ कविता सुनायी।।
बिचार व्यक्त करते हुए अरूण कुमार वर्मा ने गौरवशाली बिहार है।जहाॅ से सत्य और अहिंसा का महामंत्र विश्व को दिया।यूवा साहित्यकार शिक्षक अनुराग ने कहा कि बिहार एक ऐसा प्रांत है जिसने नालंदा विश्वविद्यालय के माध्यम से शिक्षा का अलख जगाया।लेकिन आज शिक्षा के क्षेत्र में पीछे हो रहा है,जो चिंता का विषय है।शेखर कुमार श्रीवास्तव ने कहा कि बिहार की चम्पारण की धरती ने मोहन दास करमचंद गांधी को महात्मा गांधी बनाया। कुमारी भारती कुमारी रंजना ने _ ‘ रेत वक्त का ढलता गुजरता रहा सुनाकर कवि गोष्ठी का शुभारंभ किया।मंजर सिद्दीकी ने काव्य पाठ करते हुए अमन चैन के लिए कविता सुनाया-जीना एक बहाना है,
मरकर सबको जाना है।आशिष अकिंचन की कविता हा मै बिहार हूं।रीतु प्रज्ञा ने- “जल की धारा बोले हमसे ‘ कविता सुनायी।मंजर सिद्दीकी ने काव्य पाठ करते हुए अमन चैन के लिए कविता सुनाया-जीना एक बहाना है,
मरकर सबको जाना है।आशिष अकिंचन की कविता हा मै बिहार हूं।शंभु नारायण चौधरी की अंगिका कविता -‘कोय अपना घरो मे डिबिया, एहनो जराबै, इंजोर ओकरो हमरो घर तक आबै।’सुनाकर लोगो को मंत्रमुग्ध कर दिया।अमिताभ कुमार सिन्हा की कविता-जिस चरण चिंह को ढूंढता रहा अंजान पथ पर, वह मिला अपने घर आंगन को श्रोताओ ने खूब सराहा।मुस्ताक एकवाल भुल जाने की कोशिश बहुत की मगर, सुनाकर लोगो का ध्यान अपनी ओर खींचा।हीरालाल सहनी ने आज के परिप्रेक्ष्य मेंबिहार मे नवजागरण चाहिए, सिर्फ भाषण नही आचरण चाहिए। अध्यक्षता करते कविता सुनाया गौरैया मेरे घर आना।अध्यक्षीय संबोधन के बाद सतीश चन्द्र भगत ने-‘गौरैया मेरे घर आना कविता सुनाया।
संचालन अमिताभ कुमार सिंहा तथा धन्यवाद ज्ञापन अरूण कुमार वर्मा ने किया।

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