सीतामढ़ी में बाल मज़दूरी के खिलाफ़ बड़ी कार्यवाही, जिलाभर में विशेष अभियान के तहत 38 बच्चों को बाल श्रम से कराया मुक्त

सीतामढ़ी: श्रम संसाधन विभाग के प्रधान सचिव एवं डीएम सीतामढ़ी के द्वारा मिले निर्देशानुसार श्रम अधीक्षक सीतामढ़ी सुबोध कुमार के निर्देशन में बाल श्रम निषेध दिवस तक जिला में 44 दिवसीय विशेष अभियान के तहत् दिनांक 03.05.2023 को सुरसंड प्रखंड से 08 बाल श्रमिक, 11.05.2023 को रुन्नीसैदपुर प्रखंड से 03, 17.05.2023 को मेजरगंज प्रखंड से 03, 26.05.2023 को परिहार प्रखंड से 05, 31.05.2023 से बथानहा प्रखंड से 03, 06.06.2023 को डुमरा प्रखंड से 06, एवम 07.06.2023 को नानपुर और बोखरा प्रखंड से 10 बाल श्रमिकों को कुल 38 बाल श्रमिकों को जिलाभर से बाल श्रम से विमुक्त धावा दल , जिला पुलिस,बचपन बचाओ आंदोलन एवं प्रथम संस्था से सहयोग से विमुक्त करवाया गया। श्रम अधीक्षक सुबोध कुमार ने बताया कि बाल श्रम के विरुद्ध लगातार आम जनमानस के बीच जन जागरूकता और समाज के प्रत्येक वर्ग पर बाल श्रमिकों के विरुद्ध जन जागरूकता के लिए सघन निरीक्षण कार्यक्रम और प्रचार-प्रसार किया जा रहा है. उक्त रेस्क्यू अभियान को सफल बनाने में श्रम प्रवर्तन पदाधिकारी पिंटु कुमार,चंद्रनाथ राम,सुरेश कुमार, सुशांत कुमार,
प्रदीप कुमार, आदित्य कुमार चौधरी, रौशन कुमार, स्वेता झा , बचपन बचाओ आंदोलन के प्रतिनिधि मुकुंद कुमार चौधरी, प्रथम संस्था के प्रतिनिधी की महत्वपूर्ण भुमिका रही।
*जानिए बाल मजदूरी करवाने पर क्या है सजा*
विमुक्त बाल श्रमिक को बाल कल्याण समिति सीतामढ़ी के समक्ष उपस्थापित कर निर्देशानुसार उन्हें बाल गृह में रखा गया है. बाल एवं किशोर श्रम (प्रतिषेध एवं विनियमन) अधिनियम 1986 के तहत नियोजक के विरुद्ध संबंधित थाने में प्राथमिकी दर्ज करने की कार्रवाई की जा रही है. श्रम अधीक्षक सुबोध कुमार ने बताया कि बाल श्रमिकों से किसी भी दुकान या प्रतिष्ठान में कार्य कराना बाल एवं किशोर श्रम (प्रतिषेध एवं विनियमन) अधिनियम 1986 के अंतर्गत गैरकानूनी है तथा बाल श्रमिकों से कार्य कराने वाले व्यक्तियों को 20 हजार रुपये से 50 हजार रुपये तक का जुर्माना और 2 वर्षों तक के कारावास का प्रावधान है. इसके अतिरिक्त सर्वोच्च न्यायालय के द्वारा एम सी मेहता बनाम तमिलनाडु सरकार 1996 में दिए गए आदेश के आलोक में नियोजकों से 20 हजार रुपये प्रति बाल श्रमिक की दर से अलग से राशि की वसूली की जाएगी. इस राशि को जमा नहीं कराने वाले नियोजक के विरुद्ध एक सर्टिफिकेट केस या नीलाम पत्र वाद अलग से दायर किया जाएगा.
Darbhanga News24 – दरभंगा न्यूज24 Online News Portal