जुम्मा अलविदा की नमाज़ के मौके पर अखिल भारतीय कांग्रेस कमेटी अल्पसंख्यक विभाग के राष्ट्रीय संयोजक डॉ. जमाल हसन ने काली पट्टी बांधकर वक्फ बिल का विरोध किया। उनके साथ बड़ी संख्या में अन्य लोगों ने भी इस विरोध प्रदर्शन में भाग लिया और काली पट्टी बांधकर सरकार के इस नए विधेयक के प्रति अपनी असहमति जताई। डॉ. जमाल हसन ने कहा कि यह विधेयक समुदाय की धार्मिक और सामाजिक धरोहरों पर सीधा हमला है और इसे किसी भी हालत में स्वीकार नहीं किया जा सकता।

डॉ. जमाल हसन ने अपने संबोधन में कहा कि वक्फ संपत्तियां सिर्फ जमीन का टुकड़ा नहीं हैं, बल्कि वे हमारे धर्म, संस्कृति और परंपराओं का अहम हिस्सा हैं। इन संपत्तियों का उपयोग मस्जिदों, मदरसों, कब्रिस्तानों और अन्य धार्मिक-सामाजिक कार्यों के लिए किया जाता है। उन्होंने आरोप लगाया कि सरकार इस विधेयक के माध्यम से वक्फ संपत्तियों पर नियंत्रण स्थापित करना चाहती है, जिससे समुदाय को अपने धार्मिक और सामाजिक कार्यों में कठिनाइयों का सामना करना पड़ेगा। उन्होंने यह भी कहा कि यह विधेयक संविधान द्वारा दिए गए धार्मिक स्वतंत्रता के अधिकार का उल्लंघन करता है। वक्फ संपत्तियों पर सरकार के बढ़ते हस्तक्षेप से कई धार्मिक स्थलों पर खतरा मंडराने लगा है। सरकार को चाहिए कि वह किसी भी समुदाय की सहमति के बिना ऐसे कानून न बनाए जो उनकी धार्मिक भावनाओं को ठेस पहुंचाए।
डॉ. जमाल हसन और उनके समर्थकों ने काली पट्टी बांधकर शांतिपूर्ण विरोध दर्ज कराया, ताकि सरकार और प्रशासन इस मुद्दे पर ध्यान दें। उन्होंने कहा कि यह विरोध किसी भी राजनीतिक एजेंडे का हिस्सा नहीं है, बल्कि यह समुदाय के संवैधानिक अधिकारों की रक्षा के लिए किया गया है। उनका कहना था कि यदि सरकार ने इस विधेयक को वापस नहीं लिया तो विरोध और तेज किया जाएगा और जरूरत पड़ी तो देशव्यापी आंदोलन भी खड़ा किया जाएगा। उन्होंने सभी सामाजिक संगठनों और समुदाय के लोगों से एकजुट होकर इस विधेयक के विरोध में आवाज उठाने की अपील की और कहा कि जब तक यह विधेयक वापस नहीं लिया जाता, तब तक विरोध जारी रहेगा।
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