इप्टा की ढाई आखर प्रेम की सांस्कृतिक यात्रा दो दिनों के लिए पहुँची दरभंगा
सांस्कृतिक रैली, गीत-संगीत, नाटक,कविता के साथ दिया ढाई आखर प्रेम का संदेश
देश के अलग अलग रंग ही देश की मजबूती-तनवीर

नफरत के खिलाफ आम जनों में मोहब्बत जागृत करने के लिए निकली है यात्रा-राकेश
छत्तीसगढ़ से निकला यात्रा का मेयर ने किया स्वागत
प्रेम,दया,करुणा,बंधुत्व और समता का संदेश लेकर पहुँचा सांस्कृतिक यात्रा
दरभंगा:जनता मुझसे पूछ रही है क्या बतलाऊ,जनकवि हूँ मैं, साफ कहूंगा, क्यों हकलाऊं’
नागार्जुन की धरती पर इसी कविता की शक्ल में इप्टा की सांस्कृतिक यात्रा ने बिहार की सांस्कृतिक राजधानी दरभंगा में दस्तक दी.
आजादी के 75 वें वर्ष में देश के वीर सपूतों को याद करते हुए, सांस्कृतिक चेतना जगाते हुए, प्रेम और सद्भाव का संदेश बांटते हुए भारतीय जन नाट्य संघ ‘इप्टा’ देश-भर में “ढाई आखर प्रेम की सांस्कृतिक यात्रा” निकाल रही है.
यात्रा पड़ाव के 19 वें दिन दरभंगा पहुंची जत्थे का आनन्दपुर चौक पर लोगो ने पुष्प माल्य और तिरंगा हाथ में लेकर भारत माता की जय के नारों के साथ भव्य स्वागत किया.यात्रा दरभंगा में स्वतंत्रता संग्राम के महानायको के स्मारकों पर माल्यार्पण कर श्रद्धांजलि अर्पित करते हुए,भोगेन्द्र झा चौक से ललित नारायण मिथिला विश्वविद्यालय के स्नातकोत्तर संगीत एवं नाट्य विभाग तक सांस्कृतिक रैली निकाली गई.
सांस्कृतिक रैली इप्टा के साथियों द्वारा ढोलक, ढपली वह अन्य वाद्ययंत्रों की गूंज के साथ तिरंगा, पोस्टर, बैनर और इप्टा के झंड मुख्य आकर्षण का केंद्र था.रैली में सामाजिक कार्यकर्ता, लेखक, साहित्यकार व अन्य सुधीजन शामिल हुए.
रैली के बाद संयुक्त तत्वावधान में पीजी संगीत एवं नाट्य विभाग के सभागार में प्रसिद्ध गायक नचारी झा और साहित्यकार आचार्य जानकी बलभ शास्त्री को समर्पित आयोजित मुख्य संस्कृतिक कार्यक्रम का उद्घाटन
दरभंगा शहर की मेयर मुन्नी देवी ने दीप प्रज्वलन के साथ किया.
वही आरम्भ में विभाग के छात्रों ने स्वतंत्रता संग्राम के महानायको को समर्पित गीतों से समा बांधा तो इप्टा के कलाकारों ने ढाई अक्षर प्रेम के…हिंदुस्तान हमारा..
गंग की कसम यमुना की कसम…
फांसी का झूला झूल गया मस्ताना भगत सिंह..गीतों की प्रस्तुति के साथ देश के वर्तमान हालातों पर कटाक्ष करते हुए हास्य नाटक “हंसमुख नवाब” का मंचन किया.दर्शकों ने चुटीले व्यंग्यात्मक संवादों व कलाकारों के उम्दा अभिनय से सजे सामायिक नाटक का आनंद लिया.दर्शक नाटक के आखिर तक अपनी जगहों पर डटे रहे.
कार्यक्रम का उद्घाटन करते हुए महापौर मुन्नी देवी ने कहा कि मिथिला की संस्कृति गौरवशाली रही है कला को विकसित करने के लिए सदैव यहां से प्रयास किया जाता रहा है आज भी हम इसे आगे बढ़ाने के लिए संकल्पित हैं हम आशा करते हैं कि दरभंगा में इप्टा का दो दिवसीय ढाई आखर प्रेम की सांस्कृतिक यात्रा नई ऊंचाइयों को छुएगा.
वही बतौर विशिष्ट अतिथि श्रमजीवी पत्रकार यूनियन के जिला अध्यक्ष अमरेश्वरी चरण सिन्हा ने कहा कि बाबा नागार्जुन कि धरती पर इप्टा का कार्यक्रम सफल और ऐतिहासिक होगा इप्टा ने दरभंगा में बहुत सारे सांस्कृतिक कार्य किए हैं उसको और आगे बढ़ाने की जरूरत है देश में जिस सांस्कृतिक चेतना की जरूरत है वह चेतना एकता ही जागृत कर सकता है हम उम्मीद करते हैं कि यह सास्कृतिक यात्रा सफल होगी और अपने मुकाम को प्राप्त करेगी.
वही विशिष्ट अतिथि के तौर पर समाजिक कार्यकर्ता व मुखिया राजीव कुमार चौधरी व शिक्षाविद उमेश झा ने इप्टा के इतिहास पर प्रकाश डालते हुए कहा कि आजादी से पहले से समाज में चेतना फैलाने का काम इप्टा करती आ रही है जो सराहनीय है ऐसे वक्त में जब प्रेम की परिभाषा बदल रही है इप्टा सांस्कृतिक यात्रा के माध्यम से अपने कर्तव्यों का निर्वाह कर रही है.
वही इप्टा के राज्य महासचिव व बिहार नाट्य अकादमी के पूर्व अध्यक्ष तनवीर अख्तर ने कहा कि कबीर की वाणी ढाई आखर प्रेम से जो प्रेम का बोध होता है वह प्रेम जीवन के सभी क्षेत्रों को प्रभावित करता है हम उसी प्रेम को लेकर देश में जो आज की स्थिति है उसे जागृत करना चाहते हैं और प्रेम के माध्यम से समाज में समरसता भाईचारा का विकास कर एक आधारभूत संरचना तैयार करना चाहते हैं. हमारी जत्था पांच राज्यों से गुजरेगी जिसमें इप्टा से जुड़े और जनवादी विचारधारा के लोगों का सम्मान करते हुए वहां की मिट्टी को संकलित कर रहे हैं. जो देश के राष्ट्रवाद को आगे बढ़ाएगा. आगे उन्होंने कहा कि देश के सत्ता में बैठे लोग इस देश को एक रंग में रंगना चाहते हैं. लेकिन इस देश के हर जगह हर क्रांतिकारी की भूमि अलग-अलग रंगों की है.इस देश को एक रंग में कभी भी रंगा नहीं जा सकता है. देश के अलग-अलग रंग ही देश की मजबूती है.
वही बतौर मुख्यअतिथि के रूप में इप्टा के राष्ट्रीय महासचिव राकेश बेदा ने कहा कि प्रेम जीवन का महत्वपूर्ण अंग है बिना प्रेम सब सुना है इप्टा की यह यात्रा प्रेम पर आधारित है उन्होंने कहा कि इस यात्रा की शुरुआत महान पंडित राहुल सांकृत्यायन की जयंती से और प्रगतिशील लेखक संघ के स्थापना के अवसर पर शुरू की गई जो पूरे देश में प्रेम के की अलख जगाने का काम कर रही है उन्होंने कहा कि देश में जो वर्तमान स्थिति है उसमें अलगाववादी शक्तियों को रोकने के लिए प्रेम को ही जागृत करने की जरूरत है उन्होंने कहा कि इप्टा पूरे देश के साहित्यकारों, शहीदों व क्रांतिकारियों की भूमि की मिट्टियों को एकत्रित करके एक जगह रख उसे ऐतिहासिक शक्ल देने का प्रयास करेगी यह यात्रा आजादी और इप्टा के अमृत महोत्सव के अवसर पर नफरत के खिलाफ आम जनों में मोहब्बत जागृत करने के लिए निकाली गई है.
वही अपने अध्यक्षीय भाषण में ललित नारायण मिथिला विश्वविद्यालय संगीत एवं नाट्य विभाग की प्रभारी अध्यक्ष डाँ० लावण्य कीर्ति सिंह काव्या ने कहा कि ढाई आखर प्रेम संस्कृति यात्रा कला और साहित्य के विकास में सहायक होगी इसके आगे बढ़ने की हम ढेर सारी शुभकामनाएं देते हैं देश में कला और संस्कृति को जीवंत रखने की जरूरत है.
आरम्भ में दरभंगा इप्टा की ओर से शशि मोहन भारद्वाज ने सभी अतिथियों का स्वागत किया जब कि धन्यवाद ज्ञापन डॉ सुधीर कुमार ने किया.जब कि संचालन सागर सिंह ने किया.
इस मौके पर रंगमंच के सुप्रसिद्ध रंगमंचीय कलाकार बैधनाथ कारक को सम्मानित भी किया गया.
इस जत्था में सुप्रसिद्ध रंगकर्मी वेदा राकेश,ग़ालिब खान,मृगेन्द्र,पीयूष सिंह,शाकिब खान,संजय कुमार,अखिल राज ,अमन पांडेय
शिवानी झा,स्वीटी कुमारी
फिरोज आलम,सूरज विराज रिशांक कुमार,सुमन्त कुमार
अक्षत यादव,निपेश कुमार
किसलय राज,आदित्य आनन्द
उपेन्द्र पासवान,संजय साह
अभिषेक कुमार आदि शामिल है. जो साथ गीत ,संगीत,नाटक आदि प्रस्तुत कर रहे है.
इस मौके पर इंद्र भूषण रमण,वेद प्रकाश ,मंजर सुलेमान,हेमेंद्र कुमार लाभ ,विजय कुमार साह,शिवराम पासवान,बरुन कुमार झा,सुजीत कुमार आचार्य,बिट्टू कुमार,आनन्द मोहन,शशि रंजन,मृत्यंजय मृणाल,अरुण कुमार, राजेश कुमार टिंकू ,शरद सिंह,रवि खण्डेलवाल आदि भी मौजूद थे.
वही दूसरे दिन सुरहाचट्टी भोगेन्द्र झा चौराहा और तरौनी में कार्यक्रम होना है.
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