लनाविवि के कुलपति का विद्यापति सेवा संस्थान ने किया भव्य अभिनंदन
कार्यकाल के लगातार दूसरे सफल वर्ष के उपलक्ष्य में हुआ आयोजन

धन को इकट्ठा करना सहज है, लेकिन ज्ञान से अर्जित संस्कारों को एकत्रित कर प्रगति का मार्ग अख्तियार करना काफी कठिन है। धन को तो लूटकर सहज ही धनवान बना जा सकता है, लेकिन संस्कारों के लिए समर्पित होना पड़ता है। अच्छे संस्कार सफल जीवन के लिए अति आवश्यक हैं। मिथिला सदियों से ज्ञान व संस्कार की उत्तम भूमि रही है। मेरा सौभाग्य है कि मिथिला की ज्ञानवान संस्कृति में कार्य करते हुए विगत दो वर्षों में मुझे मिथिला के इस गौरवशाली विश्वविद्यालय के चतुर्दिक विकास के लिए कार्य करने में काफी सहूलियत हुई है और इसका नतीजा है कि इन वर्षों में विश्वविद्यालय ने सफलता के अनेक मुकाम अत्यंत ही सहजता के साथ हासिल किए हैं। उक्त बातें ललित नारायण मिथिला विश्वविद्यालय के कुलपति प्रो सुरेंद्र प्रताप सिंह ने बुधवार को विद्यापति सेवा संस्थान के तत्वावधान में उनके आवासीय परिसर में आयोजित अभिनंदन समारोह में कही। उन्होंने कहा कि जरूरत के अनुसार अनेक बार विश्वविद्यालय की कार्य संस्कृति में यथासंभव बदलाव भी किए गए, जिसमें सबका पूरा सहयोग व समर्थन मिलने का सुखद परिणाम सभी को स्पष्ट दिख रहे हैं। उन्होंने सभी शुभचिंतकों के प्रति आभार व्यक्त करते हुए कहा कि यह मेरा सौभाग्य है कि यहां के अच्छे लोगों की मदद से वे विश्वविद्यालय हित में सकारात्मक बदलाव लाने में सफल हो रहे हैं।
मौके पर कुलपति का अभिनंदन करते हुए विद्यापति सेवा संस्थान के महासचिव डॉ बैद्यनाथ चौधरी बैजू ने उनके कार्यकाल के शुरुआती दो वर्षों को मिथिला विश्वविद्यालय के लिए अभूतपूर्व करार देते हुए कहा कि अपनी कार्यशैली से विश्वविद्यालय के छात्रों, शिक्षकों एवं कर्मचारियों के साथ-साथ आम मिथिलावासी के दिलों में बनी उनकी खास पहचान इसका स्वत: प्रमाण है। सीएम साइंस कॉलेज के प्रधानाचार्य प्रो दिलीप कुमार चौधरी ने उत्तम प्रशासक, उत्कृष्ट शिक्षाविद एवं व्यवहार कुशल कुलपति के रूप में उनके कार्यकाल की उपलब्धियों की विस्तार से चर्चा करते हुए कार्यकाल के अगले वर्ष की उद्देश्य पूर्ण सफलता की शुभकामनाएं दी।
मैथिली अकादमी के पूर्व अध्यक्ष पं कमलाकांत झा ने कुलपति के कार्यकाल की एक जोड़ी वर्ष की प्रशंसा करते हुए सूबे के सर्वश्रेष्ठ कुलपति के अवार्ड से नवाजे गए प्रो सुरेंद्र प्रताप सिंह के कार्यकाल को पांच वर्ष किए जाने का प्रस्ताव रखा। जिसका उपस्थित लोगों ने ध्वनिमत से समर्थन किया। वरिष्ठ साहित्यकार मणिकांत झा ने स्वरचित कविता के माध्यम से उनके कार्यकाल की उपलब्धियों को विश्वविद्यालय के इतिहास में स्वर्ण अक्षरों में लिखे जाने का भाव रखा। प्रो अजीत कुमार सिंह ने कुलपति के प्रशासकीय क्षमता की सराहना करते हुए उनके द्वारा स्थापित कार्य संस्कृति एवं अनुशासन व्यवस्था की जमकर तारीफ की।
डॉ अमरकांत कुमर के वेद मंत्रोच्चारण से शुरू हुए अभिनंदन समारोह में मैथिली मंच की स्थापित कलाकार डॉ ममता ठाकुर एवं डॉ सुषमा झा ने विद्यापति रचित गोसाउनि गीत एवं स्वागत गान प्रस्तुत किया। समारोह के दौरान कुलपति का मिथिला की गौरवशाली परंपरा अनुरूप मिथिला पेंटिंग युक्त पाग एवं चादर के साथ-साथ फूलों व मखाना की माला से भव्य स्वागत किया गया। संस्थान की ओर से प्रो प्रभाकर पाठक द्वारा रचित अभिनंदन पत्र का वाचन मित्रनाथ झा ने किया।
धन्यवाद ज्ञापन करते हुए संस्थान के मीडिया संयोजक प्रवीण कुमार झा ने कुलपति को संस्कार व संस्कृति का समुन्नत संवाहक बताते हुए अपनी उत्कृष्ट कार्यशैली से मिथिला विश्वविद्यालय को सफलता के शिखर तक पहुंचाने के लिए समस्त मिथिलावासी की ओर से उनके प्रति आभार व्यक्त किया। मौके पर डॉ आर एन चौरसिया, डॉ रमेश झा, डॉ शंभू कुमार यादव, डॉ उदय कांत मिश्र, उदयशंकर मिश्र, विनोद कुमार झा, डॉ गणेश कांत झा, दुर्गानंद झा, प्रो चंद्रशेखर झा बूढ़ाभाई, नवल किशोर झा, आशीष चौधरी आदि ने भी अपने विचार रखे।
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