प्रदेश स्तर पर सुविख्यात रहा है सीएम साइंस कॉलेज का गौरवशाली इतिहास : कुलपति
सीएम साइंस कॉलेज ने मनाया 85वां स्थापना दिवस

विज्ञान शिक्षा के क्षेत्र में प्रदेश स्तर पर सुविख्यात सीएम साइंस कॉलेज का अपना गौरवशाली इतिहास रहा है। इसने अपनी स्थापना काल से ही संस्कृति और संस्कार का पाठ पढ़ाते हुए विज्ञान विषय की उत्कृष्ट शिक्षा का जो कीर्तिमान स्थापित किया है, उसका आज भी जीवंत होना गौरवपूर्ण उपलब्धि है। यह बात कामेश्वर सिंह दरभंगा संस्कृत विश्वविद्यालय के कुलपति प्रो शशिनाथ झा ने शनिवार को सीएम साइंस कॉलेज की स्थापना के 85 वीं वर्षगांठ पर आयोजित समारोह का शुभारंभ करते हुए कही। उन्होंने कहा कि गुणवत्ता एवं प्रतिस्पर्धा के वर्तमान युग में भी इस महाविद्यालय द्वारा नैक मूल्यांकन के दूसरे चरण में ए ग्रेड हासिल करना महाविद्यालय परिवार में आज भी मौजूद कर्तव्यनिष्ठा के भाव को दर्शाता है। उन्होंने कहा कि आज का जमाना विज्ञान का है। इसलिए विज्ञान विषय के शैक्षणिक संस्थानों की जवाबदेही काफी बढ़ गई है। उन्होंने अपने संबोधन में नीतिशास्त्र के अनुपालन के साथ विज्ञान शिक्षा को विकसित करने पर बल दिया।
बतौर मुख्य अतिथि ललित नारायण मिथिला विश्वविद्यालय की प्रति कुलपति डॉ डॉली सिन्हा ने कहा कि गौरवपूर्ण इतिहास के साथ वर्तमान की प्रगति खास मायने रखती है। उन्होंने सीएम साइंस कॉलेज द्वारा तीसरे चरण के नैक मूल्यांकन के लिए आइआइक्यूए जमा करने पर बधाई देते हुए इस चरण के नैक मूल्यांकन में भी महाविद्यालय द्वारा एक ग्रेड प्राप्त करने की शुभकामनाएं दी। उन्होंने अपने संबोधन में मौजूदा समय की जरूरत के हिसाब से महाविद्यालय में स्टार्टअप के जरिए नई शुरुआत करने की सलाह दी। उन्होंने कहा कि अनुसंधान एवं प्रयोग की परंपरा को जागृत करना मौजूदा समय की मांग है। इसमें छात्रों की भूमिका महत्वपूर्ण है। लेकिन इसके लिए क्लास रूम टीचिंग के प्रति छात्रों को जागरूक होना होगा।
बतौर विशिष्ट अतिथि बेनीपुर के विधायक प्रो विनय कुमार चौधरी ने अपने संबोधन में सीएम साइंस कॉलेज में नामांकन लेने वाले छात्रों की कक्षाओं में असंतोषजनक उपस्थिति पर आपत्ति जताते हुए कहा की प्रदेश के नंबर वन साइंस कॉलेज में नामांकन लेकर कक्षाओं में अपनी उपस्थिति दर्ज नहीं किया जाना चिंताजनक है। अपने संबोधन में उन्होंने बताया कि सरकार के समक्ष उन्होंने पाठ योजना लागू किए जाने का प्रस्ताव रखा है। जिसके लागू होने से शैक्षणिक गुणवत्ता में सुधार आना निश्चित है।
महाविद्यालय के रसायन शास्त्र विभाग के सेवानिवृत्त अध्यक्ष डॉ लाल मोहन झा ने महाविद्यालय से जुड़ी अपनी पुरानी यादों को साझा करते हुए कहा कि उन्होंने न सिर्फ जीवन का अपना बेहतरीन समय यहां गुजारा बल्कि, यहां अपनी सेवा देते हुए उनमें आत्मसम्मान और अभिमान की जो भावना जागृत हुई, वह आज भी उनके लिए संबल बना हुआ है। आत्मसम्मान का भाव आज भी उन्हें बेहतर इंसान बना रहा है। उन्होंने महाविद्यालय के समय प्रबंधन एवं स्वअनुशासन के परंपरा की चर्चा करते हुए कहा की कोचिंग संस्थान कभी भी शुरुआती दौर की व्यवस्था नहीं हो सकते। वह कभी भी समग्र विकास की बात नहीं करते हुए सिर्फ मेघा को निखारने का काम करते हैं। इसलिए उनके भरोसे हम अधिक आगे नहीं जा सकते। उन्होंने कहा कि किसी भी छात्र के समग्र विकास के लिए क्लासरूम टीचिंग महत्वपूर्ण है।
ललित नारायण मिथिला विश्वविद्यालय के पूर्व कुलसचिव एवं महाविद्यालय के सेवानिवृत्त वनस्पति विज्ञान विभागाध्यक्ष डॉ नरेश कुमार झा ने एक छात्र एवं शिक्षक के रूप में महाविद्यालय में बिताए अतीत के सुनहरे पन्नों को याद करते हुए कहा कि जब वह प्रथम वर्ष के छात्र के रूप में यहां पढ़ रहे थे, तब भी ट्यूटोरियल क्लासेस यहां होते थे। उन्होंने अनेक काबिल शिक्षकों द्वारा इस महाविद्यालय में कायम गरिमा की चर्चा करते हुए कहा कि सीएम साइंस कॉलेज की गरिमा वहां स्थापित है, जहां से परंपराओं की शुरुआत होती है। उन्होंने शैक्षणिक विकास के साथ गौरवशाली धरोहर के संरक्षण की आवश्यकता पर भी जोर देते हुए सभी से साथ मिलकर आगे बढ़ने का आह्वान किया।
इससे पहले आगत अतिथियों का स्वागत करते हुए महाविद्यालय के प्रधानाचार्य प्रो दिलीप कुमार चौधरी ने महाविद्यालय की गौरवशाली शैक्षणिक उपलब्धियों की चर्चा करते हुए इसे आगे भी कायम रखने के लिए शिक्षकों एवं छात्रों का आह्वान किया। अपने संबोधन में उन्होंने बताया कि राष्ट्रीय राजधानी नई दिल्ली के कनॉट प्लेस की तर्ज पर 1930 के दशक में ओवल मार्केट के रूप में निर्मित भवन में संचालित हो रहे सीएम साइंस कॉलेज के ऐतिहासिक भवन की समुचित देखरेख में उन्हें कैसी परेशानी हो रही है। उन्होंने बताया कि विज्ञान शिक्षा का सिंगल फैकल्टी कॉलेज होने के कारण यथोचित फंड की कमी के कारण इसकी समुचित मरम्मत कराने में महाविद्यालय प्रशासन लगातार असफल साबित हो रहा है। अभी हाल में उन्होंने पावर ग्रिड कारपोरेशन ऑफ़ इंडिया लिमिटेड के कॉरपोरेट सोशल रिस्पांसिबिलिटी फंड से महाविद्यालय के भवनों का जीर्णोद्धार कराने सहित आंतरिक परिसर के पार्क का विज्ञान उद्यान के रूप में सौंदर्यीकरण कराने का केंद्रीय ऊर्जा मंत्री आरके सिंह से भी अनुरोध किया है।
इस अवसर पर उपस्थित महाविद्यालय के सेवानिवृत्त शिक्षकों को भी महाविद्यालय परिवार की ओर से मिथिला पेंटिंग युक्त पाग, चादर एवं पुष्पगुच्छ प्रदान कर सम्मानित किया गया। डॉ सत्येंद्र कुमार झा, डॉ निधि झा एवं डॉ आर्यिका पाॅल के संयुक्त संचालन में आयोजित महाविद्यालय के स्थापना दिवस समारोह में धन्यवाद ज्ञापन जंतु विज्ञान विभाग की अध्यक्ष डॉ आरती कुमारी ने किया ।
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