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दरभंगा बाबा नागार्जुन की जन्मस्थली तरौनी गांव में पहुँची सांस्कृतिक यात्रा ‘ढाई आखर प्रेम’

*प्रेम का संदेश लेकर अगले पड़ाव के लिए बढ़ा ढाई आखर प्रेम की सांस्कृतिक यात्रा*

*नए गगन में नया सूर्य जो चमक रहा है यह विशाल भूखंड आज जो दमक रहा है मेरी भी आभा है इसमें*

*जत्था ने प्रस्तुत किये नागार्जुन के दर्जनों कविता*

*बाबा नागार्जुन की जन्मस्थली तरौनी गांव में पहुँची सांस्कृतिक यात्रा ‘ढाई आखर प्रेम’*

*मिट्टीका पात्र में नागार्जुन के आंगन से ली गयी मिट्टी*

*इप्टा लोक चेतना जगावा के लेल सराहनीय काजक रहल अछि*

*सुरहाचट्टी में स्कूली बच्चो के बीच पहुँची सांस्कृतिक जत्था*

दरभंगा :—– कवियों,लेखकों, कलाकारों, शहीदों, सामाजिक कार्यकर्ताओं, स्वतंत्रता सेनानियों को खोजते, याद करते-नमन करते, संस्कृति और प्रेम का राग छेड़ते हुए भारतीय जन नाट्य संघ ‘इप्टा’ देश-भर में आजादी के 75 वे वर्ष पर “ढाई आखर प्रेम की सांस्कृतिक यात्रा” निकाल रहा है. महापंडित राहुल सांकृत्यायन के जन्मदिन 9 अप्रैल को रायपुर से शुरू हुई यह सांस्कृतिक यात्रा छत्तीसगढ़, झारखण्ड से होते हुए बिहार में नवादा से प्रवेश करते हुए प्रगतिशील जनकवि बैधनाथ मिश्र “यात्री ” उर्फ बाबा नागार्जुन की जन्मस्थली दरभंगा जिले के तरौनी गांव पहुंची.

इप्टा के राष्ट्रीय महासचिव राकेश वेदा ने बाबा नागार्जुन से जुड़े कई संस्मरण की चर्चा करते हुए कहा कि लखनऊ में कई बार युवावस्था में बाबा नागार्जुन को सुनने का अवसर मिला,सानिध्य प्राप्त हुआ. उन्होंने कहा कि बाबा नागार्जुन ने नेहरू से सवाल किया, इन्दिरा से सवाल और इमरजेंसी के बाद वाली सत्ता से भी सवाल किया.हम लोग उन्हीं की परंपरा के हैं. जनपक्षधर कवि बाबा नागार्जुन को नमन करते हुए हम इप्टा की तरफ से सलाम पेश करते हैं.
इस मौके पर राष्ट्रीय स्तर की ख्यातिप्राप्त रंगकर्मी वेदा राकेश ने बाबा नागार्जुन की कविता को गाकर सुनाया.नए गगन में नया सूर्य जो चमक रहा है,यह विशाल भूखंड आज जो दमक रहा है,
मेरी भी आभा है इसमें …
इप्टा की ओर से अक्षत निराला ने नाटकीय अंदाज में नागार्जुन की कविता ‘बांकी बच गया अंडा’ पढ़ी.साथी किसलय ने रैप के अंदाज में “किसकी है जनवरी-किसका अगस्त है” कविता पढ़ी. संजय, सूरज और रिशान ने बाबा नागार्जुन की कविता “प्रेत का बयान” का नाट्य रूपांतरण प्रस्तुत किया.बाबा नागार्जुन के नाम पर बनी लाइब्रेरी और उनकी यादों को संजोए भवन के प्रांगण में विराजमान बाबा की मूर्ति पर माल्यार्पण किया गया और फिर वहीं आम के बगीचे कार्यक्रम संपन्न हुआ.इस मौके पर बाबा के छोटे पुत्र श्यामाकांत मिश्रा को प्रतीक चिन्ह देकर सम्मानित भी किया गया.इस मौके उन्होंने कहा कि काफी लंबे अरसे के बाद कोई सांस्कृतिक जत्था प्रेम की पाठ समझाने छोटे से गाँव तरौनी पहुँची है जिसके लिए इस पूरे जत्थे का हम आभारी है वही
बाबा नागार्जुन के घर के आंगन से उनके बेटे श्यामानंद मिश्रा के हाथों मिट्टिका पात्र में मिट्टी संग्रहित की गई.इसके बाद जत्था अपने अगले पड़ाव के लिए रवाना हो गया.वही बिहार इप्टा के महासचिव तनवीर अख्तर ने यात्रा के उद्देश्य को लेकर बात रखते हुए, पात्र में देश के सपूतों के नाम पर इकट्ठी की जा रही मिट्टी के महत्व पर प्रकाश डालते हुए एकता और भाईचारे और प्रेम को बनाए रखने की बात कही
तरौनी में जत्थे का आभार व्यक्त करते हुए स्थानीय नागरिकों ने मैथिली भाषा में कहा कि इप्टा लोक चेतना जगावा के लेल निक काज क रहल अछि.जीवन में प्रेम क बिना सब बेकार ऐछ कविरो कहने छैथ बढ़े जो पण्डित होय. यहां पर यात्रा का स्वागत लक्ष्मण झा ने किया जबकि लेखनाथ मिश्र ने धन्यवाद ज्ञापन किया और संचालन देवेंद्र मण्डल ने किया.वही ग्रामीणों की ओर से अजित कामती,कमर झा,हीरा लाल मण्डल अशोक झा ने विचार रखा.
इससे पहले इप्टा की ‘ढाई आखर प्रेम’ की सांस्कृतिक यात्रा की दूसरे दिन की शुरुआत बाल भारती पब्लिक स्कूल, सुरहाचट्टी में छात्र-छात्राओं व शिक्षक-शिक्षिकाओं के बीच जनगीतों की प्रस्तुति व नाटक के साथ हुई .इप्टा के साथियों ने ‘ ढाई आखर प्रेम के पढ़ने और पढ़ाने आये हैं’, ‘हिंदुस्तान हमारा’ गीत प्रस्तुत किया.एकल अभिनय पर आधारित ‘भारत माता कौन’ नाटक प्रस्तुत कर अमन पांडे ने बच्चों को बताया कि भारत माता के मायने क्या हैं. फिरोज आलम ने सफदर हाशमी की कविता ‘ किताबें करती हैं बातें’ बच्चों के साथ गाकर प्रस्तुत किया.
साथी सूरज, संजय और रिशान ने बाबा नागार्जुन की कविता पर आधारित “प्रेत का बयान” नाटक प्रस्तुत किया.वही यात्रा के साथ चल रहे ग़ालिब साहब ने बच्चों के साथ संवाद कायम करते हुए प्रेम और भाईचारे का पाठ पढ़ाते हुए सांस्कृतिक यात्रा के बारे में जानकारी दी.इप्टा की सांस्कृतिक यात्रा ‘ढाई आखर प्रेम’ में शामिल संस्कृतिकर्मियों ने दरभंगा के लालबाग स्थित भोगेन्द्र झा चौराहा में स्थापित स्वतंत्रता सेनानी, किसान नेता व सांसद भोगेन्द्र झा की प्रतिमा पर माल्यार्पण किया और प्रेम, सद्भाव व बंधुता का संदेश गीत के माध्यम से दिया.यात्रा का नेतृत्व दरभंगा इप्टा की ओर से शशि मोहन मोहन भारद्वाज व वरुण कुमार झा कर रहे थे.तरौनी में अगले पड़ाव के लिए मधुबनी इप्टा के इंद्रभूषण रमण और श्री प्रकाश को सौपा गया |

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