स्वास्थ्य विभाग के कार्यों की हुई समीक्षा
दरभंगा, समाहरणालय अवस्थित बाबा साहेब डॉ. भीमराव अम्बेदकर सभागार में जिलाधिकारी, दरभंगा राजीव रौशन की अध्यक्षता में जिला स्वास्थ्य समिति की मासिक बैठक आयोजित की गयी।

बैठक में पावर प्वाइंट प्रस्तुतीकरण के माध्यम से केयर के जिला समन्वयक डॉ. श्रद्धा झा ने आकांक्षी जिला से बाहर निकलने के लिए निर्धारित 09 संकेतकों की उपलब्धि से अवगत कराया।
उन्होंने कहा कि प्रसव पूर्व 4 जाँच में दरभंगा जिला राष्ट्रीय औसत से भी आगे निकल गया है। कुशेश्वरस्थान, बहेड़ी, किरतपुर एवं बहादुरपुर प्रखण्ड की प्रगति 80 प्रतिशत से नीचे पाई गई। इस पर वहाँ के प्रखण्ड स्वास्थ्य प्रबंधन से कारणपृच्छा का निर्देश जिलाधिकारी द्वारा दिया गया।
प्रसव पूर्व पंजीकरण में हायाघाट एवं अलीनगर को ध्यान देने का निर्देश दिया गया। गर्भवती महिला का हिमोग्लोबिन की जाँच में बेनीपुर एवं बहादुरपुर सबसे नीचे रहें, आई.एफ.ए. का 180 टैबलेट के वितरण में भी जिले की प्रगति राज्य औसत से अधिक रही। स्थागत प्रसव में भी जिला के उपलब्धि राज्य औसत से अधिक रही।
समीक्षा के दौरान बताया गया कि कुछ आशा कार्यकर्ता अच्छा काम नहीं कर रही है, जिलाधिकारी द्वारा उन्हें चयनमुक्त करने का निर्देश दिया गया। उन्होंने कहा कि अगर वहाँ की कोई अन्य महिला संस्थागत प्रसव के लिए मरीजों को लाती है और उनकी प्रगति 6 माह तक अच्छी पाई जाती है, तो उसे आशा के रूप में रखा जा सकता है।
दक्ष नर्स की देखभाल में घर पर प्रसव की उपलब्धि में जिले का प्रतिशत 92 रहा, जो राज्य औसत से अधिक है। घर में जन्में नवजात शिशु का 42 दिनों तक देखभाल करने तथा पूर्ण टीकाकरण में जिले की उपलब्धि शत-प्रतिशत रही।
कार्यक्रम के दौरान प्राथमिक स्वास्थ्य केन्द्र, सदर की ए.एन.एम. शबरून खातुन को जिलाधिकारी द्वारा शील्ड व पेंटिंग देकर और शॉल भेंट कर सम्मानित किया गया।
उल्लेखनीय है कि महामहिम राष्ट्रपति द्वारा शबरून खातुन को कोविड-19 एवं पूर्ण टीकाकरण कार्य में उत्कृष्ट प्रदर्शन के लिए राष्ट्रीय स्तर पर नेशनल फ्लोरेंस नाइटेंगल पुरस्कार से नवाजा गया है।
बैठक में एन.सी.डी.ओ. ने बताया कि जिले में टी.भी. के सारे जाँच निःशुल्क किये जाते हैं तथा रोगियों का मुफ्त ईलाज किया जाता है, उन्हें 500 रूपये का प्रोत्साहन राशि भी प्रदान किया जाता है। प्रोत्साहन राशि प्रदान करने में दरभंगा जिला बिहार में दूसरे नम्बर पर है।
टीकाकरण की समीक्षा के दौरान जिलाधिकारी ने कहा कि प्रत्येक शनिवार के 02ः00 बजे प्रभारी चिकित्सा पदाधिकारी एवं बाल विकास परियोजना पदाधिकारी बैठक करेंगे तथा टीकाकरण में समन्वय स्थापित कर कार्य करेंगे।
बैठक में अंतरा, आई.यू.सी.डी., ओ.पी.डी., आई.पी.डी., कोविड-19 का द्वितीय डोज की भी समीक्षा की गयी।
आशा कार्यकर्ता के 494 रिक्त पद को 30 जनवरी 2023 तक भरने का सख्त निर्देश दिया गया।
बैठक में जिला प्रोग्राम पदाधिकारी डॉ. रश्मि वर्मा ने बताया कि कन्या के जन्म होने के तुरंत बाद 02 हजार रूपये उसके अभिभावक के बैंक खाता में डाला जाता है, लेकिन इसके लिए जन्म प्रमाण-पत्र की जरूरत होती है और कन्या का आधार कार्ड बन जाने पर 01 हजार रूपये पुनः प्रदान किया जाता है। पूर्ण टीकाकरण के उपरान्त भी राशि प्रदान की जाती है। जिलाधिकारी ने इसका व्यापक प्रचार-प्रसार जन सम्पर्क विभाग के माध्यम से कराने के निर्देश दिए।
वंडर एप की समीक्षा में बताया गया कि वंडर एप के तहत कार्य में प्रगति हुई है, सभी चिकित्सा प्रभारी द्वारा गर्भवती माँ का विस्तृत विवरण एप पर डाला जा रहा है। बिरौल और कुशेश्वरस्थान में काफी अच्छे रेफरल स्लीप बनाए है। अक्टूबर माह में 96 प्रतिशत एवं नवम्बर माह में 90 प्रतिशत मामले वंडर एप के माध्यम से रेफर किये गये हैं।
विश्व स्वास्थ्य संगठन के वरिष्ठ चिकित्सा पदाधिकारी ने मिजिल्स और रूबेला से बचने के लिए 01 जनवरी 2023 से एम.आर.- वन का टीका लेने वाले सभी बच्चों को एफ.आई.पी.बी. का टीका लगवाने का सरकार द्वारा जारी निर्देश से अवगत कराया।
उक्त बैठक में सिविल सर्जन डॉ. अनिल कुमार, जिला प्रतिरक्षण पदाधिकारी डॉ. अमरेन्द्र कुमार मिश्र, उप निदेशक, जन सम्पर्क नागेन्द्र कुमार गुप्ता एवं अन्य संबंधित पदाधिकारीगण उपस्थित थे।
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