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बदलो सरकार बचाओ बिहार अभियान के तहत सीपीआई और सीपीएम कार्यकर्ताओं का हुआ सम्मेलन

बदलो सरकार बचाओ बिहार अभियान के तहत सीपीआई और सीपीएम कार्यकर्ताओं का हुआ सम्मेलन

20 मार्च को जिला मुख्यालय पर होगा बदलो सरकार बचाओ बिहार अभियान के तहत सीपीआई और सीपीएम का आक्रोषपूर्ण प्रदर्शन।

दरभंगा भारतीय कम्युनिस्ट पार्टी व भारत की कम्युनिस्ट पार्टी (मार्क्सवादी) का ‘बदलो सरकार-बचाओ बिहार’ राज्यव्यापी आवाह्न के तहत लहेरियासराय पोलो मैदान स्थित धरना स्थल के सामने विशाल कार्यकर्ता सम्मेलन प्रोफेसर साबिर अहमद बेग और रामसागर पासवान की संयुक्त अध्यक्षता में संपन्न हुई। जिसको संबोधित करते हुए सीपीआई के राज्य सचिव व पूर्व विधायक कॉ० रामनरेश पांडे ने कहा कि सीपीआई और सीपीएम दो शरीर वह एक आत्मा है। 1925 में भारतीय कम्युनिस्ट पार्टी की गठन हुई तब से 1964 तक हम लोगों ने एक थे। लेकिन 1964 में कुछ मतांतर के कारण हम अलग हुए उसके बाद भी कई सारे जन मुद्दों पर एक साथ संघर्ष कर आम लोगों के हक हकूक में जन आंदोलन इकट्ठा किया। लेकिन 1964 के बाद पहली बार बिहार में हम लोग एक साथ कार्यकर्ता सम्मेलन किए हैं। हम लोग आगामी विधानसभा चुनाव में भी एकजुटता बनाए रखेंगे। उन्होंने कहा कि केंद्र की भाजपा नीति की सरकार लगातार गरीब, मजदूर, किसान, नौजवान की अनदेखी कर रही है। लगातार सरकार 2% लोगों को खुश करने के लिए 98% लोगों के साथ छला कर रही है। यह आम बजट में अपने दो मित्रों की झोली भरने के लाई गई है। इस बजट में खास करके बिहार के लोगों के लिए कुछ नहीं है। देश के अंदर आम लोगों का शोषण करने के लिए सरकार लोगों को धर्म की अफीम पिला रही है। कुंभ के नाम पर जिस तरह से सरकारी मिशिनरी का दुरुपयोग कर एक भ्रम की स्थिति पूरे देश के अंदर फैलाई गई। जिससे हजारों लोग की नाहक जान चली गई। सरकार धार्मिक प्रोपेगेंडा फैलाने में मसरूल है। इसकी पूरी सरकारी मशीनरी एक धर्म विशेष को गाली देने में लगी रहती है। इस देश को धार्मिक उन्माद में झोकने का काम केंद्र में बैठी नरेंद्र मोदी की सरकार कर रही है। जिससे देश के अंदर एक बड़ी अराजकता की स्थिति बनी हुई है। हिंदू मुस्लिम जो एक दूसरे के भाई थे। वे आज एक दूसरे से नफरत कर रहे हैं। केंद्र सरकार की पूरी सरकारी तंत्र ही देश के अंदर नफरत फैलाने में लगी हुई है।

कार्यकर्ता सम्मेलन को संबोधित करते हुए सीपीएम के राज्य सचिव ललन चौधरी ने कहा कि बिहार अनेक तरह के संकटों के दलदल में फसता जा रहा है। आम जनता केंद्र राज्य के एनडीए सरकार की पूंजीपति परस्त नीतियों के दुष्प्रभाव से उब चुकी है। आम आदमी खासकर गरीब दलित आदिवासी सरकार की शोषणकारी नीतियों से परेशान हो गया है और ऐसी सरकार से मुक्ति चाहता है। आम जनता के बदहाली और उससे मुक्ति के लिए जनता की छटपटाहट को देखते हुए इस जन विरोधी सरकार को बदलने के लिए भारतीय कम्युनिस्ट पार्टी और भारत की कम्युनिस्ट पार्टी (मार्क्सवादी) ने संयुक्त रूप से राज्यव्यापी आंदोलन चलाने का निर्णय लिया है। आंदोलन के पहले चरण में 20 मार्च 2025 को राज्य के सभी जिलों में संयुक्त रूप से जुलूस और प्रदर्शन आयोजित किए जाएंगे आगे के आंदोलन के रूपरेखा बाद में तय की जाएगी। बिहार देश का ऐसा राज है जहां लगभग 20 वर्षों से एक ही व्यक्ति मुख्यमंत्री कुर्सी पर विराजमान है। वही कुछ महीनो के लिए बीच में इंटरवल जरूर हुआ। इस अबधी में भले ही उस व्यक्ति की राजनीतिक वैचारिक-प्रतिबद्धता बदलती रही, लेकिन उनके मुख्यमंत्री कुर्सी नहीं बदली एक मुख्यमंत्री के 20 साल का समय बिहार का बदलने के लिए कम नहीं है। लेकिन हुआ क्या? आज तक भूमि सुधार का काम अधूरा है। लाखों बेघर को घर नहीं मिला है। लाखों भूमिहीन परिवार को जमीन नहीं मिली है। बड़े भूस्वामियों और दबंगों के कब्जे वाली लगभग 20 लाख एकड़ जमीन मुक्त नहीं हुई। इस सवालों के समाधान के लिए बंधु उपाध्याय आयोग गठन हुआ। उसके अनुशंसा ठुकरा दी गई।

सम्मेलन को संबोधित करते हुए की के राज्य सचिव मंडल सदस्य मिथिलेश झा ने कहा कि किसान सदियों से बदहाल और परेशान है। खेतों में सिंचाई के लिए पानी नहीं है। हर वर्ष बाढ़ की त्रासदी से 20 -25 जिले त्रस्त रहते हैं। अरबो की फसल और अरबो की अन्य सम्पति बर्बाद हो जाती है। लेकिन बाढ़ का स्थाई निदान नहीं। कृषि पैदावारों का उचित मूल्य नहीं मिल रहा है। बड़े व्यापारियों की लूट के शिकार है। किसान कृषि घाटे में है। खेती में होने वाला खर्च बढ़ता जा रहा है। विकास का मतलब रोजगार लेकिन बिहार में बेरोजगारी बढ़ती जारी है। रोजगार के अवसर के अभाव में लाखों युवक बिहार के बाहर हर साल पलायन करते हैं। कृषि आधारित उद्योग चीनी उद्योग, जूट उद्योग, कपड़ा उद्योग, खाद्य प्रसंस्करण उद्योग आदि से किसानों को भी लाभ होता है और बेरोजगारी को भी काम मिलता।मगर उस ओर सरकार का ध्यान नहीं है।

सम्मेलन को संबोधित करते हुए सीपीएम के राज्य सचिव मंडल सदस्य श्याम भारती ने कहा कि भ्रष्टाचार प्रशासन के नीचे से ऊपर तक जड़ जमाए बैठा है। बड़े नौकरशाहों के भ्रष्टाचार के किस्से रोज प्रकाशित हो रहे हैं। पूल और सड़क का निर्माण हो रहा है। लेकिन उससे आम जनता की भलाई कम और ठेकेदार एवं भ्रष्ट अधिकारियों की कमाई ज्यादा हो रही है। जमीन के दाखिल खारिज का काम भी बिना घुस लिए नहीं हो रहा है। महंगाई चरम पर है। निम्न वर्ग से लेकर मध्य वर्ग के सभी लोग परेशान हैं। रुपए का मूल्य घट रहा है। सामान का मूल्य बढ़ रहा है। ऐसी हालत में निश्चित आय वालों को घर चलना मुश्किल है। सत्ता की छत्र-छाया में अपराधियों का मनोबल बढ़ता जा रहा है। गांव तो गांव है, राजधानी पटना में भी लोग सुरक्षित नहीं है। व्यवसाय वर्ग लुटेरों के भय से कापते रहते हैं। व्यवसाय पर विपरीत असर हो रहा है।

कार्यकर्ता सम्मेलन को संबोधित करते हुए की के राज्य सचिव मंडल सदस्य रामचंद्र महतो ने कहा कि केंद्र की भाजपा नीत सरकार द्वारा धार्मिक भाषाई, अल्पसंख्यकों एवं समाज के अन्य कमजोर वर्ग दलित, आदिवासी, अतिपिछड़ा एवं महिलाओं के संवैधानिक अधिकारों को रौंदा जा रहा है। इन कमजोर वर्ग के अधिकारों का रक्षा कवच है-संविधान। अब संविधान पर हमले हो रहे हैं। बिहार के एनडीए सरकार केंद्र की इन कारवाईयों का समर्थक बनी हुई है। पीएम हो या सीएम एनडीए शासित राज्य में ऐन चुनाव के मौके पर घूम-घूम कर सरकारी खजाने से जिलों के बीच उपहार बांट रहे हैं। सरकारी खजाने के पैसे से सत्ताधारी दल के लिए वोट का जुगाड़ कर रहे हैं। लेकिन अन्य दिनों में आम जनता की जरूरत के लिए उपहार नहीं बांटते।

सीपीआई सीपीएम ऐसी स्थिति में आम जनता की समस्याओं को अपना मुद्दा बनाती है और उसके लिए आंदोलन का आवाह्न करती हैं। इस आंदोलन में हम जिले के विभिन्न जगह से बड़ी संख्या में शामिल होकर वर्तमान सरकार को बदलने और बिहार के डबल इंजन व जन विरोध नीतियों एवं कार्रवाइयों से बचने के लिए आगे आने की अपील करते हैं।

कार्यकर्ता सम्मेलन के दौरान सार्वजनिक जन वितरण प्रणाली मजबूत करने, किसानों के आय दुगुनी करने के लिए तमाम कृषि उत्पादों पर न्यूनतम समर्थन मूल्य की गारंटी करने, किसानों के अधिगृहित जमीन का वर्तमान बाजार दर पर मुआवजा देने, किसानों की बगैर सहमति के जमीन का अधिग्रहण बन्द करने, सभी लाभार्थियों को 35 किलो अनाज देने देने, बेघरों को 10 डिसमिल जमीन और मकान देने, सामाजिक सुरक्षा पेंशन प्रतिमा ₹3000 करने, स्मार्ट मीटर वापस लेने, 200 यूनिट मुफ्त बिजली देने, आरक्षण की वृद्धि को संविधान की नवमी अनुसूची में शामिल करने, महंगाई पर रोक लगाने, अपराध और भ्रष्टाचार मुक्त बिहार बनाने, बाढ़-सुखार का स्थायी निदान करने, सभी योजना कर्मियों, आंगनवाड़ी, आशा, ममता, मध्यान भोजन कर्मियों, वैक्सीन कुरियर, जीविका कैडर का स्थाईकरण करने, सफाई, परिवहन सहित तमाम असंगठित क्षेत्र के मजदूरों के लिए सामाजिक सुरक्षा पेंशन सुनिश्चित करने, शहरी, ग्रामीण क्षेत्रों में बसे ग

गृहविहिन को उजाड़ना बंद करने, बेरोजगारी को रोजगार देने या बेरोजगारी भत्ता देने आदि की मांग की गई।

कार्यकर्ता सम्मेलन को सीपीआई के जिला सचिव नारायण जी झा, सीपीएम के जिला सचिव अविनाश ठाकुर मंटू, सीपीआई सहायक जिला सचिव राजीव चौधरी, जिलाकोषाध्यक्ष सुधीर कुमार, सीपीएम जिला सचिव मंडल सदस्य दिलिप भगत, जिला सचिव मंडल सदस्य दिनेश झा, गणेश महतो, रघुनाथ झा, नथुनी झा, गोपाल ठाकुर, अली अहमद तमन्ने, राजू मिश्रा, मुखिया कुमार किसलय, विश्वनाथ मिश्र, मणिकांत झा, मोहम्मद कलाम,सुनील शर्मा, नीरज कुमार ललितेश्वर पासवान, शरद कुमार सिंह, शशिरंजन प्रताप सिंह, अरशद सिद्दीकी, ललित मिश्र, भोला सिंह, शिवकुमार सिंह आदि ने संबोधित किया।

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