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प्रोफेसर हरिश्चंद्र सहनी का निधन।

प्रोफेसर हरिश्चंद्र सहनी का निधन।

सीएम आर्ट कॉलेज के सेवानिवृत्त प्रोफेसर डॉक्टर हरिश्चंद्र सहनी का निधन सुंदरपुर स्थित आवास पर हो गया। वह अपने पीछे 2 पुत्र और तीन पुत्रियों को छोड़ गए। उनके द्वारा कई पुस्तकें लिखी गई, जो कि समाज को एक नए दिशा निर्देश के रूप में काम आएगी। उन्हें द्वितीय विश्व दलित साहित्यकार सम्मेलन में ताम्रपत्र से सम्मानित किया गया। उन्हें यह सम्मान आस्टन विश्वविद्यालय, यू के लंदन के द्वारा दिया गया। इनके निधन से सहनी समाज को बड़ी क्षति हुई है, जिससे समस्त मिथिलांचल के सहनी समाज में दुख का माहौल बना हुआ है। उनका अंतिम संस्कार बागमती नदी किनारे सती स्थान में किया गया।

प्रोफेसर हरिश्चंद्र सहनी राजनीति विज्ञान के प्रोफ़ेसर थे।
उनके द्वारा लिखित पुस्तकें

1, भारत के रतन ,बिहार के मोती
2, दलित साहित्य के चार स्तम्ब
3, पॉलिटिक्स ऑफ फरक्का बैराज
4, जीके, सुई से लेकर हवाई जहाज तक
5, अंधविश्वास एवं शोषण
6, मेरे सपने एवं संकल्प
7, स्वामी विवेकानंद जी का ऐतिहासिक भाषण
8, सिंधु घाटी की सभ्यता के निर्माता निषाद परिवार

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