मखाना अनुसंधान केंद्र को राष्ट्रीय दर्जा मिलने पर विद्यापति सेवा संस्थान ने जताई खुशी
18 साल के लंबे इंतजार के बाद मखाना अनुसंधान केंद्र को भारतीय कृषि अनुसंधान परिषद द्वारा पुनः राष्ट्रीय दर्जा प्रदान किए जाने का विद्यापति सेवा संस्थान ने स्वागत किया है। संस्थान के महासचिव डॉ बैद्यनाथ चौधरी बैजू ने इस गौरवशाली उपलब्धि को हासिल करने में दरभंगा के सांसद डॉ गोपाल जी ठाकुर की भूमिका की सराहना करते हुए कहा कि एक बार फिर से मखाना अनुसंधान केंद्र का कार्यक्षेत्र सिर्फ पूर्वी भारत में में न सिमटकर पूरे राष्ट्रीय स्तर का हो गया है। इसे राष्ट्रीय दर्जा हासिल होने से मिथिला की सांस्कृतिक पहचान की प्रतीक मछली और मखान को राष्ट्रीय स्तर पर एक बार फिर से पहचान मिल गई है। उन्होंने कहा कि अब मखाना के साथ-साथ मछली एवं अन्य जलीय फसलों की नई प्रजाति विकसित करने एवं इसकी उत्पादकता बढ़ाने के लिए नए शोध कार्य होने के रास्ते खुल गए हैं। इससे मिथिला के औद्योगिक विकास को एक नई दिशा मिलना अब आसान हो जाएगा। उन्होंने मिथिला के मखाना अनुसंधान केंद्र को पुनः राष्ट्रीय दर्जा प्रदान करने के लिए प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी एवं केंद्रीय कृषि मंत्री नरेंद्र सिंह तोमर के प्रति भी आभार जताया।
मैथिली अकादमी के पूर्व अध्यक्ष पं कमलाकांत झा ने कहा कि दरभंगा के मखाना अनुसंधान केंद्र को राष्ट्रीय दर्जा मिलने से अब यहां कृषि वैज्ञानिकों की सुविधाओं में वृद्धि होने के साथ ही यहां मौजूद आधारभूत संरचनाओं का विकास होना निश्चित है। इससे जलीय फसल की उत्पादन क्षमता विकसित होने के साथ-साथ खाद्य प्रसंस्करण प्रौद्योगिकी के मानकीकरण के लिए बुनियादी रणनीति तय होने एवं कारगर अनुसंधान के रास्ते खुल गए हैं।
डॉ अनिल कुमार झा ने कहा कि मखाना अनुसंधान केंद्र से राष्ट्रीय दर्जा छिन जाने के बाद यहां अनुसंधान की गतिविधि धीमी हो गई थी। बावजूद इसके इस केंद्र के वैज्ञानिकों ने मखाना की ना सिर्फ पहली प्रजाति स्वर्ण वैदेही को विकसित किया, बल्कि ‘एक जिला, एक उत्पाद’ योजना के तहत दरभंगा का चयन मखाना के विकास के लिए किया गया। अब पुनः इसे राष्ट्रीय दर्जा मिलने से इसके विकास में गति आएगी।
वरिष्ठ साहित्यकार मणिकांत झा ने कहा कि पूर्व प्रधानमंत्री अटल बिहारी बाजपेयी को मिथिला क्षेत्र के विकास की बहुत फिक्र थी। इसी सोच के तहत उन्होंने दरभंगा में राष्ट्रीय मखाना अनुसंधान केंद्र की स्थापना की थी। लेकिन कालांतर में यह केंद्र ओछी राजनीति का शिकार होकर राष्ट्रीय दर्जा से वंचित कर दिया गया। अब पुनः राष्ट्रीय दर्जा हासिल होने से मिथिला में विकास के नये अवसर सहज ही उपलब्ध हो सकेंगे।
मीडिया संयोजक प्रवीण कुमार झा ने कहा कि मखाना का जीआई टैग मिथिला मखान के नाम से मिलने के बाद मखाना अनुसंधान केंद्र को पुनः राष्ट्रीय दर्जा हासिल होना अत्यंत महत्वपूर्ण है। अब जलीय फसलों से संबंधित शोध-कार्यों में तेजी आने के साथ ही इस केंद्र को भारतीय कृषि अनुसंधान परिषद से सीधे अनुदान की प्राप्ति हो सकेगी। जिससे मिथिला के मखाना की खेती में लगे किसानों एवं मछली पालकों की दशा व दिशा में सुधार होना अवश्यंभावी है। मखाना अनुसंधान केंद्र को राष्ट्रीय दर्जा मिलने पर प्रो विजय कांत झा, विनोद कुमार झा, प्रो चंद्रशेखर झा बूढ़ाभाई, दुर्गानंद झा, नवल किशोर झा, डॉ उदय कांत मिश्र, आशीष चौधरी, पुरुषोत्तम वत्स, मनीष झा रघु आदि ने भी प्रसन्नता जताई है।
Darbhanga News24 – दरभंगा न्यूज24 Online News Portal