शराबबंदी और ताड़ी की बिक्री पर पूर्ण रूप से लगायी गयी पाबंदी के बाद नीरा के कारोबार से जुड़कर जीविका दीदियां अपनी किस्मत बदल रही है। दरभंगा जिले में कुल 13 नीरा उत्पादक समूह खोला जा चुका है, इन उत्पादक समूहों से लगभग 320 सदस्य नीरा उत्पादन के लिए जुड़ी हुई हैं। वहीं बचे 5 प्रखंडों में नीरा उत्पादक समूह खोलने की प्रक्रिया अंतिम चरण में है। दरभंगा जिला के अंतर्गत 15 से अधिक नीरा संग्रहण सह बिक्री केंद्र बनाए गए हैं। इन बिक्री केंद्रों द्वारा अबतक 23 हजार लीटर से अधिक मात्रा में नीरा का विक्रय किया जा चुका है।

जीविका के जिला परियोजना प्रबंधक डा० ऋचा गार्गी ने कहा ताड़ और खजूर के पेड़ से जो ताजा रस निकलता है, उसे नीरा कहते है। इसमें 84 फीसदी पानी के अलावा कैल्शियम, पोटेशियम, फॉस्फोरस, आयरन, जिंक, विटामिन बी, विटामिन बी कॉम्पलेक्स जैसे कई पोषक तत्व होते हैं, जो शरीर को बीमारियों से बचाने में मदद करते हैं। अभी तक 13 प्रखंडों में संग्रहण सह बिक्री केंद्र के साथ डीएमसीएच अंतर्गत संचालित जीविका दीदी की रसोई में भी बिक्री केंद्र संचालित किया जा रहा है । नीरा का लाभ बताते हुए ऋचा गार्गी ने कहा नीरा न केवल एक प्राकृतिक पेय है, अपितु यह स्वास्थ्य के लिए काफी लाभकारी भी है. नीरा के सेवन से डिहाइड्रेशन कमजोरी एवं कई अन्य बीमारियों में लाभदायक है. इसमें प्रचूर मात्रा में विटामिन एवं खनिज पाया जाता है. यह शरीर के लिए काफी फायदेमंद है. नीरा डायबिटीज एवं एनीमिया के मरीज के लिए काफी लाभकारी है।
जीविका के कृषि प्रबंधक मनोरमा मिश्रा ने बताया शहर के साथ-साथ ग्रामीण क्षेत्रों में भी नीरा की बिक्री जीविका दीदियों ने प्रारंभ कर दी है। नीरा सेवन से लोगों को अनेकों फायदा मिलने के साथ नीरा व्यवसायियों को अच्छा मुनाफा भी हो पा रहा है । उन्होंने बताया कि नीरा के निष्कर्षण में विशेष सतर्कता की आवश्यकता होती है, इसे सूर्योदय से पहले पेड़ से निकाला जाता है, तथा इसमें कोल्डचेन बनाये रखना आवश्यक होता है।
संचार प्रबंधक राजा सागर ने बताया कि नीरा से बनी मिठाइयां, गुड़ आदि लोगों को खूब पसंद आ रहा है। जिले में नीरा का फायदा बताते हुए नीरा व नीरा से निर्मित उत्पादों के उपयोग व उत्पादन को लेकर लोगों को प्रोत्साहित किया जा रहा है। नीरा के प्रति ग्राहक भी अपनी खास रूचि दिखा रहे हैं। राजा सागर ने कहा इसमें रोजगार की अपार संभावनाएं हैं, ताड़-खजूर के पेड़ से जुड़े कई उत्पाद जैसे झाड़ू, पंखा, मौनी आदि बनाकर इससे बेहतर आमदनी भी किया जा रहा है । यह पहल न केवल शराबबंदी के सकारात्मक प्रभाव को दर्शाती है, बल्कि ग्रामीण महिलाओं के सशक्तिकरण की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम भी है। नीरा उत्पादन ने महिलाओं को नए रोजगार के अवसर प्रदान किए हैं और उनकी आर्थिक स्थिति में सुधार लाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई है। इस प्रकार, दरभंगा जिले में नीरा का कारोबार एक सफल मॉडल के रूप में उभर रहा है, जो अन्य जिलों के लिए भी प्रेरणा स्रोत बन सकता है। नीरा का उत्पादन और बिक्री न केवल आर्थिक सशक्तिकरण को बढ़ावा दे रहा है, बल्कि स्वास्थ्य के प्रति जागरूकता भी बढ़ा रहा है। इस प्रकार, नीरा का व्यवसाय दरभंगा जिले में एक महत्वपूर्ण आर्थिक और स्वास्थ्य सुधार का माध्यम बन गया है, जिससे न केवल महिलाओं को रोजगार मिल रहा है, बल्कि स्थानीय लोगों को भी एक पौष्टिक पेय उपलब्ध हो रहा है। यह पहल आर्थिक विकास और स्वास्थ्य संवर्धन दोनों ही दृष्टिकोणों से सफल साबित हो रही है।
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