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सात सुरों से सजी महफिल में रातभर आनंद का गोता लगाते रहे श्रोता

सात सुरों से सजी महफिल में रातभर आनंद का गोता लगाते रहे श्रोता

 

शुक्रवार की शाम शुरू हुआ कार्यक्रम शनिवार की देर सुबह तक जारी रहा

विद्यापति सेवा संस्थान की ओर से आयोजित तीन दिवसीय मिथिला विभूति पर्व का 52वां समारोह चौथे दिन मंगलवार को सुबह नौ बजे संपन्न हुआ। मैथिली मंच के नवोदित एवं स्थापित कलाकारों की प्रस्तुति ने लगातार उन्हें बांधे रखा। यही कारण रहा कि शुक्रवार की शाम शुरू हुई सांस्कृतिक संध्या अगले दिन देर सुबह तक जारी रही। इस दौरान ना श्रोता और ना ही कलाकार थके। सृष्टि फाउंडेशन के कलाकारों द्वारा प्रस्तुत भावपूर्ण नृत्य और अनुपमा मिश्र के गाये मंगलाचरण ओ केदारनाथ कुमर के गाये गणेश वंदना से शुरू हुए तीसरे दिन के कार्यक्रम में सांस्कृतिक कार्यक्रम के गायकी की पारी की शुरुआत मैथिली मंच की लोकप्रिय गायिका पूनम मिश्रा ने विद्यापति रचित गीत ‘सुनू सुनू रसिया…’ के गायन से किया। पारंपरिक लोक धुन पर जैसे ही उन्होंने विद्यापति के गीत पर अपनी स्वर लहरी छेड़ी पूरा का पूरा दर्शक दीर्घा विभोर हो गया। इस क्रम को आगे बढ़ाते हुए

सोनी चौधरी की गायिकी में पारंपारिकता की चासनी में डुबोए विद्यापति गीत ‘जुनि उगू आजु की रात…’ एवं संस्कार गीतों के भाव ने जहां दर्शकों को आत्म विभोर किया। वहीं मैथिल युवा दिलों की धड़कन माधव राय के गाये मिथिला वर्णन सहित खुशबू मिश्रा, आलोक भारती, ऋषभ भारद्वाज, पूजा झा रूचि, अरविंद कुमार झा, अमित कुमार, अरविंद सिंह, वर्षा झा आदि द्वारा प्रस्तुत गंभीर किंतु लहकदार गीतों ने दर्शकों की तालियां बटोरने में सफलता हासिल की।

मिथिला विभूति पर्व की अद्यतन की विकास यात्रा पर केंद्रित कुंजबिहारी मिश्र की प्रस्तुति ‘बाबनमा वर्षक आयोजन सब सँ दिव्य लगैये…’ को दर्शकों ने विशेष रूप से पसंद किया। प्रसिद्ध लोक गायिका पूनम मिश्रा व जुली झा अपने चिर-परिचित अंदाज में दर्शकों के विशेष आकर्षण के केंद्र में रही। सहरसा से आए नंद सहित आकाशवाणी के कलाकार दीपक कुमार की रविन्द्र नाथ ठाकुर के लिखे गीत ‘हवा रे हवा चल चल चल, चल मिथिला में चल…’ की प्रस्तुति को भी लोगों ने खूब पसंद किया। आलोक भारती, खुशबू मिश्रा एवं जुली झा की एकल प्रस्तुतियों के बीच कुंज बिहारी मिश्र की सामूहिक प्रस्तुतियों ने श्रोताओं को झूमने पर मजबूर किया। दुखीराम रसिया की महिला व पुरुष आवाज में एक साथ की गई गायकी ने दर्शकों के बीच एकबार फिर जहां रोमांच पैदा किया वहीं रामबाबू झा, केदारनाथ कुमर, अमित कुमार, नीरज कुमार झा, रामबिहारी झा आदि की प्रस्तुतियों को भी दर्शकों ने खूब सराहा।

सुबह की बेला में कुंज बिहारी मिश्र के साथ केदारनाथ कुमर, अरविंद सिंह, नंद एवं रानी झा की प्रस्तुतियां महफिल में जान फूंकने वाले साबित हुए। फरमाइशी गीतों के अंतिम चरण में कुंज बिहारी मिश्र एवं मुकुंद मिश्र के साथ साथी कलाकारों की गायकी का जादू एक बार फिर से दर्शकों के सिर चढ़कर बोला और वे अंत तक डटे रहे। अरविंद कुमार झा के गाये सोहर गीत एवं केदारनाथ कुमर के गाए समदाउन के बाद पराती धुन में गोसाउनि गीत जय जय भैरवि की सामूहिक प्रस्तुति के साथ कार्यक्रम स्थगन की घोषणा की गई।

 

संगत कलाकारों ने भी खूब जमाया रंग

 

तीन दिवसीय मिथिला विभूति पर्व समारोह के दौरान गायकों के साथ साथ संगत कलाकारों ने भी अपनी उंगली के जादू का जमकर जलवा बिखेरा। तबला पर पं सुधीर कुमार मिश्र, हीरा कुमार झा, चंद्रमणि झा एवं कौशिक ने अपनी प्रतिभा का जमकर प्रदर्शन किया। वहीं, नाल पर भगवान बाबू, गोपाल, कमलेश एवं मुरारी ने अपनी उंगली का जादू खूब दिखाया। कैसियो पर पप्पू मिश्रा, राम बहादुर यादव आदि दर्शकों के विशेष आकर्षण का केंद्र अंत तक बने रहे। जबकि बैंजो पर शिवकुमार एक बार फिर से दर्शकों का मन मोहने में कामयाब रहे। पैड पर केशव, बिंदु, अभिनंदन एवं अवधेश की प्रस्तुतियों की लोगों ने खूब सराहना की।

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