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काँ० भोगेन्द्र झा की 100 वीं पर जयंती सीपीआई कार्यकर्ताओं ने किया माल्यार्पण लिया संकल्प

काँ० भोगेन्द्र झा की 100 वीं पर जयंती सीपीआई कार्यकर्ताओं ने किया माल्यार्पण लिया संकल्प

सर्वहारा के मसीहा थें कामरेड भोगेन्द्र झा:-सीपीआई

दरभंगा भारतीय कम्युनिस्ट पार्टी के संस्थापक सदस्य, पूर्व स्वतंत्रता सेनानी, सर्वहारा के मसीहा, युगपुरुष, मैथिली के लिए अपना सर्वस्व न्योछावर करने वाले, दरभंगा बड़ी रेलवे लाइन, आकाशवाणी, मिथिला विश्वविद्यालय को अपने संघर्ष के दम पर स्थापित करने वाले नेता कामरेड भोगेन्द्र झा की 100वीं जयंती सीपीआई कार्यकर्ताओं ने बड़े उत्साह के साथ मनाया।

आज प्रातः अजय भवन से कार्यकर्ता कामरेड भोगेंद्र झा अमर रहे, भोगेंद्र झा के अरमानों को मंजिल तक पहुंचाऐगे, जब तक सूरज चांद रहेगा कामरेड भोगेंद्र झा का नाम रहेगा, आदि गगनचुंबी नारों के साथ कामरेड भोगेंद्र झा के स्मारक स्थल पर पहुंचा जहां कार्यकर्ताओं ने उनके स्मारक पर माल्यार्पण कर उन्हें श्रद्धांजलि देते हुए अपना श्रद्धा सुमन अर्पित किया। वही कार्यकर्ताओं का जत्था पार्टी कार्यालय पहुंचकर उनके तैल्य चित्र पर पुष्पांजलि कि व श्रद्धांजलि सह संकल्प सभा का आयोजन किया। जहां सीपीआई के कार्यकारिणी सदस्य किसान सभा के जिला अध्यक्ष राजीव कुमार चौधरी ने कहा कि कामरेड भोगेंद्र झा मिथिला में पार्टी के संस्थापक सदस्यों में से एक थे। वे छात्र जीवन में पार्टी की छात्र इकाई ऑल इंडिया स्टूडेंट्स फेडरेशन के साथ जुड़े व आजादी के आंदोलन में छात्र नौजवानों को गोल बंद करके अंग्रेजो के खिलाफ अपना जुझारू आंदोलन किए थे। मधुबनी के वाटसन स्कूल में पढ़ते समय उन्होंने उस समय के स्वतंत्रता मनीषियों के संपर्क में आए। महात्मा गांधी, राजेंद्र प्रसाद, पंडित जवाहरलाल नेहरू, सुभाष चंद्र बोस, चंद्रशेखर आजाद आदि से वे काफी प्रभावित थे। वही उनका मानना था कि सुभाष चंद्र बोस के रास्ते पर जाकर ही देश को आजादी मिलेगी। इसीलिए उन्होंने गरम दल के स्वतंत्रता सेनानियों के संपर्क में ज्यादा रहते थे। आजादी के आंदोलन के दौरान कम्युनिस्ट पार्टी के नेताओं से प्रभावित होकर देश आजादी के उपरांत सबके लिए शिक्षा, स्वास्थ्य, रोजगार, रोटी और मकान का प्रबंध हो, देश में कोई भी भूखा ना रहे ना ही दवा के बिना किसी की मौत हो। इसके लिए जीवनोउपरांत संघर्ष करते रहे। वे मधुबनी लोकसभा क्षेत्र से कई बार सांसद चुने गए। वे संसद के अंदर भी अपने जुझारू पन से कई जन कल्याणकारी योजनाओं को लागू करवाया। मैथिली भाषा को अष्टम अनुसूचित में डालने के लिए उन्होंने काफी संघर्ष किया उनके आंदोलन के दबाव में ही तत्कालीन प्रधानमंत्री ने मैथिली को अष्टम अनुसूची में डाला। वही सभा को संबोधित करते हुए पार्टी के जिला कार्यकारिणी सदस्य शरद कुमार सिंह ने कहा कि पूरे वर्ष पार्टी जन्मशताब्दी समारोह मनाऐगी। बाढ़-सुखाड़ के स्थायी निदान हेतू करेगी आन्दोलन। कई बार सांसद रहने के बाद भी सादा जीवन उच्च विचार के सिद्धांतों पर कामरेड भोगेन्द्र झा अपना जीवन व्यतीत किये। दरभंगा में कई बड़े संस्थानों की स्थापना उन्होंने अपने संघर्षों के बल पर करवाया। जिसका जीता जागता उदाहरण ललित नारायण मिथिला विश्वविद्यालय, दरभंगा आकाशवाणी, समस्तीपुर-दरभंगा बड़ी रेलवे लाइन आदि है। उन्होंने मिथिला के बाढ़ सुखाड़ का स्थाई निदान हेतु कई पुस्तकें लिखे और आन्दोलन किए। वही संसद में भी उत्तर बिहार को बाढ़ सुखाड़ से स्थाई निदान दिलाने हेतु हाय डैम के निर्माण की रूपरेखा पेस किया। उनके बताए हुए रास्ते पर अभी भी सरकार अगर कार्य करें तो उत्तर बिहार को बाढ़ सुखाड़ के अभिशाप से बचाया जा सकता है। उनकी प्रेम मैथिली भाषा से ऐसी थी कि उन्होंने प्रथम बार संसद के अंदर मैथिली भाषा में शपथ लिया। वही कार्यवाही में भी मैथिली भाषा को शामिल करने के लिए संघर्ष किया। पार्टी के कार्यकर्ताओं ने उनके अरमानों को मंजिल पर पहुंचाने का संकल्प लिया और वर्तमान फासीवादी सरकार को सत्ता से उखाड़ने के लिए भी संकल्प लिया।
मौके पर श्रद्धांजलि सभा को अखिलेश कुमार चौधरी, सुरेन्द्र नारायण मिश्र, पवन चौधरी, डा० सुमन कुमार झा, प्रसनजीत प्रभाकर, मृत्युंजय मृनाल, गौतम कांत चौधरी, शंकर यादव, प्रशांत कुमार, आदित्य कुमार, अभिषेक कुमार, आदि ने संबोधित किया।

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