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• असराहा पंचायत में संचालित अल्पसंख्यक आवासीय विद्यालय में ‘जीविका दीदी की रसोई’ का औपचारिक उद्घाटन हुआ। • इन विद्यालयों में बच्चों को बेहतर भोजन और स्वच्छता सेवाएं प्रदान करने के लिए ‘जीविका दीदी की रसोई’ की शुरुआत की गई है।

दरभंगा जिले के केवटी प्रखंड स्थित असराहा पंचायत में संचालित अल्पसंख्यक आवासीय विद्यालय में शुक्रवार को ‘जीविका दीदी की रसोई’ का औपचारिक उद्घाटन अल्पसंख्यक कल्याण विभाग के सचिव मो. सोहेल, डीपीएम डॉ. ऋचा गार्गी, मुकेश तिवारी सुधांशु, बीपीएम मंतोष कुमार ने संयुक्त रूप से फीता काट कर किया। इस पहल का उद्देश्य विद्यालय के छात्र-छात्राओं को संतुलित, पौष्टिक एवं स्वच्छ भोजन उपलब्ध कराना है। मो. सोहेल ने उद्घाटन के दौरान बताया कि बिहार राज्य में फिलहाल

किशनगंज और दरभंगा जिले में दो अल्पसंख्यक आवासीय विद्यालयों का संचालन किया जा रहा है। इन विद्यालयों में बच्चों को बेहतर भोजन और स्वच्छता सेवाएं प्रदान करने के लिए ‘जीविका दीदी की रसोई’ की शुरुआत की गई है। यह पहल बिहार सरकार और जीविका के संयुक्त प्रयासों का हिस्सा है, जिससे महिलाओं को आत्मनिर्भर बनाने और बच्चों को गुणवत्तापूर्ण भोजन उपलब्ध कराने का लक्ष्य रखा गया है। उन्होंने यह भी बताया कि ‘जीविका दीदी की रसोई’ बिहार के अन्य जिलों में भी सफलतापूर्वक संचालित हो रही है, और इसी भरोसे के आधार पर इसे अल्पसंख्यक आवासीय विद्यालयों में भी लागू किया गया है। उन्होंने विद्यालय के छात्रों से संवाद किया, उनकी समस्याओं को सुना और उन्हें शिक्षा व स्वच्छता के प्रति जागरूक किया।

डीपीएम डॉ. ऋचा गार्गी ने बताया कि विद्यालय में ‘जीविका दीदी की रसोई’ की शुरुआत के साथ स्थानीय जीविका दीदियों को रोजगार के अवसर प्रदान किए गए हैं। 19 जीविका दीदियों को रसोई संचालन की जिम्मेदारी दी गई है, वहीं 15 जीविका दीदियां विद्यालय परिसर की सफाई व्यवस्था देखेंगी। भविष्य में वस्त्र धुलाई एवं अन्य सफाई कार्यों को भी जीविका दीदियों के माध्यम से संचालित किया जाएगा। उन्होंने बताया कि जीविका से जुड़ी ये महिलाएं पहले विभिन्न छोटे व्यवसायों में कार्य कर रही थीं, लेकिन अब इन्हें स्थायी और नियमित आय का स्रोत मिल सकेगा। यह पहल सामाजिक एवं आर्थिक रूप से महिलाओं को सशक्त बनाएगी और उन्हें आत्मनिर्भर बनने का अवसर प्रदान करेगी।

मुकेश तिवारी ने जानकारी दी कि रसोई संचालन की पूरी व्यवस्था को सुव्यवस्थित और बाधारहित रखने के लिए इसे दो शिफ्टों में चलाया जाएगा। इससे यह सुनिश्चित किया जाएगा कि छात्रों को समय पर भोजन मिले और कोई व्यवधान उत्पन्न न हो। उन्होंने यह भी बताया कि इस कार्य के लिए स्थानीय जीविका दीदियों का ही चयन किया गया है, जिससे उन्हें आवागमन में कोई कठिनाई नहीं होगी और वे अपने कार्य को सुचारू रूप से कर सकेंगी।

 

गैर क़ृषि प्रबंधक अशोक रंजन ने कहा ‘जीविका दीदी की रसोई’ की यह पहल बच्चों के स्वास्थ्य और महिला सशक्तिकरण के क्षेत्र में एक महत्वपूर्ण कदम है। इस मॉडल को अन्य जिलों में भी लागू करने की योजना है ताकि अधिक से अधिक महिलाओं को रोजगार और बच्चों को बेहतर पोषण मिल सके।

 

बीपीएम मंतोष कुमार ने बताया कि इस रसोई का संचालन ‘विकास संकुल संघ’ के तहत किया जा रहा है। उन्होंने आश्वस्त किया कि इस पहल से विद्यालय के छात्र-छात्राओं को बेहतर सुविधाएं मिलेंगी, जिससे उनकी सेहत और शिक्षा दोनों पर सकारात्मक प्रभाव पड़ेगा।

इस अवसर पर जिला संचार प्रबंधक राजा सागर, आशीष कुमार, ब्रजेश कुमार, ब्रह्मदेव, किशोर चंद्र, अविनाश, संतोष राय, कुमारी रूपा, अंकिता सहित कई अन्य जीविका कर्मी उपस्थित रहे।

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