जिला प्रशासन की तत्परता एवं बचपन बचाओ आंदोलन के पहल से बाल विवाह रुका

सीतामढ़ी (बिहार): सीतामढ़ी जिला के बथनाहा थाना क्षेत्र के किशनपुर गांव में जिला प्रशासन की तत्परता एवं बचपन बचाओ आंदोलन की पहल से एक लड़के का बाल विवाह होने से रोक दिया गया. वही लड़के के पिता से बॉन्ड पेपर बनाकर उस पर हस्ताक्षर भी करवाया गया। साथ ही प्रशासन ने चेतावनी दी कि आइंदा इस तरह की शिकायत मिलेगी तो सख्त से सख्त कार्रवाई की जाएगी। बचपन बचाओ आंदोलन की टीम को गठित बाल संरक्षण समिति के द्वारा बाल विवाह की सूचना मिली थी जिसके बाद अनुमंडलीय पदाधिकारी सह बाल विवाह निषेध अधिकारी सीतामढ़ी सदर के निर्देश पर प्रखंड विकास पदाधिकारी , बथनाहा अजीत कुमार प्रसाद, अंचलाधिकारी, बचपन बचाओ आंदोलन के सहायक परियोजना अधिकारी मुकुंद कुमार चौधरी, बथनाहा थाना की पुलिस ने गाँव जाकर बाल विवाह रुकवाया। मौके पर पंचायत के मुखिया, वार्ड सदस्य, बाल संरक्षण समिति के सदस्य आदि मौजूद थे।
*जिला प्रशासन एवं बचपन बचाओ आंदोलन के द्वारा किए जा रहे पहल पर बाल विवाह जैसी कुरीतियों के खिलाफ लोग हुए जागरूक*
गौरतलब है कि प्रखंड विकास पदाधिकारी अजीत कुमार प्रसाद व बचपन बचाओ आंदोलन की टीम के पहल का असर अब जमीन पर दिखने लगा है बताया गया की गांव में नियमित वार्ड स्तरीय बाल संरक्षण समिति की बैठक, बाल श्रम एवं बाल विवाह जैसी कुरीतियों के खिलाफ जन जागरूकता का ही असर है की ग्रामीण अब बाल विवाह जैसी कुरीतियों के खिलाफ आगे आ रहे हैं, विदित हो कि बचपन बचाओ आंदोलन एवं प्रशासन के पहल पर गांव के दो बच्चों को बाल श्रम से विमुक्त करवाया गया था जिसके उपरांत किशनपुर को बाल श्रम व बाल विवाह मुक्त गांव बनाने हेतु पहल की जा रही है इसी का असर है कि लोग बाल विवाह जैसी कुरीतियों के खिलाफ आगे आ रहे हैं।
बाल विवाह, बचपन खत्म कर देता है।
बाल विवाह, बचपन खत्म कर देता है। बाल विवाह बच्चों की शिक्षा, स्वास्थ्य और संरक्षण पर नकारात्मक प्रभाव डालता है। बाल विवाह का सीधा असर न केवल लड़कियों पर, बल्कि उनके परिवार और समुदाय पर भी होता हैं। उन्होंने कहा कि बाल विवाह निषेध अधिनियम के अंतर्गत आर्थिक दंड के साथ कारावास की सजा का भी प्रावधान है – *अजीत कुमार प्रसाद ( प्रखंड विकास पदाधिकारी सह सहायक बाल विवाह निषेध अधिकारी बथनाहा)*
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