मारवाड़ी महाविद्यालय में आयोजित हुआ एड्स जागरूकता कार्यक्रम
एड्स से बचाव ही उपाय है – प्रधानाचार्य दिलीप कुमार
सामाजिक जन जागरूकता से खत्म होगा एड्स – डा घनश्याम महतो
एड्स रोगियों के साथ हो मानवीय व्यवहार – डा विकास सिंह


मारवाड़ी महाविद्यालय की राष्ट्रीय सेवा योजना द्वारा एड्स जागरूकता कार्यक्रम प्रधानाचार्य डॉ. दिलीप कुमार की अध्यक्षता में आयोजित किया गया । प्रधानाचार्य ने कहा कि एड्स घातक और लाइलाज बीमारी है। एड्स से बचाव ही उपाय है। कार्यक्रम का उद्घाटन ललित नारायण मिथिला विश्वविद्यालय के एनएसएस कार्यक्रम समन्वयक डा बिनोद बैठा जी ने करते हुए एड्स के कारणों और बचाव के उपायों पर चर्चा की। उन्होंने सरकार द्वारा चलाए जा रहे एड्स बचाव संबंधी उपायों पर चर्चा की।
विश्वविद्यालय संस्कृत विभाग के अध्यक्ष डा घनश्याम महतो जी कार्यक्रम के मुख्य अतिथि थे। उन्होंने कहा कि जब कोई व्यक्ति एचआईवी से संक्रमित हो जाता है, तो वायरस हमला करता है और प्रतिरक्षा प्रणाली को कमजोर कर देता है। जैसे ही प्रतिरक्षा प्रणाली कमजोर होती है, व्यक्ति को जानलेवा संक्रमण होता है। जब ऐसा होता है तो उस बीमारी को एड्स कहा जाता है। एक बार किसी व्यक्ति को यह वायरस हो जाए तो यह जीवन भर शरीर के अंदर रहता है।
कार्यक्रम में मुख्य वक्ता महाविद्यालय के संस्कृत विभागाध्यक्ष डा विकास सिंह ने कहा कि एड्स रोगियों के साथ मानवीय व्यवहार किया जाना चाहिए। भेदवादी चिन्तन परम्परा के लोग शायद ही किसी की पीड़ा को समझ पाएं किन्तु एक कारुणिक चित्त सदैव दूसरे के दुःख में न केवल भागी बनता है अपितु उसकी पीड़ा को दूर करने के लिए भी प्रयास करता है। दुनिया के वैज्ञानिक और डॉक्टर एड्स जैसी खतरनाक बीमारी से पिछले कुछ दशकों से जूझ रहें हैं।
एनएसएस कार्यक्रम पदाधिकारी तथा संयोजिका डॉ सुनीता कुमारी ने मंच संचालन किया। महाविद्यालय के हिंदी विभागाध्यक्ष डा अनुरुद्ध सिंह ने स्वागत भाषण देते हुए कहा कि एड्स की जागरूकता समाज में सभी वर्गों के लिए बहुत ज्यादा जरूरी है। महाविद्यालय के बर्सर डा अवधेश यादव ने धन्यवाद ज्ञापन किया। कार्यक्रम का समापन एड्स जागरूकता के लिए मानव श्रृंखला बनाकर किया गया। इस अवसर पर मानव कार्यक्रम में डा गजेन्द्र भारद्वाज, डा श्यामानंद, डा पूजा यादव, डा निशा, डा हेमंत ठाकुर, डा शकील अख्तर आदि शिक्षक; अनीश कुमार, प्रमोद, लक्ष्य ठाकुर, आशीष, विवेक, कुणाल, नीलेश, दिव्यांश, शिल्पी, अनुकृति, सीमा, संगम, सानिया, समरेश, अनिल, फैजल, खुशबू, दामिनी आदि एनएसएस के लगभग 100 छात्र – छात्राएं उपस्थित थे।
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